Saturday, 9 November 2019

हाथ का प्रत्यारोपण करने वाले भारत में एकमात्र सर्जन डॉ. सुब्रमण्यम अय्यर के साथ साक्षात्कार

अमृता आयुर्विज्ञान संस्थान, कोच्चि (केरल) में प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के प्रमुख डॉ. सुब्रमण्यम अय्यर और उनकी टीम ने वर्ष 2015 में भारत में पहली बार एक युवक के दोनों हाथों का सफल प्रत्यारोपण किया। इसके बाद से, उन्होंने दो और हाथों का प्रत्यारोपण किया है। इस प्रकार वह देश में ऐसी सर्जरी करने वाले एकमात्र सर्जन हैं। दोनों हाथ खो चुके व्यक्ति को किस प्रकार नया हाथ और नयी जिंदगी मिली, इस संबंध में उन्होंने बात की।
1. भारत में लोगों के हाथ खोने का मुख्य कारण क्या है?
भारत में लोगों के हाथ खोने के मुख्य कारण दुर्घटना, पटाखा के विस्फोट और बिजली के झटके हैं। मैंने ऐसे कई रोगियों को देखा है जिन्होंने गलती से हाईटेंश तारों को छू लिया और अपने हाथ को कोहनी तक खो दिया।
2. भारत में हाथ प्रत्यारोपण कराने की प्रक्रिया क्या है?
भारत में हाथ प्रत्यारोपण वर्तमान में केवल अमृता आयुर्विज्ञान संस्थान, कोच्चि, केरल में किये जाते हैं, जहां वर्ष 2015 में देश का पहला हाथ प्रत्यारोपण किया गया था। हाथ प्रत्यारोपण राज्य सरकार द्वारा संचालित केरल नेटवर्क आफ आर्गन शेयरिंग नामक संगठन की देखरेख में किया जाता है। हाथ प्रत्यारोपण कराने वाले सभी लोगों को पंजीकरण रजिस्ट्री में नाम दर्ज कराकर सूचीबद्ध कराने की जरूरत होती है। हाथों का प्रत्यारोपण सिर्फ तभी किया जा सकता है जब मरीज के लिए उपयुक्त मिलान वाले हाथ उपलब्ध हों।
3. हाथों के प्रत्यारोपण के लिए दाता मिलने में आपको किन प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है?
हाथ सिर्फ मृत मस्तिष्क (ब्रेन डेड) वाले व्यक्तियों से लिये जाते हैं जिनके परिवार वाले उस व्यक्ति के हाथ दान करने के लिए सहमत हो जाते हैं। हालांकि हाथ के दान देने की वजह से विकृति आने के कारण परिवार वाले अक्सर इसके लिए तैयार नहीं होते हैं। इस समस्या से निबटने के लिए, हम हाथ दान देने के बाद शरीर में कृत्रिम हाथ फिट कर देते हैं। अमृता अस्पताल में, हम 2015 में हमारे पहले हाथ प्रत्यारोपण के बाद हाथों को दान करने के लिए अनुरोध कर कई परिवारों को इसके लिए राजी किया है। लेकिन जागरूकता बढ़ने के साथ, हाथ को दान करने की अनिच्छा में कमी आ रही है। हमारे द्वारा किये गये दोनों हाथों के प्रत्यारोपण के लिए दान दिये गये हाथों से यह स्पष्ट होता है।
4. भारत में हाथ प्रत्यारोपण की शल्य चिकित्सा में कितना खर्च आता है?
अमृता आयुर्विज्ञान संस्थान में दोनों हाथों के प्रत्यारोपण का वर्तमान खर्च 15 लाख से 20 लाख रुपये है।
5. हाथ प्रत्यारोपण सर्जरी की सफलता की दर क्या है?
प्रत्यारोपित अंगों के जीवित रहने की तत्काल सफलता दर 100 प्रतिशत है। हालांकि, इनमें से कुछ प्रत्यारोपित हाथ प्रतिरक्षा प्रणाली से संबंधित समस्याओं के कारण अस्वीकृत कर दियेे जा सकते हैं, विशेषकर जब रोगी नियमित रूप से दवा का सेवन नहीं कर पाता है। इस तरह के कारणों की वजह से हाथ प्रत्यारोपण सर्जरी की असफलता दर करीब 2 से 3 प्रतिशत है।
6. क्या रोगी प्रत्यारोपण के बाद अपने हाथों का सामान्य ढंग से उपयोग करना शुरू कर सकते हैं? उनके हाथ कितना काम कर सकते हैं?
यह हाथ के विच्छेदन के स्तर पर निर्भर करता है। कलाई के पास हाथ कटने पर, हाथ जल्दी कार्य करने लगता है। इस प्रकार के हाथ प्रत्यारोपण में, हाथ 95 प्रतिशत तक कार्य करने लगते हैं। लेकिन जब हाथ प्रत्यारोपण कोहनी या उसके उपर से किया जाता है, तो हाथ उतने अच्छे तरीके से कार्य नहीं कर सकते हैं।
7. क्या एक हाथ खो चुके लोगों का भी हाथ प्रत्यारोपण हो सकता है?
