Thursday, 7 November 2019

बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है असंतृप्त वसा 

पुफा और मुफा जैसे स्वस्थ वसा कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करते हैं और हमारे दिल की रक्षा करते हैं
भारत में हृदय से संबंधित बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है जिसने अब बड़े पैमाने पर लोगों को मौत का ग्रास बनाने वाली संक्रामक बीमारियों की जगह ले ली है। मुंबई शहर के नगरपालिका प्राधिकारियों की ओर से हाल में किये गये एक खुलासे के अनुसार सिर्फ मुंबई में दिल के दौरे के कारण हर रोज 80 लोगों की मौत हो जाती है। देश भर में, कार्डियोवैस्कुलर बीमारियां हर साल ढाई करोड़ लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार है। ये बीमारियां दुनिया में किसी भी देश की तुलना में भारतीयों को बहुत जल्द प्रभावित कर रही हैं। भारत में दिल के मरीज की औसत आयु अमेरिका में 70 से 80 वर्ष की तुलना में बहुत कम 50 से 60 वर्ष है।
अस्वास्थ्यकर जीवनशैली, तनाव, शारीरिक व्यायाम की कमी, मोटापा और खराब आहार अधिक से अधिक लोगों में कार्डियोवैस्कुलर समस्याएं पैदा कर रही है। रक्तचाप के ऊंचा स्तर के अलावा, उच्च कोलेस्ट्रॉल हृदय रोग के लिए एक बड़ा जोखिम कारक है। रक्त में घूम रहे काॅलेस्ट्राॅल का उच्च स्तर धीरे- धीरे धमनियों की दीवारों में जमा होने लगता है, उन्हें संकरा कर देता है और हृदय में रक्त प्रवाह को कम कर दिल के दौरा पैदा करता है। निवारक स्वास्थ्य सेवा हृदय रोगों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। यदि लोगों को मोनो असंतृप्त वसीय अम्लों (मुफा: एमयूएफए), पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड (पुफा: पीयूएफए) और संतृप्त वसा, और हमारे स्वास्थ्य में इनकी भूमिका के बारे में पता होगा तो कोलेस्ट्रॉल को कम करना किसी के लिए मुश्किल नहीं है।
कम कार्बोहाइड्रेट या कम वसा वाले भोजन के जुनून वाले इन दिनों में, यह समझना महत्वपूर्ण है कि हमारा शरीर वसा के बिना जीवित नहीं रह सकता। वसा सिर्फ ईंधन का एक प्रमुख स्रोत नहीं है, बल्कि यह वसा में घुलनशील विटामिन जैसे कुछ पोषक तत्वों को अवशोषित करने में भी मदद करता है। वसा दो प्रकार के होते हैं - संतृप्त और असंतृप्त वसा। मक्खन या नारियल के तेल जैसे संतृप्त वसा में कमरे के तापमान पर ठोस हो जाने की प्रवृत्ति होती है। जैतून के तेल या कनोला तेल जैसे असंतृप्त वसा में कमरे के तापमान पर भी तरल रहने की ही प्रवृति होती है। असंतृप्त वसा भी दो प्रकार के होते हैं: मुफा (मोनो अनसैचुरेटेड फैटी एसिड) और पुफा (पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड)।
असंतृप्त वसा स्वस्थ है
अधिकांश भारतीय आजकल डेयरी उत्पादों, मांस और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से बहुत अधिक वसा और कोलेस्ट्रॉल का सेवन कर रहे हैं।
अच्छे स्वास्थ्य के लिए सही उपाय सही मात्रा में सही वसा खाना है। हालांकि हमें अपने आहार में संतृप्त और असंतृप्त दोनों प्रकार की वसा की जरूरत होती है, लेकिन हमें असंतृप्त वसा का ही अधिक सेवन करना चाहिए। हम रोजाना जितनी कैलोरी का सेवन करते हैं उनमें से करीब 20 से 30 प्रतिषत कैलारी ही हमें वसा से लेनी चाहिए। हालांकि, संतृप्त वसा इसमें से 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। 
संतृप्त वसा और ट्रांस वसा (हाइड्रोजनीकृत तेल और मक्खन में मौजूद) हमारे शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) के स्तर को बढ़ा सकते हैं। उन्हें असंतृप्त वसा से स्थानापन्न करना दिल के अच्छे स्वास्थ्य और समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। मक्खन को नकली मक्खन या फैट स्प्रेड्स जैसे अधिक संतृप्त वसा वाले उत्पादों को कम वसा वाले विकल्प के साथ स्थानापन्न करना, आहार में अधिक मुफा और पुफा वाले उत्पादों को शामिल करना और मांस से वसा को कम करना हानिकारक संतृप्त फैटी एसिड के हमारे सेवन को कम करने का एक शानदार तरीका है।
मुफा और पुफा जैसे असंतृप्त वसा को स्वस्थदायक वसा माना जाता है। मुफा विटामिन ई से भरपूर होते हैं जो शरीर की कोशिकाओं को विनष्ट होने से बचाती है। मूंगफली बटर, मूंगफली तेल, नट, जैतून का तेल, कनोला तेल, और सूरजमुखी तेल मुफा के अच्छे स्रोत हैं।
पुफा दो प्रकार के होते हैं - ओमेगा- 6 फैटी एसिड और ओमेगा- 3 फैटी एसिड। ये सोयाबीन, मक्का और सैफ्लावर, फलेक्स और सूरजमुखी जैसे बीज, अखरोट, सोया दूध, और ट्युना, सैलमाॅन और सार्डिन्स जैसी वसायुक्त मछलियों जैसे तेल में पाये जाते हैं। आजकल फैट स्प्रेड्स और खाना पकाने के कुछ तेल ओमेगा-3 से भरपूर होते हैं। इससे आपको असंतृप्त वसा की रोजमर्रे की जरूरत पूरी हो जाती है। 
ओमेगा 3: चमत्कारी पोषक तत्व
ओमेगा -3 फैटी एसिड को चमत्कारिक पोषक माना जाता है जिसमें हर तरह के लाभ निहित होते हैं। यह तीन वसा - एएलए, ईपीए और डीएचए के समूह को बनाते हैं। ये मेटाबोल्जिम के लिये जरूरी होते हैं तथा रक्त के थक्के को नियंत्रित करते हैं। ये हमारे शरीर में सूजन को कम करने में मदद करते हैं तथा हमें हृदय रोग, कैंसर, सूजन आंत्र रोग और गठिया से बचाने में मददगार होते हैं। ओमेगा -3 फैटी एसिड बुरे (एलडीएल) कोलेस्ट्रॉल और हमारे रक्त प्रवाह में घूमने वाली ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा कम करते हैं। इनसे मानसिक स्वास्थ्य में भी लाभ पहुंचता हैं। ओमेगा 3 अवसाद और मानसिक थकान में भी फायदेमंद हैं। 
शाकाहारी लोगों के लिये फ्लैक्ससीड अथवा फ्लैक्ससीड तेल सहित हरी पत्तेदार सब्जियों, सोयाबीन और राजमा जैसे सेम और अखरोट जैसे नट्स, चावल की भूसी, कैनोला और सोयाबीन के तेल फैटी वसा के प्रमुख स्रोत हैं। 
असंतृप्त वसा से भरपूर आहार कई बीमारियों को रोकने में मददगार साबित होते हैं और किसी भी व्यक्ति को प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रखते हैं। 


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