Sunday, 24 November 2019

 जीन में छिपा है लंबी जिंदगी का राज

लंबी जिंदगी का राज ढूंढने के लिए सदियों  से प्रयत्नरत  रहे वैज्ञानिकों ने अपने हाल के एक अध्ययन से पाया है कि किसी व्यक्ति की उम्र आनुवांशिक आधार पर तय होती है। अमरीका में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि कुछ परिवारों में आनुवांशिक रूप से लंबी जिंदगी जीने की प्रवृत्ति होती है। इस अध्ययन के निष्कर्ष के मुताबिक 100 वर्ष से अधिक की उम्र जीने वाले लोगों के भाई-बहनों के 100 वर्ष तक जीने की संभावना होती है। इस अध्ययन से यह भी पता चला कि लंबी उम्र जीने वाले माता-पिता के बच्चों को गंभीर रोगों से आनुवांशिक रूप से सुरक्षा मिलती है। 
मैसाचुसेट्स के बोस्टन स्थित न्यू इंगलैंड सेंटेनेरियन स्टडीज के निदेशक डा. थाॅमस पेरिस ने वैसे 444 परिवारों के आंकड़े एकत्रा किये जिनके कम से कम एक सदस्य ने 100 वर्ष या उससे अधिक उम्र की लंबी जिंदगी जी थी। इन आंकड़ों का अध्ययन करने पर पाया गया कि 100 वर्ष तक जीने वाले लोगों की बहनों की असामयिक मृत्यु का खतरा सामान्य से आधा था। हालांकि उनके भाईयों की भी मुत्यु दर इसी तरह कम थी, लेकिन भाईयों के मामले में यह कमी सिर्फ किशोरावस्था और युवावस्था में ही देखी गयी। 
इस अध्ययन के निष्कर्ष के अनुसार सामान्य लोगों की तुलना में 100 वर्ष तक जीने वाले लोगों के भाईयों के 100 वर्ष तक जीने की संभावना 17 गुना जबकि उनकी बहनों के 100 वर्ष तक जीने की संभावना आठ गुना अधिक होती है।
इस अध्ययन में सहयोग करने वाले अमरीका के नेशनल इंस्टीच्यूट आॅन एजिंग के जराचिकित्सा और जराविज्ञान के संयुक्त निदेशक डा. इवान हेडली का कहना है कि लंबी उम्र जीने वाले लोग और उनके रिश्तेदार बीमारियों के प्रति अधिक प्रतिरोधी होते हैं। उनकी लंबी उम्र के कारक जीन और वातावरण में निहित होते हैं। लेकिन इन कारकों की भूमिका के बारे में अभी स्पष्ट रूप से पता नहीं चला है। लेकिन लंबी उम्र जीने वाले लोगों का अध्ययन करने से लंबे और स्वस्थ जीवन में इन कारकों की भूमिका के बारे में पता चलेगा। 
नेशनल प्रोसीडिंग आॅफ द नेशनल अकेडमी आॅफ साइंस नामक शोध पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार डा. पेरिस ने पाया कि 100 वर्ष तक जीने वाले लोगों के सहोदर भाई-बहनों के सामान्य लोगों की तुलना में 90 वर्ष तक जीने की संभावना चार गुना अधिक होती है। 
उटा यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि लंबी उम्र जीने वालों के चचेरे-ममेरे भाई-बहनों या दूर के रिश्तेदारों की तुलना में भाई-बहन और पहले रक्त संबंधियों में लंबी उम्र जीने की प्रवृत्ति अधिक होती है। ऐसा माना जाता है कि इसके लिए कुछ जीन उत्तरदायी  हैं।
पिछले वर्ष डा. पेरिस और उनके सहयोगियों ने मानव जीन के 46 क्रोमोसोम में से एक क्रोमोसोम को लंबी उम्र के लिए उत्तरदायी पाया था। दूसरे अध्ययनों में पाया गया कि लंबी उम्र जीने वाले लोग अपने बच्चों में भी गंभीर बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करने की शक्ति प्रदान करते हैं। 
अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि 100 वर्ष से अधिक उम्र तक जीने वाले लोगों के 60 और 70 वर्ष के बच्चों में लाभदायक  एचडीएल (उच्च घनत्व वाले लाइपो- प्रोटीन्स) कोलेस्ट्रोल का स्तर अधिक तथा हानिकारक एलडीएल (निम्न घनत्व वाले लाइपो-प्रोटीन्स ) का स्तर कम था जिसके कारण वे हृदय और धमनियों की बीमारी के प्रति कम संवेदनशील थे।(


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