Monday, 22 July 2019

गोएयर ने नई उड़ानों के साथ अपने नेटवर्क का विस्‍तार किया

नई दिल्ली, 22 जुलाई 2019: भारत की प्रमुख विमानन कंपनी गो एयर अपने दायरा का विस्‍तार करने के मुहिम में जुटी है। गोएयर ने 19 जुलाई 2019 से दिल्‍ली से अबू धाबी,  मुंबई से अबू धाबी और मुंबई से मस्‍कट के लिए उड़ान शुरु की। 
इनकी टिकट की कीमतें क्रमश: 7,098 रुपये, 6,599 रुपये और 7,100 रुपये से शुरु हो रही हैं। 25 जुलाई 2019 से गोएयर दिल्‍ली से बैंकॉक, जिसका किराया 8,197 रुपये से शुरू हो रहा है और 6,200 रुपये में कन्‍नूर-दुबई की पहली उड़ान आरंभ करेगा। गोएयर 1 अगस्‍त 2019 को मुंबई से बैंकॉक के लिए अपनी पहली उड़ान शुरू करेगा, जिसका किराया 8,498 रुपये होगा। इसके बाद, गोएयर कन्‍नूर-कुवैत की भी उड़ान आरंभ करेगा।
घरेलू मोर्चे पर गो एयर अपने हैदराबाद परिचालन को भी सुदृढ़ कर रहा है। कंपनी हैदराबाद से कोचीन (किराया 3,240 रुपये से शुरू), चेन्‍नई (1,724 रुपये), जयपुर(2,373 रुपये), बेंगलुरू (1,811 रुपये), चंडीगढ़ (4,250 रुपये), और पटना (3,295 रुपये) के लिए 8 नई उड़ानें आरंभ करेगा। इनमें से, 2 उड़ानें मौजूदा हैदराबाद-बेंगलुरू-हैदराबाद सेक्‍टर पर फ्रीक्‍वेंसी संकलन हैं और इसे उसी दिन वापसी वाली फ्‍लाइट बनाती है।
इस विस्‍तार के बारे में गो एयर के प्रबंध निेदेशक श्री जेह वाडिया  ने कहा, “हम इस समय आक्रामक विस्‍तार योजना पर चल रहे हैं और नई उड़ानें हमारी उसी सोच को परिलक्षित करती हैं। अपने अंतर्राष्‍ट्रीय परिचालन की शुरुआत करने के महज एक साल के भीतर सात नए अंतर्राष्‍ट्रीय गंतव्‍यों की घोषणा करना हमारे लिए एक महत्‍वपूर्ण उपलब्धि है। यात्रियों को तीव्र एवं सुविधाजनक कनेक्‍शन प्रदान करने के लिए हमने वैश्विक और प्रादेशिक विस्‍तार की योजना बनाई है और यह उत्‍कृष्‍टता की दिशा में जारी हमारे सफर को प्रतिबिंबित करता है।''
उन्होंने दावा किया कि ये सभी उड़ानें एयरलाइन के बढ़ते नेटवर्क को और मजबूत करेंगीं तथा यात्रियों के पास अब गो एयर के जाने-पहचाने किफायती यात्रा अनुभव को एक्‍स्‍प्‍लोर करने का मौका होगा। नेटवर्क विस्‍तार को सहयोग करने के लिए, अपने एयरक्राफ्‍ट बेड़े को भी बेहतर कर रहा है। आज, गो एयर ने अपने 51वें एयरक्राफ्‍ट की डिलवीवरी प्राप्‍त कर ली है। भविष्‍य में कंपनी हर महीने अपने बेड़े में कम से कम एक एयरक्राफ्‍ट का संकलन करेगी। इससे उड़ानों की संख्‍या बढ़ेगी, अधिक गंतव्‍य जुड़ेंगे और ग्राहकों को और स्‍मार्ट विकल्‍प मिलेंगे। अभी तक, गो एयर ने अपनी शुरुआत से लगभग 73.3 मिलियन यात्रियों को उनके गंतव्‍य तक पहुंचाया है। कंपनी का मकसद अगले दो सालों में 100 मिलियन यात्रियों के जादुई आंकड़े को छूना है।
उन्होंने कहा कि गो एयर भारत की सबसे भरोसेमंद एयरलाइन बनकर उभरी है और इसने कई महीनों तक शानदार बेस्‍ट-ऑन-टाइम प्रदर्शन किया है। 20 जुलाई 2019 को यह एयरलाइन एक बार फिर लगातार 10वें महीने बेस्‍ट ओटीपी के साथ विजेता बनकर सामने आएगी। निश्चित रूप से यह एक रिकॉर्ड होगा। 


Sunday, 21 July 2019

ओस्टियोआर्थराइटिस के बारे में महत्वपूर्ण शोधपरक पुस्तक

पुस्तक के लोकार्पण के दौरान प्रो. ए ए शेट्टी और पुस्तक के संपादक प्रो. डा. राजू वैश्य


प्रसिद्ध आर्थोपेडिक एवं ज्वाइंट रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ प्रो. राजू वैश्य के संपादन में प्रकाशित पुस्तक अब बाजार में उपलब्ध


घुटने की ओस्टियो आर्थराइटिस के विभिन्न पहलुओं एवं उपचारों के बारे में वैज्ञानिक और तथ्यपरक जानकारी देने वाली पुस्तक ”नी ओस्टियोआर्थराइटिस—क्लिनिकल अपडेट” का लोकार्पण पिछले दिनों इंगलैंड के लिसेस्टर में आयोजित ब्रिटिश इंडियन आर्थोपेडिक सोसायटी ..बीआईओएस.. के वार्षिक सम्मेलन के दौरान भारतीय मूल के प्रसिद्ध स्टेम सेल वैज्ञानिक प्रो. ए ए शेट्टी ने किया।


इस पुस्तक का संपादन भारत के प्रसिद्ध आर्थोपेडिक सर्जन एवं अनुसंधानकर्ता प्रो. डा. राजू वैश्य ने किया है जिसमें घुटने की ओस्टियो आर्थराइटिस की रोकथाम और उपचार के बारे में वैज्ञानिक एवं तथ्यपरक जानकारी देने वाले शोध परक आलेखों को शामिल किया गया है। इन आलेखों को देश के प्रमुख आर्थोपेडिक विशेषज्ञों एवं शोधकर्ताओं ने लिखा है। यह पुस्तक की एक खासियत यह है कि इसमें रोचक तरीकों से ऑस्टियोआर्थराइटिस के कई महत्वपूर्ण एवं विशेष मामलों का विश्लेषण किया गया है। पुस्तक को बेहतरीन तरीके से संकलित और संपादित किया गया है और यह पुस्तक गेरिएट्रिक चिकित्सकों, आर्थोपेडिक सर्जनों, फिजियोथेरेपिस्टों और नर्सों के साथ-साथ आर्थोपेडिक्स के छात्रों और शोधकर्ताओं को भी बहुत मदद मिलेगी। यह पुस्तक चिकित्सा के छात्रों तथा चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को घुटने की ओस्टियो आर्थराइटिस के बारे में गहराई से जानने में मददगार साबित होगी।
इस पुस्तक में घुटने की ओस्टियो आर्थराइटिस के सर्जरी रहित तरीकों, ओस्टियो आर्थराइटिस में फिजियोथिरेपी, फिजियोथिरेपी में उपयोग किए जाने वाली विभिन्न विधियों, मरीजों को चलने-फिरने में मदद करने वाले आर्थोटिक उपकरणों, नौट्रासेउटिकल्स, आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। इसके अलावा आपरेशन एवं बिना आपरेशन ओस्टियोपोरोसिस की उपचार विधियों, हाल में मिली वैज्ञानिक कामयाबियों, विभिन्न तरह के इम्प्लांटों, आर्थोस्कोपी, कम्प्यूटर आधारित नैविगेशन प्रणाली, टोटल नी आर्थोस्कोपी और रोबोट आधारित नैविगेषन आदि विषयों को भी पुस्तक में शामिल किया गया है।


