Sunday, 11 August 2019

फेसलिफ्ट की मदद से चेहरे को दीजिए निखार


ढलती उम्र के झुर्रीदार, कांतिहीन और सिकुड़न भरे चेहरे तथा कील-मुंहासें, चेचक, सफेद दाग, जलने या कटने-फटने के दागों से भरे चेहरे से हर किसी को विरक्ति होती है। जवानी के कांतियुक्त कसे हुए चेहरे को कोई खोना नहीं चाहता, लेकिन वक्त के साथ-साथ जब चेहरे की मांसपेशियां और त्वचा ढीली पड़ने लगती है तथा चेहरे की चमक और कांति कम होने लगती है तो खुद से ही वितृष्णा सी होने लगती है। जवानी का कांतिमय चेहरा बीते दिनों की बात हो जाती है और यह चेहरा सिर्फ फोटो एलबम या फ्रेम में कैद होकर हमें चिढ़ाती रहती है और हम इन्हें देखकर यही सोचते हैं कि काश हमारे पास जवानी के दिनों का लावण्ययुक्त चेहरा हमेशा कायम रहता। लेकिन कालचक्र की गति को कोई रोक नहीं सकता। हर व्यक्ति बुढ़ापे की ओर अग्रसर होता है क्योंकि बुढ़ापे पर किसी का वश नहीं होता, लेकिन वृद्धावस्था के चिन्हों को कॉस्मेटिक सर्जरी की बदौलत काफी हद तक छिपाया या मिटाया जा सकता है, जिससे व्यक्ति युवा प्रतीत हो और उसमें नया आत्मविश्वास पैदा हो। शारीरिक सुंदरता में चार चांद लगाने वाली और जवानी की आभा को बुढ़ापे में भी बरकरार रखने वाली कॉस्मेटिक सर्जरी की तकनीकों का व्यापक इस्तेमाल अब भारत में भी होने लगा है।


जवानी के दिनों में त्वचा शरीर की मांसपेशियों पर पूरी तरह कसी रहती है जिससे त्वचा में एक तरह की चमक, कसाव और चिकनापन रहता है। यह चमक और चिकनापन त्वचा के नीचे स्थित वसा की परत के कारण रहते हैं, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ-साथ जब वसा की परत पतली होने लगती है तब त्वचा के कसाव और चिकनापन कम होने लगती है, जिससे त्वचा ढीली पड़ने लगती है और उस पर झुर्रियां पड़ने लगती हैं। त्वचा पर महीन-महीन लकीरें नजर आने लगती हैं और त्वचा नीचे की ओर लटकने लगती है।


नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश पार्ट — 1 स्थित कास्मेटिक लेजर सर्जरी सेंटर आफ इंडिया के निदेशक एवं वरिष्ठ कास्मेटिक सर्जन डा. पी के तलवार बताते हैं कि त्वचा में आयी इन झुर्रियों को फेस लिफ्ट के द्वारा छिपाया या मिटाया जा सकता है। जब चेहरे पर झुर्रियों की बहुत बारीक लाइनें हों या मुंहासे के दाग हों तो उसे केमिकल फेस पीलिंग या लेजर से मिटाया जा सकता है। लेजर और फेस पीलिंग साथ-साथ या अलग-अलग किया जा सकता है। फेस पीलिंग जब मोटर से किया जाता है तो उसे डर्माब्रेजन, जब रसायन से किया जाता है तो उसे केमिकल पीलिंग और जब लेजर से किया जाता है तो उसे लेजर अब्रेजन कहा जाता है।
डा. पी के तलवार बताते हैं कि फेस लिफ्ट से झुर्रियों को हटाने के लिए व्यक्ति के कान के पास और कान के पीछे चीरा लगाया जाता है। उसके बाद ढीली त्वचा को उठाकर मांसपेशियों को टाइट कर दिया जाता है, त्वचा को खींचकर अतिरिक्त त्वचा को काट कर निकाल दिया जाता है और उसे सील दिया जाता है। ऑपरेशन के बाद मरीज को दो दिन अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है। एक सप्ताह के बाद मरीज घर सक बाहर निकल सकता है, लेकिन उसे अपना चेहरा धूप से बचाना होता है। साथ ही दो-तीन हफ्ते तक मरीज को गर्दन नहीं हिलाने या गर्दन को झटका नहीं देने की सलाह दी जाती है। फेस लिफ्ट का फायदा सामने आने में यानी युवा दिखने में तीन हफ्ते का समय लग सकता है।