हाथ प्रत्यारोपण कराने वाले सभी रोगियों को अपने प्रत्यारोपित हाथों की अस्वीकृति को रोकने के लिए दवा लेने की जरूरत होती है। इनके कुछ दुष्प्रभाव होते हैं। दोनों हाथों को खोने के कारण काम करने की क्षमता में जो कमी आती है वह सिर्फ एक हाथ खोने की तुलना में अधिक गंभीर होती है। जब खतरे और लाभ के अनुपात की बात हो, तो हाथ प्रत्यारोपण दोनों हाथ खो चुके रोगियों के लिए पूरी तरह से उचित है, लेकिन एक हाथ खो चुके रोगियों के मामले में उतना उचित नहीं है। हालांकि एक हाथ का प्रत्यारोपण करना अधिक आसान है। अमृता अस्पताल में हम वर्तमान में केवल दोनों हाथ प्रत्यारोपण ही कर रहे हैं। एक बार जब हम दोनों हाथ प्रत्यारोपित होने वाले रोगियों की प्रतिक्रिया पर पर्याप्त डेटा एकत्र कर लेंगे, तो हम रोगियों के लिए खतरे और लाभ के अनुपात पर सावधानी पूर्वक सोचकर एक हाथ के प्रत्यारोपण के बारे में सोच सकते हैं। 
8. हाथ प्रत्यारोपण शल्य चिकित्सा के लिए किस प्रकार के मरीज अयोग्य होते हैं?
वैसे लोग जिनके जन्म से ही हाथ नहीं होते है, वे हाथ प्रत्यारोपण के लिए योग्य नहीं होते हैं क्योंकि उनमें मस्तिष्क के अपर्याप्त विकास के कारण हाथों को हिलाने- डुलाने में परेशानी हो सकती है। हाथ के उपरी हिस्से से हाथ खो चुके लोग भी इसके योग्य नहीं होते हैं क्योंकि उनमें प्रत्यारोपित हाथ को जोड़ने के लिए पर्याप्त हड्डी और नर्व उपलब्ध नहीं हो सकते हैं। गंभीर रूप से विकृत हाथ भी उपयुक्त नहीं होते हैं, क्योंकि उनमें प्रत्यारोपित हाथों को जोड़ने के लिए संरचनाओं की कमी होती है।
9. हाथ प्रत्यारोपण की शल्य चिकित्सा कितनी जटिल है?
यह बड़ी सर्जरी होती है, जिसे करने के लिए 30 मेडिकल और 20 पैरामेडिकल विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है। अच्छी शल्य चिकित्सा टीम के अलावा एक बड़े सेटअप की भी आवश्यकता होती है जिसमें इम्युनोलाॅजिस्ट, हैंड थेरेपिस्ट, सामाजिक कार्यकर्ता, मनोवैज्ञानिक और पैथोलॉजिस्ट शामिल होते हैं।
10 हाथ की प्रत्यारोपण शल्य चिकित्सा में जोखिम क्या हैं?
हाथ प्रत्यारोपण में सर्जरी में लगने वाला लंबा समय और प्रतिरक्षा तंत्र को दबाने वाली दवाओं से जुड़ी समस्याएं जैसी चुनौतियां होती हैं। सर्जरी के तुरत बाद के समय का जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाले संक्रमण को रोकने के लिए सावधानी पूर्वक प्रबंधन किया जाता है। लेकिन अमृता अस्पताल में या दुनिया में कहीं भी हाथ-प्रत्यारोपण वाले किसी भी रोगी में कोई भी अप्रिय घटना का पता नहीं चला है। जीवन में बाद में, रोगी के शरीर के द्वारा प्रत्यारोपित हाथ के अस्वीकार कर दिये जाने पर, इसे दवा देकर बचाया जा सकता है। हालांकि, ऐसे भी कुछ उदाहरण हैं, जहां यह सफल नहीं हुआ और प्रत्यारोपित हाथ को हटाना पड़ा। लेकिन इन स्थितियों में रोगी के जीवन को कोई खतरा नहीं होता है। इसके अन्य दीर्घकालिक समस्याओं में दवाओं के दुष्प्रभाव हैं, लेकिन ये भी जीवन के लिए घातक नहीं होते हैं।
11. क्या हाथ प्रत्यारोपण के बाद रोगी को आजीवन दवा लेनी पड़ती है?
प्रतिरक्षा तंत्र को दबाने वाली (इम्युनो सप्रेसेंट) दवाएं रोगियों को आजीवन लेनी पड़ती है और संक्रमण होने से बचने के लिए उन्हें बहुत ही नियंत्रित, स्वच्छ जीवन जीना पड़ता है। उन्हें हाथों के कार्यों को बहाल करने के लिए फिजियोथेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी भी कराना पड़ता है।
12. क्या बच्चों का भी हाथ प्रत्यारोपण हो सकता है?
वर्तमान में, बच्चों के लिए हाथ प्रत्यारोपण दुनिया में कहीं भी नहीं किये जा रहे हैं क्योंकि ऐसा करने पर प्रतिरक्षा तंत्र को दबाने वाली (इम्युनो सप्रेसेंट) दवाओं के दुष्प्रभाव कम उम्र में ही शुरू हो जाएंगे। इसलिए नैतिकता की दृष्टि से और चिकित्सकीय दृष्टि से भी बच्चों का हाथ प्रत्यारोपण करना न्यायोचित नहीं माना जाता है।


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