इस पुस्तक के संपादक प्रो. डा. राजू वैश्य भारत में आर्थोपेडिक बिरादरी में सर्वाधिक ख्याति प्राप्त चिकित्सक एवं चिकित्सा अनुसंधानकर्ता हैं। विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में उनके 300 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। कई अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं के वह संपादक रह चुके हैं। वर्ष 2015 में अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में 58 शोध पेपर प्रकाशित हुए जबकि वर्ष 2018 में 80 शोध पत्र प्रकाशित हुए जो कि एक रिकॉर्ड है। वह नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में वरिष्ठ आर्थोपेडिक एवं ज्वांइट रिप्लेसमेंट सर्जन हैं। साथ ही वह इंडियन कार्टिलेज सोसायटी और आर्थराइटिस केयर फाउंडेशन (एसीएफ) के अध्यक्ष हैं। वह प्रतिष्ठित शोध पत्रिका-जर्नल आफर क्लिनिकल ऑर्थोपेडिक्स एंड ट्रौमा के प्रमुख संपादक हैं। दुलर्भ किस्म की आर्थोपेडिक शल्य क्रियाओं को सफल अंजाम देने के लिए उनका नाम 2012, 2013, 2014 और 2016 में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज किया जा चुका है। अफगानिस्तान, नाइजीरिया, कांगो आदि जैसे दुनिया के सबसे कठिन और युद्धग्रस्त इलाकों में भी उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को चिकित्सा सेवाएं प्रदान की है। डा. बी सी रॉय ओरेशन अवार्ड एंवं गोल्ड मेडल, इनोवेशन अवार्ड इन मेडिसीन, प्राइड आफ एशिया अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड जैसे महत्वपूण पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं। वह इंडियन कार्टिलेज सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष एवं आर्थराइटिस केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं तथा नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में वरिष्ठ आर्थोपेडिक एवं ज्वांट रिप्लेसमेंट सर्जन हैं।


इस पुस्तक में ओस्टियो आर्थराइटिस के परम्परागत उपचार विधियों के अलावा गैर परम्परगत उपचार विधियों पर आधारित आलेखों को भी शामिल किया गया है। मिसाल के तौर पर इस पुस्तक में शामिल एक शोध परक आलेख में बताया गया है कि आसन (शारीरिक मुद्रा), प्रणायम (श्वसनन क्रिया), ध्यान और अध्यात्मिक एवं भावनात्मक विचार प्रणाली पर आधारित योग थिरेपी ओस्टियो आर्थराइटिस के कारण उत्पन्न समस्याओं का समाधान करने में मददगार साबित होती है। ''घुटने की ओस्टियो आर्थराइटिस के प्रबंधन में जीवनशैली संबंधित सुधार'' नामक शोध पत्र में आर्थराइटिस विशेषज्ञ एवं शोधकर्ता डा. विवेक कुमार श्रीवास्तव ने कहा है कि योगा थिरेपी की मदद से कार्टिलेज प्रोटियोग्लायकम घटक में वृद्धि की जा सकती है और कार्टिलेज को क्षतिग्रस्त होने से रोका जा सकता है। योग क्वार्डिसेप्स और हैमस्ट्रिंग्स जैसी उन खास मांसपेषियों को मजबूत बनाने में सहायक है जो जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए सिकुड़ती है।
इस आलेख में डा. श्रीवास्तव कहते हैं कि योग अभ्यास करने से शरीर के विभिन्न हिस्सों में खिंचाव एवं मजबूती आने के कारण सिनॉवियल तरल की मत्रा में कमी नहीं आती। मसाज करने से भी अंदुरूनी हिस्से में ताजे रक्त का संचार होता है और नर्वस प्रणाली पुनर्जीवित होती है और जोड़ों, मांसपेषियों एवं लिगामेंट में चिकनापन आती है। इसका नर्वस एवं रक्त संचरण प्रणालिया पर अलग-अलग प्रभाव प्रड़ता है। साथ ही शरीर को राहत प्रदान करने वाले कारक सक्रिय होते हैं।
यह पुस्तक इस मायने में महत्वपूर्ण है कि इस पुस्तक के जरिए घुटने की आर्थराइटिस की दिशा में हमारे देश में हो रहे अध्ययनों एवं शोधों को प्रमुखता दी गई है। हमारे देश में प्रकाशित होने वाली चिकित्सा विज्ञान की ज्यादातर पुस्तकें विदेशों में होने वाले शोधों पर आधारित होती है और इस मायने में प्रो. राजू वैश्य ने एक नई पहल की है। इस पुस्तक के जरिए चिकित्सा कार्यों में लगे हुए चिकित्सकों को शोध कार्यों और लेखन कार्यों के लिए भी प्रेरित किया गया है। यह देखा जाता है कि हमारे देश में ज्यादातर चिकित्सक एवं सर्जन चिकित्सा कार्यों में इतना व्यस्त रहते हैं कि वे अध्ययन, शोध एवं लेखन को पर्याप्त समय नहीं दे पाते जिसके कारण भारत के चिकित्सकों के अनुभव एवं शोध सामने नहीं आ पाते और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की पुस्तकों में भारत में होने वाले चिकित्सकीय शोधों और भारतीय चिकित्सकों के अनुभवों को जगह नहीं मिल पाती। उम्मीद है कि इस पुस्तक के कारण अन्य चिकित्सक भी शोध एवं लेखन कार्यों के लिए प्रेरित होंगे ताकि चिकित्सा विज्ञान में भारतीय अनुभवों को भी जगह मिल सके।


Saturday, 20 July 2019

दिल्ली पुलिस ने गोदामों और दुकानों पर छापा मारा, बड़ी मात्रा में नकली कीटनाशक जब्त किए

नई दिल्ली, 20 जुलाई - दिल्ली पुलिस ने नकली कीटनाशकों का बड़ा जखीरा जब्त किए और एक ऐसे खतरनाक ऑपरेशन का खुलासा किया है जो न केवल लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक था, बल्कि वैध व्यवसायों के लिए भी हानिकारक था।
उत्तर जिला सब्जी मंडी पुलिस टीम ने सब इंस्पेक्टर श्री भगवान के नेतृत्व में इस सप्ताह की शुरुआत में 3 दुकानों और 3 गोदामों पर छापा मारा और सेक्शन 63CR Act103.104 ट्रेडमार्क अधिनियम के तहत लाखों रुपये के नकली कीटनाशक जब्त किए। जब्त की गई 3 दुकानों में हरिओम बीज और कीटनाशक, गुरुजी बीज और कीटनाशक और शिवम कृषि कृषि व्यापारी थे।
नेत्रिका कंसल्टिंग की पहल पर छापे और बरामदगी की गई - देश की प्रमुख धोखाधड़ी जांच और एंटी-नकली संचालन एजेंसी, अपने ग्राहक एफएमसी के लिए - जिसने यह सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य किया कि कुछ गलत लोगों के कारण लोगों को नकली कीटनाशकों का शिकार न होना पड़े।
बरामदगी पर टिप्पणी करते हुए, नेत्रिका कंसल्टिंग के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम बहुत खुश हैं कि पुलिस ने समय पर कार्रवाई की और सुनिश्चित किया कि अपराधियों को पकड़ा और नकली उत्पादों को जब्त किया गया। हम अपने ग्राहकों के लिए ऐसा करना जारी रखेंगे और समाज के लिए भी अपना काम करेंगे। ”


