Thursday, 24 October 2019

भारत में नैनोफार्मास्युटिकल के मूल्यांकन के लिए दिशा.निर्देश जारी

नई दिल्ली, 24 अक्तूबर। केन्द्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकीए पृथ्वी विज्ञान तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने नई दिल्ली में एक समारोह में आज भारत में नैनोफार्मास्युटिकल के मूल्यांकन के लिए दिशा.निर्देश जारी किए। 
डॉ. हर्ष वर्धन ने बताया कि ये दिशा—निर्देश नवीन नैनोफार्माक्युलेशन की गुणवत्ताए सुरक्षा और कुशलता के मूल्यांकन को निरुपित करने के अत्यंत महत्वपूर्ण कदमों में से एक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन दिशा.निर्देशों का उद्देश्य भारत में नोफार्मास्युटिकल के लिए पारदर्शीए सतत और संभावित नियामक मार्ग दिखाना है। 
नैनोकैरियन आधारित दवा पहुंचाना एक उभरता हुआ क्षेत्र है और यह बाजार में नैनोफार्मास्युटिकल के बाजार में प्रचलन से संबंधित है। नैनोफार्मुलेशन अधिक दक्षताए कम नशीला है और ये पारंपरिक दवाओं से अधिक सुरक्षित है। इससे भारतीय अनुसंधानकर्ताओं को नियामक दिशा.निर्देशों के अनुरूप अनुसंधान करने में सहायता मिलेगी और आशा है कि यह उद्योग अनुसंधान की श्रृंखला शुरू करने से लेकर उत्पाद विकास और वाणिज्यीकरण तक की यात्रा में इसमें शामिल रहेगा। इसके अलावाए नियामक प्रणाली को इन दिशा.निर्देशों से मजबूती मिलने के कारण निजी निवेश भी आकर्षित किया जाएगा। 
इन दिशा.निर्देशों से नियामक आवश्यकताओं के साथ अनुवाद अनुसंधान की श्रृंखला शुरू करने में भी सहायता मिलेगी। इनसे नैनो टेक्नोलॉजी पर आधारित नए उत्पादों की स्वीकृति देने के समय नियामक को निर्णय लेने में आसानी होगी और इसी तरह अनुसंधाकर्ता भी अपने उत्पाद को बाजार में शुरू करने के लिए स्वीकृति ले सकेंगे। इनसे उत्पादों का उपयोग करने वालों को भी फायदा होगा क्योंकि उन्हें दिशा.निर्देशों के अनुरूप बाजार में गुणवत्ता आश्वस्त उत्पाद मिल सकेंगे। इन दिशा.निर्देशों से कृषि उत्पादोंए सौंदर्य प्रसाधनोंए नैनो टैक्नोलॉजी के माध्यम से प्रत्यर्पित किए जाने वाले उपकरणों जैसे क्षेत्रों में भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। ये दिशा.निर्देश अतिउन्नत प्रौद्योगिकी के माध्यम से सभी के लिए वाजिब स्वास्थ्य देख.रेख के मिशन में योगदान देने हेतु भी मार्ग प्रशस्त करेंगे।
इन दिशा.निर्देशों को जैव प्रौद्योगिकी विभागए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और केन्द्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन ने मिलकर विकसित किया है और इसके लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग को अंतर.मंत्रालय प्रयासों के बीच सहयोग और समन्वय करना पड़ा है। 


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