Saturday, 30 November 2019

आपरेशन बिना हृदय वाल्व बदलवाने वाली मरीज ने बनाया कीर्तिमान 

ह्रदय वाल्व बदलवाने वाली लखनउ की रमा निगम पिछले 26 साल से बिना दिक्कत के सामान्य जीवन जी रही हैं। रह्यूमेटिक हृदय रोग के कारण बचपन में रह्यूमेटिक बुखार के कारण हृदय वाल्व में खराबी आ गई थी। उन्होंने इस खराबी को दूर कराने के लिये आज से करीब 26 साल पूर्व चेन्नई स्थित अपोलो अस्पताल में एंजियोग्राफी और पीटीएमसी की मदद से खराब वाल्व बदलवाया था। उसके बाद से वह बिल्कुल सामान्य जीवन व्यतीत कर रही थी। पिछले दिनों से उन्हें हृदय में कुछ परेशानी हो रही थी। लेकिन दवाइयों की मदद से ठीक हो गई और अब पूरी तरह से ठीक है। 
डा. पुरूषोत्तम लाल ने मरीज की बीमारी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि रह्यूमेटिक हृदय रोग स्ट्रेप्टोकोकाई-ए नामक जीवाणुओं के संक्रमण के कारण होता है। इन जीवाणुओं के हृदय पर असर के कारण एक या एक से ज्यादा हृदय वाॅल्व बंद या संकरे हो जाते हैं या रिसने लगते हैं। रह्यूमेटिक हृदय रोग के दुश्प्रभाव के कारण चार वाल्वों में से आम तौर पर माइट्रल अथवा एयोर्टिक वाल्व प्रभावित होते हैं। वाॅल्व के सिकुड़ जाने पर बैलून वाल्वयूलोप्लास्टी की मदद ली जाती है और वाल्व के बंद होने, रिसाव होने तथा वाॅल्व में बहुत ज्यादा सिकुड़न होने पर आॅपरेषन के जरिये ही वाल्व रिप्लेसमेंट किया जाता है। इसे माइट्रल अथवा एयोर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट कहा जाता है। सामान्य स्थिति में वाल्व बदलने पर मरीज तीसरे-चैथे दिन से ही चल-फिर सकता है। 
डाॅ. लाल ने बताया कि रमा निगम का इलाज करने के लिए परक्युटेनियस ट्रांस मिट्राल कमिषुरोटोमीज (पीटीएमसी) की प्रक्रिया अपनाई गई थी। इसे बैलून मिट्राल वाल्वोटोमी या बीएमवी भी कहा जाता है। यह प्रक्रिया हृदय के मिट्राल वाल में खराबी आ जाने (मिट्राल स्टेनोसिस) पर अपनाई जाती है। बचपन में बीटा हेमालाटिक स्ट्रेपटोकोकई नामक जीवाणुओं के संक्रमण होने के कारण यह वाल्व धीरे-धीरे मोटा होता जाता है जिसके कारण वाल्व के बीच से रक्त के प्रवाह में बाधा होने लगती है। इससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है, हृदय की धड़कन असामान्य हो जाती है और क्लाॅट बनने लगते हैं जिससे स्ट्रोक अथवा लकवा का खतरा होता है। 
इस समस्या के इलाज के लिए आम तौर पर हृदय की ओपन सर्जरी करनी पड़ती है और वाल्व को बदलना पड़ता है। खराब वाल्व के स्थान पर धातु या उतक का वाल्व लगा दिया जाता है। लेकिन उन्होंने बिना ओपन हार्ट सर्जरी के इस प्रक्रिया को अंजाम दिया। इसके लिए लोकल एनेस्थिसिया के तहत पैर की नस के जरिए एक पतली ट्यूब वाल्व तक ले जायी जाती है। इस प्रक्रिया के बाद मरीज दो दिन के भीतर घर चला जाता है।
इस प्रक्रिया का काफी बेहतरीन परिणाम आता है और मरीज औसतन पांच से दस साल या अधिक समय तक बिना किसी दिक्कत या लक्षण के सामान्य जीवन जीता है। रमा निगम पिछले 26 साल से अधिक समय से सामान्य जीवन जी रही हंै और आगे भी वह लंबी उम्र तक जीयेंगी। रमा निगम का उदाहरण इस बात का प्रतीक है कि यह पीटीएमसी अगर कुषल चिकित्सक के हाथों की जाये तो मरीज बिना किसी दिक्कत के लंबा जीवन जी सकता है। 


 


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