यूपी के शीर्ष युवा बैडमिंटन खिलाडी स्कूल बैडमिंटन क्वेस्ट में एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा करेंगे


नोएडा, 20 जुलाई, 2019: खेल को बढ़ावा देने वाली प्रमुख संस्था सारा फाउंडेशन ने उत्तर प्रदेश भर में जमीनी स्तर पर बैडमिंटन को बढ़ावा देने के लिए स्कूल बैडमिंटन क्वेस्ट SCHOOL BADMINTON QUEST (SBQ) नामक पहल शुरू की है। यह पहल उत्तर प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन (यूपीबीए) की ओर से संबद्ध और स्वीकृत है और नोएडा और ग्रेटर नोएडा जिला बैडमिंटन एसोसिएशन द्वारा समर्थित है। यह टूर्नामेंट उत्तर प्रदेश के 9 शहरों में 5 महीने (जुलाई से नवंबर) की अवधि में होगा और ग्रैंड फिनाले लखनऊ या नोएडा में आयोजित किया जाएगा। टूर्नामेंट का पहला चरण 22 जुलाई से नोएडा स्टेडियम, नोएडा में सेक्टर 21 ए से शुरू होगा। एसबीक्यू टूर्नामेंट के लिए www.tournamentquest.com पर ऑनलाइन पंजीकरण किया जा सकता है और नोएडा लेग में प्रवेश की अंतिम तिथि 20 जुलाई है। इसके बाद SBQ - लखनऊ लेग 5 से 7 अगस्त 2019 को केडी सिंह बाबू स्टेडियम, लखनऊ में शुरू होगा।
इस पहल के बारे में जानकारी देते हुए SBQ के आयोजन सचिव संजीव कुमार ने कहा, “उत्तर प्रदेश के 9 शहरों में SBQ के लॉन्च की घोषणा करते हुए हमें खुशी हो रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शहरी और ग्रामीण स्तर पर BADMINTON कार्यक्रम विकसित करना और BADMINTON खेलने के लिए और अधिक युवाओं को प्रेरित करना है और अलग-अलग समूहों में स्कूल स्तर पर चुने गए बैडमिंटन खिलाडियों को पहचान करना तथा उन्हें बढ़ावा देना है। इससे उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों के बीच जमीनी स्तर और स्कूल स्तर पर BADMINTON गतिविधियों के विकास और मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के महत्व को बढ़ाने में मदद मिलेगी। हम इस महत्वपूर्ण पहल का समर्थन करने के लिए उत्तर प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन को धन्यवाद देते हैं और इस एसबीक्यू में स्कूल पार्टनर बनने के लिए विजडम ट्री स्कूल को भी विशेष धन्यवाद देते हैं। ”
यूपीबीए और नोएडा और ग्रेटर नोएडा जिला बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव श्री आनंद खरे ने कहा, “एसबीक्यू एसएआरए फाउंडेशन द्वारा की गई एक अनूठी पहल है जिसमें खिलाड़ियों और स्कूली छात्रों को संबंधित आयु वर्गों में एक दूसरे के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने के लिए कई अवसर हैं। इस प्रकार, यदि कोई खिलाड़ी किसी भी चरण में मैच हार जाता है, तो वह फिर से दूसरे चरण में भाग लेकर बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर प्राप्त कर सकता है। इसलिए, हम दृढ़ता से मानते हैं कि एसबीक्यू उत्तर प्रदेश में बैडमिंटन को काफी बडे स्तर पर बढ़ावा देगा। ”


Monday, 15 July 2019

ओलम्पिक्स को ध्यान में रखते हुए शूटिंग, तीरंदाजी, कुश्ती और मुक्केबाजी को खेल कोटा भर्ती में शामिल करने की इंडियन ऑयल की योजना

नई दिल्ली, 15 जुलाई 2019: भारत की प्रमुख राष्ट्रीय तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) खेलों को बढ़ावा देने के लिए अपने भावी रोडमैप की घोषणा की है ताकि सभी खेलों के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाया जा सके। सभी देशवासी चाहते हैं की हमारे खिलाड़ी ओलम्पिक्स में सफलता हासिल करें और देश की इस आकांक्षापूर्ति में सहयोग देने के लिए इंडियन ऑयल विविध तरीकों से योगदान कर रही है। इंडियन ऑयल ने आज नई दिल्ली एक दिवसीय 'स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव 2019' का आयोजन किया जिसमें उन खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया जो अपने शुरुआती दिनों में कंपनी से जुड़े और खेल जगत में अपनी पहचान कायम की। इंडियन ऑयल ने देश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए नई पहलों की घोषणा की है। इस सम्मेलन में 60 से अधिक खिलाड़ी शामिल हुए जो इंडियन ऑयल परिवार का हिस्सा हैंजिनमें से कुछ नाम हैं- पुलेला गोपीचंद, मानिका बत्रा, चेतेश्वर पुजारा, पृथ्वी शॉ, रोहन बोपन्ना, ए शरत कमल, सिमरनजीत सिंह, पी कश्यप, वसीम जाफर, अपर्णा बालन, एन सिक्की रेड्डी और बी. अधिबान आदि।
आईओसीएल के निदेशक (एचआर) श्री रंजन के. महापात्रा ने कहा, "प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 2020 और 2024 के ओलम्पिक्स पर लक्ष्य कर रहे हैं और उन्होंने एक टास्क फोर्स गठित की है जो खिलाड़ियों एवं विभिन्न खेलों को सहयोग देने के लिए समग्र ऐक्शन प्लान बनाए। इंडियन ऑयल इस ध्येय की प्राप्ति व इसमें योगदान हेतु काम कर रही है और इसके लिए कंपनी भविष्य के पदक विजेताओं को संवार रही है तथा देश के लिए सम्मान अर्जित करने के उनके सपनों में सहयोग कर रही है।”
इंडियन ऑयल की खेल नीति के रोडमैप का खुलासा करते हुए श्री महापात्रा ने बताया, "इंडियन ऑयल की योजना वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, शूटिंग, तीरंदाजी, कुश्ती, कबड्डी, फुटबॉल व मुक्केबाजी खेलों को शामिल करने की है जिससे इन्हें खेलने वाले खिलाड़ियों की कंपनी में भर्ती की जाए। इंडियन ऑयल पैरालिम्पिक खिलाड़ियों को भी अपनी योजना में शामिल करने की प्रक्रिया में है।”
"इंडियन ऑयल के कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्वों के महत्वपूर्ण पक्षों में से एक है - खेल; और हम जमीनी स्तर से खेल क्रांति लाने के लिए प्रयासरत हैं। कॉर्पोरेशन ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों को बढ़ावा देने की संभावना पर सक्रियता से काम कर रही है, कंपनी की योजना सरकारी स्कूलों में कोचिंग सुविधाएं व किट मुहैया कराने की है।
उन्होंने कहा, ''इंडियन ऑयल पूर्व खिलाड़ियों को बढ़ावा देती है की वे राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोचिंग गतिविधियों से जुड़े और प्रतिभावान खिलाड़ियों को तैयार करें जिससे वे देश के खेल सितारे बनें और पदक जीत कर लाएं।,”
श्री महापात्रा ने कहा, "इंडियन ऑयल के खिलाड़ी निरंतर मजबूत होकर आगे बढ़े हैं और उन्होंने सबसे ऊंची प्रतिस्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन करके देशवासियों के हृदय को गौरव से भर दिया है। यह स्पोर्टस कॉन्क्लेव 2019 ऐसे ही असाधारण खिलाड़ियों का उत्सव हैकॉर्पोरेशन के वरिष्ठ प्रबंधन की उपस्थिति में इंडियन ऑयल खिलाड़ियों का यह सम्मेलन एक ऐसा मंच है जहां हम खेलों में उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों को सम्मानित करते हैं,”
इस कॉन्क्लेव में इंडियन ऑयल आइकॉन ऑफ द ईयर को भी पुरस्कृत किया गया


