Saturday, 2 November 2019

"मोटापा विस्फोट” के मुहाने पर खड़ा भारत

नियंत्रित आहार तथा व्यायाम से ही हो सकता है मोटापे के 50 प्रतिशत रोगियों का इलाज : विशेषज्ञ


भारत के बारे में यह सामान्य धारणा है कि यह कुपोषित और कम वजन वाले लोगों का देश है लेकिन इसके विपरीत वास्तविकता यह है कि भारत "मोटापा विस्फोट" के मुहाने पर खड़ा है जहां की लगभग 15 प्रतिशत आबादी (करीब 20 करोड़ लोग) मोटापे से ग्रस्त हैं जो मधुमेह समेत अनेक गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त हो सकते हैं।


भारत आज मधुमेह की विश्व राजधानी बन गया है और विशेषज्ञों के अनुसार इसका मुख्य कारण यहां के लोगों में मोटापे का बढ़ता प्रकोप है। भारत में मधुमेह के आठ करोड़ मरीज हैंयही नहीं, मोटे लोगों की संख्या के मामले में भारत का स्थान अमरीका और चीन के बाद तीसरा है। भारत में हर तीन में से एक व्यक्ति या तो मोटा है या अधिक वजन का है।


देश में मोटापे, अधिक शारीरिक वजन और बढ़ते तोंद के कारण रक्तचाप, मधुमेह, हृदय – वाहिका रोगों और ओस्टियोआर्थराइटिस जैसी जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर नयी दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में आज स्वास्थ्य संगोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें दिल्ली तथा अन्य शहरों के चिकित्सा विशेषज्ञों ने मोटापे एवं मधुमेह के विभिन्न पहलुओं तथा इनके नियंत्रण के उपायों तथा उपचार की नयी चिकित्सा विधियों के बारे में चर्चा की गयी


संगोष्ठी का आयोजन इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल की ओर से साउथ देल्ही मेडिकल एसोसिएशन तथा एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया (एएसआई) के सहयोग से हुआइस संगोष्ठी का आयोजन करने वाले इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ बरिएट्रिक एवं मेटाबोलिक सर्जन तथा ओबेसिटी सर्जरी सोसायटी ऑफ इंडिया (ओएसएसआई) के उपाध्यक्ष डॉ. अरूण प्रसाद ने संगोष्ठी के दौरान दो लाइव रोबोटिक बरिएट्रिक सर्जरी को अंजाम दिया। ये दोनों सर्जरी जिन मरीज पर की गयी उनका वजन 100 किलोग्राम से अधिक था। इनके वजन को संतुलित आहार तथा व्यायाम की मदद से कम करना संभव नहीं हो पा रहा था और अधिक मोटापे के कारण ये दोनों मरीज अनेक स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त थे।


कार्यक्रम में बरिएट्रिक सर्जनों के अलावा आर्थोपेडिक सर्जनों, प्लास्टिक सर्जनो के साथ-साथ हृदय रोगों, श्वसन रोगों, स्त्री रोगों और लीवर रोगों के चिकित्सकों ने भी हिस्सा लिया। बैठक में मुंबई की डॉ. जयश्री तोड़कर ने भी हिस्सा लिया जो ओबेसिटी सर्जरी सोसाइटी ऑफ इंडिया की संयुक्त सचिव भी हैं।


बैठक में मौजूद विशेषज्ञों ने मोटापे के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में बताया कि मोटापे के कारण हृदय रोगों तथा उच्च रक्त चाप के खतरे बढ़ जाते हैं और दिल के दौरे के कारण मरीज की मौत की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा मोटापे के कारण लीवर की बीमारियां, किडनी के खराब होने, कैंसर, स्लीप एप्निया के खतरे बढ़ जाते हैं। महिलाओं में मोटापे के कारण गर्भधारण नहीं होने, बच्चे पैदा नहीं होने और पोलीसिस्टिक ओवरी की आशंका अधिक होती है।


डॉ. अरूण प्रसाद कहते हैं कि कई लोग वजन घटाने के लिये सीधे बरिएट्रिक सर्जरी का सहारा लेना चाहते हैं, लेकिन सबसे पहले नियंत्रित आहार एवं व्यायाम का सहारा लेना चाहिये और अक्सर देखा जाता है कि करीब 50 प्रतिशत मोटे लोगों में इन उपायों के जरिये ही मोटापे का समाधान हो जाता है। वजन घटाने के लिये बरिएट्रिक सर्जरी, लिपोसक्शन अथवा बॉडी कॉन्ट्ररिंग का सहारा तब लिया जाना चाहिये जब आहार नियंत्रण, व्यायाम एवं जीवन शैली में बदलाव आदि के उपाय विफल साबित हो जायें। उन्होंने बताया कि वजन घटाने की सर्जरी बेहोश करके की जाती है और इस सर्जरी के लिये अब रोबोट की मदद ली जाने लगी है जिससे सर्जरी सटीक होती है। यह सर्जरी उन्हीं लोगों पर की जाती है जो 100 किलो से अधिक वजन के होते हैंसर्जरी के बाद छह महीने में ही करीब 20 किलो वजन कम हो जाता है। इस सर्जरी पर करीब ढाई से तीन लाख के बीच खर्च होता है।


डॉ. अरूण प्रसाद ने बताया कि पिछले साल भारत में ऐसी करीब 12 हजार सर्जरी हुयी जबकि हमारे देश में हर साल करीब 50 हजार लोगों को इस सर्जरी की जरूरत हैदेश में करीब 15 प्रतिशत लोग अर्थात करीब 20 करोड़ लोग मोटापे के शिकार हैं और इन्हें मोटापे से निजात दिलाने के लिये आखिरी विकल्प के तौर पर सर्जरी का सहारा लेना चाहिये।


 


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