Saturday, 26 October 2019

जननी सुरक्षा योजना क्या है और कैसे लें इसका लाभ

जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एचएचएम) के तहत सुरक्षित मातृत्व क्रियाकलाप है। इसे गर्भवती महिलाओं के बीच संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के द्वारा मात एवं नवजात शिश मत्य दर को कम करने के उद्देश्य के साथ लागू की जा रही हैजेएसवाई केन्द्रीय प्रायोजित योजना है जो प्रसव व प्रसवोत्तर __परिचर्या को नकद सहायता से एकीकृत करती है। यह योजना सरकार व गर्भवती महिलाओं के बीच प्रभावी संबंध के रूप में प्रत्यायित समाजिक कार्यकर्त्ता (आशा) के रूप में निर्धारित की गई है।


जेएसवाई की प्रमुख विशेषताएं


यह योजना गर्भवती महिलाओं पर केन्द्रित है, जिसमें कम संस्थागत प्रसव दर वाले राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम, राजस्थान. ओडिशा और जम्मू कश्मीर के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इन राज्यों को कम निष्पादन वाले राज्य (एलपीएस) के रूप में नामित किया गया है। शेष राज्यों को उच्च निष्पादन वाले राज्यों (एचपीएस) का नाम दिया गया है। 3.5.2 नकद सहायता के लिए पात्रता जननी सुरक्षा योजना के तहत नकद सहायता के लिए पात्रता नीचे दर्शाई गई है:



संस्थागत प्रसव के लिए नकद सहायता (रुपए में) सभी श्रेणी की माताओं के लिए नकद पात्रता इस प्रकार है:



*ग्रामीण क्षेत्र में 600 रुपए के आशा पैकेज में एएनसी घटक के लिए 300 रुपए तथा संस्थागत प्रसव हेतु गर्भवती महिलाओं को लाने के लिए 300 रुपए हैं। *शहरी क्षेत्र में 400 रुपए के आशा पैकेज में एएनसी घटक के लिए 200 रुपए तथा संस्थागत प्रसव हेतु गर्भवती महिलाओं को लाने के लिए 200 रुपए हैं।


सीजेरियन सेक्शन की छूट-प्राप्त लागत


जेएसवाई योजना में सरकारी संस्थानों में प्रसूति समस्याओं के प्रबंधन हेतु अथवा सीजेरियन सेक्शन करने हेतु निजी विशेषज्ञों की सेवाएं लेने का प्रावधान है जहां सरकारी विशेषज्ञ पदस्थ नहीं है।


घर पर प्रसव के लिए नकद सहायता


घर पर प्रसव को प्राथमिकता देने वाली गरीबी रेखा से नीचे की गर्भवती महिलाएं प्रति प्रसव के लिए 500 रुपए की नकद सहायता के लिए पात्र होती हैं भले ही उनकी आयु कुछ भी हो और उनके कितने भी बच्चे हों।


निजी स्वास्थ्य संस्थान को प्रत्यायित करना


प्रसव परिचर्या संस्थानों के विकल्प में बढोतरी के लिए राज्यों को प्रसव सेवाएं प्रदान करने के लिए कम से कम दो इच्छुक निजी संस्थान प्रति ब्लाक प्रत्यायित करने हेतु प्रोत्साहित किया जाता है।


जेएसवाई के तहत प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी)


जननी सरक्षा योजना के तहत भगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) भुगतान प्रक्रिया के माध्यम से किए जा रहे हैं। इस पहल के अंतर्गत आधार से जुड़े बैंक खातों/इलेक्ट्रोनिक निधि अंतरण के माध्यम से गर्भवती महिलाएं सीधे जेएसवाई लाभ प्राप्त करने के लिए हकदार होती हैं।


वास्तविक और वित्तीय प्रगति


इस योजना में कवर की गई माताओं की संख्या तथा स्कीम पर किए गए व्यय दोनों के संदर्भ में जेएसवाई की सराहनीय सफलता रही हैं। वर्ष 2005-06 में 7.39 लाख लाभार्थियों के औसत आंकड़ों से यह स्कीम फिलहाल प्रति वर्ष एक करोड़ से अधिक लाभार्थियों को लाभ प्रदान करती है। साथ ही स्कीम के व्यय वर्ष 2005-06 में 38 करोड़ से बढ़ाकर वर्ष 2016-17 में 1835 करोड़ रुपए कर दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में सूचित व्यय 1743.46 करोड़ रुपए (अनंतिम) है।


जेएसवाई की वर्ष-वार वास्तविक और वित्तीय प्रगति निम्नानुसार है:



* वि.व. 18-19 के आंकड़े अनंतिम है।


उपलब्धि के संदर्भ में जेएसवाई को प्रसव परिचर्या सेवाओं के लिए गर्भवती महिलाओं द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों के अधिकाधिक उपयोग में महत्वपूर्ण कारकों में से एक के रूप में माना जाता है जैसाकि नीचे दर्शाया गया है:



  • सांस्थानिक प्रसवों में बढ़ोतरी, जो 47% (जिला स्तरीय घरेलू सर्वेक्षण-III, 2007-08) से बढ़कर 78.9% (एनएफएचएस-4, 2015-16) हो गई है मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर), जो वर्ष 2004-06 में 254 मातृ मौतें प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों से गिरकर वर्ष 2014-16 के दौरान 130 मातृ मौतें प्रति 1,00,000 जीवित जन्म तक रह गई हैं

  • आईएमआर वर्ष 2005 में 58 प्रति 1000 जीवित जन्मों से कम होकर वर्ष 2017 में 34 प्रति 1000 जीवित जन्मों तक रह गई है

  • नवजात शिशु मृत्यु दर (एनएमआर) वर्ष 2006 में 37 प्रति 1000 जीवित जन्मों से कम होकर वर्ष 2016 में 24 प्रति 1000 जीवित जन्म रह गई है


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