Friday, 12 July 2019

विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन

ग्रेटर नौएडा । विश्व जनसंख्या दिवस के मौके पर आज शहर के विभिन्न स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। नौएडा एक्सटेंशन स्थित द विजडम ट्री स्कूल में छठी कक्षा के छात्रों ने विश्व जनसंख्या दिवस की थीम पर आधारित एक विशेष सभा का आयोजन किया। इसका उद्देश्य छात्रों को दुनिया भर में जनसंख्या की वर्तमान स्थिति के बारे में जागरूक बनाना था। 
इस मौके पर सवाल—जवाब प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। साथ ही स्कूल में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में छात्रों को बढ़ती जनसंख्या के कारण हो रहे नुकसान से अवगत कराया गया। स्कूल के अध्यक्ष श्री के के श्रीवास्तव और प्रिंसिपल सुश्री सुनीता ए शाही ने जनसंख्या पर अंकुश लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि आने वाली पीढ़ियां उपलब्ध संसाधनों के उपयोग को अनुकूलित करने में सक्षम हो सकें।
श्री के के श्रीवास्तव ने बताया कि जनसंख्या बढने से संसाधन लगातार कम होते जा रहे है। बढती हुई जनसंख्या का लेकर संयुक्त राष्ट्र ने 1989 में 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। 
सुश्री सुनीता ए शाही ने कहा कि यदि भारत ने अपनी तेजी से बढ रही जनसंख्या की दर कम करने के लिए जल्दी कुछ ठोस कदम नहीं उठाए तो वर्ष 2030 तक व विश्व में सबसे बडी आबादी वाला देश बन जाएगा। 


Tuesday, 9 July 2019

वीएलसीसी इंस्टीट्यूट ऑफ ब्यूटी एंड न्यूट्रिशन अगले साल से हर साल 40 हजार छात्रों को ब्यूटी एवं न्यूट्रिशन का प्रशिक्षण देगा।

नई दिल्ली, 09 जुलाई। वीएलसीसी इंस्टीट्यूट ऑफ ब्यूटी एंड न्यूट्रिशन, एशिया में ब्यूटी एंड वेलनेस ट्रेनिंग में अग्रणी ने आज इंडिया हैबिटेट सेंटर में अपना 18वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया, जहां 400 से अधिक छात्रों को उनके प्रमाणपत्र से सम्मानित किया गया।
डॉ. महेंद्र नाथ पांडे, माननीय कैबिनेट मंत्र, कौशल विकास और उद्यमिता, मुख्य अतिथि के तौर पर दीक्षांत समारोह में उपस्थित थे। समारोह में संसद सदस्य दिल्ली (उत्तर-पूर्व) और भारतीय जनता पार्टी के दिल्ल अध्यक्ष, श्री मनोज तिवारी भी उपिस्थत थे।
दीक्षांत समारोह में वीएलसीसी के संस्थापक और मेंटर सुश्री वंदना लूथरा और इंडिया टीवी के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा के साथ एनएसडीसी, सीआईआई, जेएसडीएम और ओएसडीए के वरिष्ठ अधिकारी भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। दीक्षांत समारोह में वीएलसीसी के संस्थापक और मेंटर सुश्री वंदना लूथरा और इंडिया टीवी के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा के साथ एनएसडीसी, सीआईआई, जेएसडीएम और ओएसडीए के वरिष्ठ अधिकारी भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। वीएलसीसी इंस्टीट्यूट ने अत्यधिक सफल पूर्व छात्रों को भी आमंत्रित किया और सम्मानित किया जो इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रहे हैं।


वीएलसीसी की संस्थापक और मेंटर, सुश्री वंदना लूथरा ने दीक्षांत समारोह में कहा कि “मैं सभी छात्रों को उनके उत्कृष्ट परिणाम के लिए बधाई देना चाहती हूं। कौशल विकास और शिक्षा के माध्यम से भारत की प्रतिस्पर्धा और नवाचार को मजबूत करना हमारे भविष्य की कुंजी है। 2001 में अपनी स्थापना के बाद से, वीएलसीसी संस्थान भारत में व्यावसायिक शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध ने अब तक 2,00,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित किया है। सरकार ने 'स्किल इंडिया' मिशन के तहत प्रशंसनीय पहल की शुरुआत की है, जिसने इंडस्ट्री को अधिक संगठित होने और प्रशिक्षित लोगों का एक पूल बनाने में मदद की है। यह इस मिशन के तहत है कि वीएलसीसी ने अब तक 30,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित किया है। आज, उद्योग के परिदृश्य और सरकार की ओर से सक्रिय समर्थन के साथ, हम प्रतिवर्ष 40,000 छात्रों को छात्र संख्या बढ़ाने और उद्योग में प्रशिक्षित मानव शक्ति की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को बंद करने का लक्ष्य रखते हैं।”


दीक्षांत समारोह में बोलते हुए डॉ.महेंद्र नाथ पांडे, माननीय केन्द्रीय कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री ने कहा कि “आज यहां इकट्ठा हुए प्रतिभाशाली लोगों को संबोधित करना मेरे लिए भी प्रेरणा है। आज कौशल विकास का दुनिया भर में शिक्षा के रूप में बहुत महत्व है और हम कौशल और शिक्षा में पैमाने और गति सुनिश्चित कर रहे हैं। ब्यूटी एंड वेलनेस इंडस्ट्री 14 प्रतिशत की विकास दर और समय के साथ फलफूल रहा है। इस क्षेत्र में उद्यमी बनने के अवसर के साथ-साथ सुविधाजनक रोजगार प्रदान करने की क्षमता है। इन आकांक्षी युवाओं को सहायता देने के लिए हमारे पास मुद्रा योजना जैसी सरकारी योजनाएं भी हैं। हमारी जिम्मेदारी है कि हम वीएलसीस जैसे कॉर्पोरेट छात्रों को हर संभव सभी प्रकार की वित्तीय सहायता दें जो हम कर सकते हैं, विशेषकर महिलाओं को। ब्यूटी एंड वेलनेस इंडस्ट्री को देश के सबसे सक्षम क्षेत्रों में से एक बनाने के लिए आवश्यक पूरा समर्थन मिलेगा।”
सुश्री वंदना लूथरा ने बताया कि वीएलसीसी इंस्टीट्यूट ऑफ ब्यूटी एंड न्यूट्रिशन में लगभग 150 प्लेसमेंट पार्टनर हैं, जिनमें लोरियल, श्वार्जकोफ, मैक और नेस्ले, अन्य शामिल हैं। वीएलसीसी संस्थान के लगभग 30 प्रतिशत छात्र अपना काम शुरू कर चुके हैं और सफल उद्यमी बन गए हैं।


Saturday, 6 July 2019

पेट और छाती की गुहाओं में फैलने वाले कैंसर को अब पिपैक (पीआईपीएसी) से रोका जा सकता है

- डॉ. समीर कौल, अध्यक्ष, बीसीपीबीएफ - द कैंसर फाउंडेशन


पिपैक (पीआईपीएसी) क्या है?