कई बालीवुड अभिनेत्रियों की कास्मेटिक सर्जरी करने वाले डा. पी के तलवार के अनुसार कुछ साल पहले तक लोग 40-50 साल की उम्र में फेस लिफ्ट कराते थे, लेकिन अब अत्यधिक प्रतिस्पर्धा के इस युग में लोग युवा दिखने और व्यावसायिक रूप से फायदा उठाने के लिए कम उम्र में ही फेस लिफ्ट कराने लगे हैं। शादी की उम्र की लड़कियां, मॉडल, अभिनेत्रियां, सेल्स गर्ल्स और रिसेप्सनिस्ट आदि तो 30 साल से भी कम उम्र में फेस लिफ्ट कराने लगी हैं। कम उम्र में फेस लिफ्ट कराने पर इसका प्रभाव करीब 10-12 साल तक रहता है जबकि 40-50 साल की उम्र में फेस लिफ्ट कराने पर इसका प्रभाव करीब 7 से 10 साल तक रहता है। युवा व्यक्ति में दूसरी बार फेस लिफ्ट कराने की जरूरत आम तौर पर 7 से 10 साल के बाद पड़ती है। यह व्यक्ति की उम्र और त्वचा की स्थिति पर निर्भर करता है। व्यक्ति कितना तनाव में रहता है, त्वचा की कितनी देखभाल करता है, कितना व्यायाम करता है, इन चीजों पर फेस लिफ्ट का फायदा निर्भर करता है। यदि कोई व्यक्ति अपना वजन कम करना चाह रहा हो तो उसे फेस लिफ्ट कराने से पहले ही अपना वजन कम करा लेना चाहिए क्योंकि सर्जरी के बाद वजन कम करने से त्वचा फिर से ढीली पड़ सकती है।


डा. तलवार के अनुसार चेहरे के दाग-धब्बों को मिटाने के लिए फेस पीलिंग का इस्तेमाल किया जाता है। फेस पीलिंग से चेचक, मुंहासे, तिल, जख्म या जलने के निशान, सफेद दाग या अन्य दाग-धब्बों को मिटाया जा सकता है। इस तकनीक से चेहरे की त्वचा के उपरी परत को छिल कर या रसायन से हटा दिया जाता है। ज्यादा गहरे दाग के लिए यह प्रक्रिया दो-तीन बार दोहराई जाती है। जब यह प्रक्रिया छिल कर की जाती है तो उसे डर्माब्रेजन और जब इसे रसायन से हटाया जाता है तो इसे केमिकल पीलिंग कहा जाता है। अब इसके लिए लेजर का भी इस्तेमाल किया जाने लगा है। इसे लेजर पीलिंग कहा जाता है। फेस पीलिंग कराने के बाद व्यक्ति को तीन से छह महीने तक धूप से बचना होता है और घर से बाहर निकलने पर गाड़ी में सफर करना चाहिए और चेहरे पर सन क्रीम लगा लेना चाहिए ताकि सूर्य की अल्ट्रावासलेट किरणों का प्रभाव उसके चेहरे पर न पड़े।



डा. पी के तलवार देश के प्रमुख कास्मेटिक एवं प्लास्टिक सर्जन हैं। वह सन 1996 से कास्मेटिक लेजर सर्जरी सेंटर आफ इंडिया का संचालन कर रहे हैं। वह देश के कुछ चुनिंदा कास्मेटिक लेजर सर्जनों में शामिल हैं जिन्होंने भारत में कास्मेटिक लेजर की शुरूआत की। वह पूर्व में इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ कास्मेटिक सर्जन के तौर पर काम कर चुके हैं। वह बालीवुड अभिनेत्रियों, मॉडलों , खिलाडियों एवं विदेशी पर्यटकों की कॉस्मेटिक सर्जरी कर चुके हैं।


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