प्रेशराइज्ड इंट्रा पेरिटोनियल एयरोसोल कीमोथेरेपी (पीआईपीएसी) कैंसर के उपचार में एक अभूतपूर्व कामयाबी है। इसके तहत कैंसर को नष्ट करने के लिए कीमाथेरेपी को स्प्रे के रूप में दबाव के साथ पेट की गुहा और छाती गुहा जैसे शरीर में सीमित स्थानों तक पहुंचाया जाता है, जो वहां साधारण लैप्रोस्कोप के माध्यम से फैल गए हैं। यह थेरेपी अंडाशय, बृहदान्त्र, पेट, अपेंडिक्स के कैंसर के इलाज के लिए सबसे उपयुक्त है जो एडवांस स्टेज में है और जिसमें पेरिटोनियल गुहा भी शामिल है, और जिसका इलाज करने में अन्य पारंपरिक चिकित्सा विफल रहती हैं। यह वैसे कैंसर के इलाज में अत्यधिक प्रभावी है जो पेट की गुहा और छाती गुहा की लाइनिंग से उत्पन्न होता है, जिसे मेसोथेलिओमास कहा जाता हैकैंसर के वैसे मामलों में जिनमें उपचार की पहली विधि के तहत वर्तमान में तीव्र कीमोथेरेपी दी जाती है, ऐसी विधि से असंतोषजनक परिणाम प्राप्त होता है। इसके अलावा, कई बार कीमोथेरेपी देने पर रोगी कमजोर हो जाते हैं तथा प्रभावित जगह पर तरल जमा हो जाता हैं। इस स्थिति को एस्साइटिस (जलोदर) कहा जाता हैं। ऐसे मामलों में पीआईपीएसी रोगियों के लिए अत्यधिक फायदेमंद है क्योंकि यह चिकित्सा रोग को घटाती हैऔर रोग के लक्षणों को कम करके मरीज के जीवन की गुणवत्ता बढ़ाती है। चूंकि पीआईपीएसी प्रक्रिया के दौरान संभावित एनजीएस अध्ययनों के लिए बायोप्सी लेने के अलावा कोई सर्जरी नहीं की जाती हैं। इसलिए यह एक ऐसी चिकित्सकीय प्रक्रिया है जिसमें नहीं के बराबर इनवैसिव प्रक्रिया की जाती है और यही इस ऑपरेशन की खासियत हैपीआईपीएसी कैंसर के उन्नत मामलों में इलाज के लिए लोकप्रियता हासिल कर रही हैआज कैंसर के इलाज के लिए सीआरएस, एचआईपीईसी और तीसरी पंक्ति की कीमोथेरपी सहित अन्य उपचार मॉड्यूल्स का उपयोग किया जा रहा है लेकिन इनसे असंतोषजनक परिणाम सामने आते हैं। सर्जिकल उपचार - सीआरएस और एचआईपीईसी व्यापक सुपरमेजर सर्जरी हैं, जो 10 घंटे से अधिक समय तक चलती हैं और जिनके तहत विभिन्न अंगों में चीर-फाड़ की जाती है और 8 से 10 यूनिट रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है तथा मरीज को 3 सप्ताह से अधिक समय तक अस्पताल में रहना पड़ता हैइस तरह की जोखिम भरी प्रक्रिया करने के बाद भी, जटिलता दर अभी भी काफी अधिक है और इसमें लगभग 9 लाख रूपए का खर्च आता है। इसी तरह, तीसरी पंक्ति की कीमोथेरपी भी बहुत प्रभावी नहीं हैं और मरीजों को कई दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ता है। क्लासिकल इंद्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी भी पीआईपीएसी की तरह प्रभावी नहीं है क्योंकि पीआईपीएसी की तुलना में इसमें गुहाओं के अंदर दवाइयां सही तरीके से नहीं पहुंचती और बीमारी से प्रभावित भाग में दवाइयां भीतर तक प्रविष्ट नहीं कर पाती है।


विकिरण चिकित्सा - बहुत कम इनवैसिव होने के बावजूद, नवीनतम साइबरनाइफ और गामा नाइफ रेडियोसर्जरी उदर या छाती के बाहरी हिस्से के कैंसर की व्यापक रूप से उन्नत रोग स्थितियों में फायदेमंद नहीं है, जबकि शरीर के अन्य भागों में बीमारी के कम बढ़ने के मामलों में ही फायदेमंद हैंमाइक्रोवेव एब्लेशन का उपयोग यकृत या कभी-कभी अन्य अंगों में छोटे ट्यूमर के इलाज के लिए किया जाता है लेकिन उन्नत कैंसर में यह बेकार है। पीआईपीएसी वर्तमान में पेरिटोनियम और एल्यूरा तक फैल चुके कैंसर के मामलों में इलाज की जरूरत की पूर्ति करती है। ऐसे कैंसर के मामले में इस समय कुछ बेहतर इलाज उपलब्ध नहीं है। अध्ययनों से पता चलता हैकि यह पेट के व्यापक तौर पर फैले कैंसर को कम करने और बाद में सीआरएस और एचआईपीईसी जैसी उपचारात्मक प्रक्रियाओं को उपयुक्त बनाने के लिए यह सहायक चिकित्सा के रूप में कार्य कर सकती है। यह बहुत सारे वैसे रोगियों को उपचार प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण विधि है जिनके लिए कोई विकल्प नहीं होते हैं। उपरोक्त उपचार मॉड्यूल की तुलना में, पीआईपीएसी ऑन्कोलॉजिस्ट के लिए सर्वश्रेष्ठ गेम चेंजर के रूप में उभर रही है।


इसके निम्नलिखित फायदे हैं -


1. कोई जटिलता नहीं / सुरक्षित प्रक्रिया - पीआईपीएसी में वस्तुतः कोई जटिलता नहीं होती है, और उपचार का उद्देश्य उपचारात्मक के बजाय दर्द से राहत दिलाना है।


2. कम खर्चीला - अन्य उपचारों की तुलना में, पीआईपीएसी पर 3 लाख से कम खर्च बैठता है। 3. कम से कम समय तक हास्पीटल में रहने की जरूरत - तीसरी पंक्ति की कीमोथेरपी के मामले में मरीज को कम से कम 2 से 3 सप्ताह अस्पताल में रहने की जरूरत होती है जबकि पीआईपीएसी की स्थिति में मरीज को केवल एक दिन अस्पताल में रहने की जरूरत होती है। 4. जल्दी स्वास्थ्य लाभ - कम से कम चीरा लगाए जाने तथा और ट्यूमर के कम होने के कारण, ट्यूमर को ऑपरेट करने लायक बना दिए जाने के कारण मरीज तेजी से स्वास्थ्य लाभ करता है और वह जल्दी बेहतर स्थिति में आ जाता है। भारत में पीआईपीएसी की संभावनाएं यह तकनीक हाल ही में प्रोफेसर मार्क रूबेन्स द्वारा ट्यूबिनर्जन जर्मनी में विकसित की गई और अभी भी विकसित हो रही हैं। इसके पक्ष में ठोस सबूतों को जुटाने के लिए कई नैदानिक परीक्षण चल रहे हैंदुनिया के कुछ देशों जैसे फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका के कुछ चिकित्सा केन्द्रों को इस नई तकनीक का अनुभव है और भारत में हमारा केंद्र उनमें से एक है। जैसे-जैसे अधिक से अधिक केंद्र इस विशेषज्ञता को हासिल करेंगे यह अधिक से अधिक लोकप्रिय होता जाएगा।


प्राथमिक कैंसर के प्रकार के आधार पर, पीआईपीएसी थेरेपी के परिणाम भिन्न – भिन्न हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, उन्नत (स्टेज चार) ओवरी के कैंसर के मामलों में, वर्तमान में इस्तेमाल किए जा रहे अन्य तरीकों की तुलना में इस विधि से इलाज करने पर प्रतिक्रिया की दर बहुत अधिक (70 प्रतिशत से अधिक होती है तथा मरीज के जीवित रहने की दर (14 माह) भी बेहतर होती है। अपेंडिक्स एवं कोलोन कैंसर के मामले में भी इसी तरह के उल्लेखनीय परिणाम आते हैं, लेकिन गैस्ट्रिक कैंसर के मामलों में प्रतिकूल जीव विज्ञान के कारण परिणाम इतने अच्छे नहीं आते हैं। पीआईपीएसी जीवन की गुणवत्ता के मामले में महत्वपूर्ण रूप से सुधार लाता परिणाम इतने अच्छे नहीं आते हैं। पीआईपीएसी जीवन की गुणवत्ता के मामले में महत्वपूर्ण रूप से सुधार लाता हैं।


नैदानिक परिणाम और रोगी की संतुष्टि


ओवरी, कोलोन और एपेंडिकुलर कैंसर के उन्नत चरणों से पीड़ित कई रोगियों में आश्चर्यजनक परिणाम प्राप्त हुए हैं। चूंकि इसके बिल्कुल ही दुष्प्रभाव नहीं होते हैं वैसे में मरीज अस्पताल से घर जाने पर आम तौर पर संतुष्ट और खुश रहते हैं। वे 6 सप्ताह या उसके बाद इस प्रक्रिया के लिए दोबारा अस्पताल आते हैं। पीआईपीएसी के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचा इसके लिए लैमिनर एयरफ्लो से युक्त एक ऑपरेटिंग रूम की आवश्यकता होती है या ऑपरेटिंग रूम में हेपा फिल्टर फिट किया जाता है ताकि कीमोथेरेपी के छोटे एयरोसोल कण अवशोषित हो जाएं। लैप्रोस्कोपिक कार्ट और स्कोप, एक डबल चेंबर हाई प्रेशर इंजेक्टर, वाष्प निकालने के लिए एक बफेलो फिल्टर और विकसित एरोसोलिसर जिसे कैपनोपेन कहा जाता है, की जरूरत होती हैं। इसके अलावा इस प्रक्रिया को अंजाम देने वाले सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट को प्रशिक्षित किया जाना चाहिएयह प्रक्रिया सामान्य एनेस्थिसिया के तहत की जाती है।


अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर एक नई योग बुकलेट लॉन्च

ब्यूटी एंड वेलनेस सेक्टर स्किल कांउसिल की पहली योग पुस्तक 'से यस टू योग, से नो टू रोग'


अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय कौशल विकास निगम की सहभागिता में स्थापित, ब्यूटी एंड वेलनेस सेक्टर स्किल कांउसिल ने अपनी पहली योग पुस्तक 'से यस टू योग, से नो टू रोग' का लोकार्पण किया।
'से यस टू योग, से नो टू रोग' किताब, में मुख्य रूप से पांच अध्याय हैं जिनमें योग के इतिहास और उत्पत्ति, योग क्यों, योग के लाभ, हर दिन जीवन में योग की प्रासंगिकता और योग को बढ़ावा देने में बीएंडडब्ल्यूएसएससी के विभिन्न प्रयासों का विवरण शामिल हैं।
सुश्री गीतांजलि अग्रवाल, सीईओ, बीएंडडब्ल्यूएसएससी, ने पुस्तक के शुभारंभ पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि “हम अपने माननीय प्रधानमंत्री के नक्शे कदम पर चल रहे हैं ताकि फिटनेस मंत्र अर्थात योग का प्रचार किया जा सके। इसलिए, अपने उद्योग और प्रशिक्षण भागीदारों के माध्यम से, हम विभिन्न संस्थानों को के तहत लोगों को सक्रिय रूप से प्रशिक्षित करने और प्रमाणपत्र प्रदान करने के लिए सक्रियता से काम कर रहे हैं।“
हैंडबुक को लॉन्च करने के मौके पर डॉ. ब्लॉसम कोचर, गीता रमेश, कैराली, अर्पिता दास, बीनेस बॉय अर्पिता, डॉ. आर.एन. नायर, बापू नेचर क्योर हॉस्पिटल एंड योगाश्रम जैसे ब्यूटी एंड वेलनेस क्षेत्र के प्रतिष्ठित एवं गणमान्य लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई।


 


द विजडम स्कूल ने छात्रों ने राष्ट्रीय संग्रहालय में प्राचीन और मध्यकालीन कला को देखा

Excursion at National Museum, New Delhi


नोएडा एक्सटेंशन के द विजडम ट्री स्कूल के छात्रों को प्राचीन और मध्यकालीन कला को निकट से देखने-समझने का मौका मिला। इन छात्रों ने 6 जुलाई 2019 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय का भ्रमण किया। ग्रेड 3 - 8 के छात्रों और उनके शिक्षकों ने इस अवसर का भरपूर लाभ उठाया। संग्रहालय में मौजूद पर प्रदर्शित प्राचीन और मध्ययुगीन काल से वास्तविक कलाकृतियों और कलाकृति को देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध था। छात्रों ने विभिन्न दीर्घाओं का दौरा किया और उन खंडों में चित्रित चित्रों से मोहित हो गए।


Students of The Wisdom Tree School in National Museum


विजडम ट्री स्कूल के अध्यक्ष श्री के के श्रीवास्तव और प्रिंसिपल श्रीमती सुनीता ए शाही ने विद्यार्थियों को सीखने के अनुभव के लिए प्रेरित किया। प्रिंसिपल श्रीमती सुनीता ए शाही ने उल्लेख किया कि उनका मानना है कि इस तरह के भ्रमण क्षितिज के विस्तार के लिए एक सही तरीका है। श्री के के श्रीवास्तव ने कहा कि स्कूल के छात्रों को भारतीय कला और संस्कृति से परिचित कराने तथा अनुभव के माध्यम से सीखने को बढ़ावा देने के लिए छात्रों के लिए नियमित आधार पर इस तरह के भ्रमण का आयोजन नियमित तौर पर किया जाता है।


राष्ट्रीय संग्रहालय का भ्रमण छात्रों के लिए जानकारी और ज्ञान का एक बड़ा स्रोत साबित हुआ।


Friday, 5 July 2019

लिवर की सेहत को मापने का गैर इनवैसिव एवं दर्दरहित तरीका

भारत में लिवर से संबंधित बीमारियां सर्वाधिक आम हैं और हमारे देश में काफी हद तक इन बीमारियों की अनदेखी की जाती है। ज्यादातर मामले में मरीज तभी चिकित्सक के पास जाते हैं जब बीमारी गंभीर हो जाती है और बीमारी को पूर्व अवस्था में लाना संभव नहीं हो पाता है। यह देखा गया है कि लिवर सिरोसिस से ग्रस्त जो मरीज डाक्टर के पास आते हैं उनमें से 50 प्रतिशत मरीजों की मौत बीमारी का पता लगने के एक से डेढ़ साल के भीतर हो जाती है। ऐसे में यह सबसे जरूरी है कि बीमारी की समय पर जांच हो तथा बीमारी को बढ़ने से रोकने तथा मरीज की जान बचाने के लिए समय से इलाज शुरू हो। 
क्यूआरजी हास्पीटल के गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी के निदेषक डा. संजय कुमार बताते हैं, ''अभी हाल तक लिवर के सिरोसिस की जांच की सबसे अच्छी विधि लिवर बायोप्सी थी जो न केवल इनवैसिव है बल्कि इसके साथ जटिलताएं जुड़ी होती है। लिवर बायोप्सी के बाद एक प्रतिषत मामले में मौत होने का खतरा रहता है। लेकिन अब हमारे पास एक नई तकनीक आ गई है जिसे फाइब्रोस्कैन कहा जाता है जिसकी मदद से लिवर में कड़ापन (फाइब्रोसिस और सिरोसिस) का आकलन गैर इनवैसिव तरीके से किया जा सकता है और लिवर की बायोप्सी की जरूरत खत्म हो गई है। यह फैटी लिवर से ग्रस्त मरीजों के लिए भी उपयोगी है और इसकी मदद से फाइब्रोसिस से ग्रस्त उन लोगों की जांच की जा सकती है जिनकी बीमारी बढ़ रही है। यह किसी भी कारण से होने वाली लिवर सिरोसिस एवं फाइब्रोसिस के आकलन में भी काफी उपयोगी है।'' 
लिवर फाइब्रोसिस की मांत्रा का आकलन करने के अलावा फाइब्रो स्कैन लिवर में जमा फैट की मात्रा का भी आकलन करता है। यह विधि न केवल सस्ती है बल्कि गैर इनवैसिव है। इसकी मदद से शीघ्र जांच की जा सकती है बलिक लिवर बायोप्सी की तरह ही सटीक परिणाम प्रदान करता है। यह लिवर की बीमारी के बढ़ने या घटने पर भी निगरानी रखता है और इसकी मदद से मरीज के इलाज को मरीज की जरूरत के मुताबिक परिवर्तित किया जा सकता है। 
सम्पूर्ण जांच विधि में दस मिनट से भी कम समय लगता है। मरीज जांच के तुरंत बाद घर या काम पर जा सकता है क्योंकि उसे कोई दर्द नहीं होता, कोई चीरा नहीं लगता, कोई एनेस्थिसिया नहीं यि जाता है। क्यूआरजी हेल्थ सिटी इस पूरे महीने ''हेल्दी गट प्रोग्राम' आयोजित कर रहा है और यहां बहुत कम दर पर फाइब्रो स्कैन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। 


ब्रिटेन में भारतीय आर्थोपेडिक सर्जन की पुस्तक का हुआ लोकार्पण 


नई दिल्ली! ब्रिटेन के लीसेस्टर में आयोजित ब्रिटिश इंडियन आर्थोपेडिक सोसायटी (बीआईओएस) के वार्षिक सम्मेलन में भारतीय मूल के आर्थोपेडिक सर्जन की पुस्तक का लोर्कापण किया गया। 
विश्व प्रसिद्ध चिकित्सा वैज्ञानिक एवं आर्थोपेडिक सर्जन प्रोफेसर ए ए शेट्टी ने बीआईओएस के वार्षिक सम्मेलन के दौरान गत सप्ताहांत घुटने की ऑस्टियोआर्थराइटिस आधारित पुस्तक ''नी ओस्टियो आर्थराइटिस-क्लिनिकल अपडेट'' का लोकार्पण किया। इस पुस्तक का संपादन प्रसिद्ध ऑर्थोपेडिक सर्जन और चिकित्सा शोधकर्ता प्रो. (डॉ.) राजू वैश्य ने किया है जिसमें आपरेशन के बिना घुटने की ओस्टियो आर्थराइटिस के विभिन्न तरीकों का विस्तार से वर्णन किया गया है। इस पुस्तक में अनेक आर्थोपेडिक सर्जनों के आलेखों को संकलित किया गया है। 
इस मौके पर बीआईओएस के अध्यक्ष गौतम चक्रवर्ती, इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (आईओए) के अध्यक्ष प्रो. राजेश मल्होत्रा सहित कई प्रख्यात आर्थोपेडिक सर्जन मौजूद थे। इस मौके पर प्रो. (डॉ.) वैश्य ने ''3 डी प्रिंटिंग' और 'क्लिनिकल प्रैक्टिस में अनुसंधान' पर व्याख्यान भी दिया।
इस मौके पर प्रोफेसर ए ए शेट्टी ने इस पुस्तक के बारे में कहा, “मैं इस पुस्तक के संपादक और इस पुस्तक में शामिल किए गए शोधपरक लेखों के लेखकों को घुटने की ऑस्टियो आर्थराइटिस पर उपयोगी पुस्तक प्रकाशित करने पर बधाई देता हूं। इस पुस्तक में घुटने की ऑस्टियो आर्थराइटिस के विभिन्न पहलुओं के बारे में वैज्ञानिक जानकारी दी गई है और साथ ही साथ अनेक रोचक एवं महत्वपूर्ण मामलों का विश्लेषण भी किया गया है। पुस्तक को बेहतरीन तरीके से संकलित और संपादित किया गया है और यह पुस्तक गेरिएट्रिक चिकित्सकों, आर्थोपेडिक सर्जनों, फिजियोथेरेपिस्टों और नर्सों के साथ-साथ आर्थोपेडिक्स के छात्रों और शोधकर्ताओं को भी बहुत मदद मिलेगी।'' 
इस पुस्तक के संपादक प्रो. (डा.) वैश्य ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह पुस्तक चिकित्सा के छात्रों तथा चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को घुटने की ओस्टियो आर्थराइटिस के बारे में गहराई से जानने में मददगार साबित होगी। इस पुस्तक में घुटने की ओस्टियो आर्थराइटिस के सर्जरी रहित तरीकों, ओस्टियो आर्थराइटिस में फिजियोथिरेपी, फिजियोथिरेपी में उपयोग किए जाने वाली विभिन्न विधियों, मरीजों को चलने-फिरने में मदद करने वाले आर्थोटिक उपकरणों, नौट्रासेउटिकल्स, आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। इसके अलावा आपरेशन एवं बिना आपरेशन ओस्टियोपोरोसिस की उपचार विधियों, हाल में मिली वैज्ञानिक कामयाबियों, विभिन्न तरह के इम्प्लांटों, आर्थोस्कोपी, कम्प्यूटर आधारित नैविगेशन प्रणाली, टोटल नी आर्थोस्कोपी और रोबोट आधारित नैविगेशन आदि विषयों को भी पुस्तक में शामिल किया गया है। 
डा. राजू वैश्य भारत में आर्थोपेडिक बिरादरी में सर्वाधिक ख्याति प्राप्त चिकित्सक एवं चिकित्सा अनुसंधानकर्ता हैं। विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में उनके 300 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। कई अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं के वह संपादक रह चुके हैं। वर्ष 2015 में अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में 58 शोध पेपर प्रकाशित हुए जबकि वर्ष 2018 में 80 शोध पत्र प्रकाशित हुए जो कि एक रिकॉर्ड है। वह नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में वरिष्ठ आर्थोपेडिक एवं ज्वांइट रिप्लेसमेंट सर्जन हैं। साथ ही वह इंडियन कार्टिलेज सोसायटी और आर्थराइटिस केयर फाउंडेशन (एसीएफ) के अध्यक्ष हैं। वह प्रतिष्ठित शोध पत्रिका-जर्नल आफर क्लिनिकल ऑर्थोपेडिक्स एंड ट्रौमा के प्रमुख संपादक हैं। दुलर्भ किस्म की आर्थोपेडिक शल्य क्रियाओं को सफल अंजाम देने के लिए उनका नाम 2012, 2013, 2014 और 2016 में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज किया जा चुका है। अफगानिस्तान, नाइजीरिया, कांगो आदि जैसे दुनिया के सबसे कठिन और युद्धग्रस्त इलाकों में भी उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को चिकित्सा सेवाएं प्रदान की है। डा. बी सी रॉय ओरेशन अवार्ड एंवं गोल्ड मेडल, इनोवेशन अवार्ड इन मेडिसीन, प्राइड आफ एशिया अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड जैसे महत्वपूण पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं। वह इंडियन कार्टिलेज सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष एवं आर्थराइटिस केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं तथा नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में वरिष्ठ आर्थोपेडिक एवं ज्वांट रिप्लेसमेंट सर्जन हैं। 


महिलाओं में शर्मसार करने वाली बीमारी का बढ़ रहा है प्रकोप

महिलाओं में आजकल एक ऐसी बीमारी तेजी से बढ़ रही है जिसके कारण उन्हें अक्सर असहज एवं शर्मसार स्थितियों का सामना करना पड़ता है। ओवर एक्टिव ब्लैडर (ओएबी) नामक इस बीमारी के कारण हंसने, खांसने और छींकने से भी मूत्र त्याग हो जाता है। 
17 जून से 23 जून के दौरान मनाए गए वर्ल्ड कंटीनेंस सप्ताह के समापन के मौके पर आज मैक्स हेल्थकेयर के यूरोलॉजिस्ट डा. विमल दस्सी ने कहा कि  कुछ समय से उनके पास इस बीमारी के इलाज के लिए आने वाली महिलाओं की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। शर्मनाक स्थितियां पैदा कर देने वाली इस बीमारी की मरीजों में 40 साल के आसापास की उम्र की महिलाएं काफी अधिक हैं। वैसे तो यह समस्या महिलाओं और पुरूषों दोनों में पाई जाती है लेकिन यह समस्या महिलाओं में अधिक है क्योंकि गर्भावस्था एवं प्रसव के दौरान महिलाओं का मूत्राशय प्रभावित होता है और साथ ही साथ महिलाओं में छोटा मूत्रमार्ग होता हैं। इस समयस्या के साथ सामाजिक पहलू यह जुड़ा है कि महिलाओं के लिए हर जगह मूत्रालय या शौचालय नहीं है जबकि हमारे देश में पुरूष सार्वजनिक जगहों पर भी मूत्र त्याग की जगह ढूंढ लेते हैं। 
शर्मनाक एवं असहज स्थितियां पैदा करने वाली इस समस्या के बारे में दुनिया भर में जागरूकता पैदा करने के लिए 17 जून से 23 जून के बीच वर्ल्ड कंटीनेंस सप्ताह मनाया जा रहा है। 
डा. दस्सी ने बताया कि कभी यह बीमारी बुजुर्गों की बीमारी मानी जाती थी लेकिन अब यह कम उम्र में ही हो रही है। अनुमान है कि छह में से तकरीबन एक वयस्क इस बीमारी से प्रभावित हैं और उम्र बढ़ने के साथ इसका प्रकोप बढ़ता है। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले उनके पास एक स्कूल की शिक्षिका आई थी जो दिन में 10 से 14 बार मूत्र त्याग के लिए शौचालय जाती थी। कई मौकों पर क्लास के बीच में ही उन्हें मूत्र त्याग के लिए बाथरूम जाना पड़ जाता था। उस महिला की जांच से पता चला कि ओवर एक्टिर ब्लैडर सिंड्रोम से ग्रस्त हैं।'' 
यूरोलॉजिस्टों का कहना है, ''आप इस बात पर ध्यान रखें कि आप हर दिन कितनी बार और कितना अधिक मूत्र त्याग करते हैं। इसके अलावा यह भी देखें कि हर बार आपको मूत्राशय को खाली करने की इच्छा कितनी तीव्र होती है। अगर मूत्र त्याग की आवृत्ति और तात्कालिकता में वृद्धि हुई है, तो अपने तत्काल डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।
डा. दस्सी के अनुसार कुछ मामलों में मूत्र त्याग की इच्छा इतनी तीव्र होती है कि मरीज जब तक बाथरूम पहुंचता है उससे पहले ही पेशाब निकल जाता है। ज्यादातर लोग जो मूत्र असंयम /कंटीनेंस/ से पीड़ित होते हैं, वे इस समस्या को झेलते रहते हैं, क्योंकि वे मानते हैं कि वे इस समस्या का इलाज करने के लिए कुछ कर नहीं सकते।
विशेषज्ञों का कहना है कि ओवर एक्टिव सिंड्रोम (ओएबी) के बारे में जागरूकता कायम करना महत्वपूर्ण है, खास तौर पर इसलिए  क्योंकि यह मूत्राशय के स्वास्थ्य से जुड़ा जुड़ी भ्रांति है। मरीजों को चुपचाप इस समस्या को झेलते नहीं रहना चाहिए। इसका उपचार किया जा सकता है। वर्तमान में इसके उपचार के कई तरीके हैं जिनमें आवश्यकता होने पर जीवनशैली में बदलाव, आहार, दवा और सर्जरी शामिल हैं। व्यवहार में बदलाव जैसे केगेल व्यायाम की मदद से ओवर एक्टिव ब्लैडर और साथ ही साथ मूत्र के रिसाव को नियंत्रित किया जा सकता है। आपके डॉक्टर आपको घर पर ही आसानी से व्यायाम करना सीखने में मदद कर सकते हैं।  अगर आपको ओएबी से संबंधित कोई लक्षण है तो विशेषज्ञों की सलाह है कि आप कैफीनयुक्त पेय (कॉफी, चाय) आदि को सीमित करें, मसालेदार भोजन से बचें और शराब से परहेज करें क्योंकि इन सबसे आपकी स्थिति खराब होगी।