Saturday, 23 November 2019

अब शरीर के सभी जोड़ों को बदलना संभव

- डा. राजू वैश्य, वरिष्ठ अस्थि शल्य चिकित्सक, इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नयी दिल्ली
अस्थि शल्य चिकित्सा के क्षेत्रा में हुयी कामयाबियों की बदौलत आज न केवल घुटने और कूल्हे जैसे बड़े जोड़ों को बल्कि कंधों, कुहनियों, कलाइयों और टखनों जैसे छोटे जोड़ों, यहां तक कि ऊंगलियों के जोड़ों को बदलना भी संभव हो गया है। नयी दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ अस्थि शल्य चिकित्सक डा. राजू वैश्य बताते हैं कि आज ऐसे कृत्रिम जोडं़े विकसित होने लगे हैं जो न सिर्फ परम्परागत कृत्रिम जोड़ों की तुलना में 20 साल तक अधिक चलते हैं, बल्कि इन नये जोड़ों के लगने के बाद मरीज घुटने आदि को पूरी तरह मोड़ सकता है।
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ल के वर्षों में जोड़ बदलने की सर्जरी के क्षेत्रा में हासिल अनेक महत्वपूर्ण कामयाबियों की बदौलत आज न सिर्फ बीमारियों अथवा दुर्घटनाओं से बेकार हो चुके घुटने और कूल्हे जैसे बड़े जोड़ों को बदला जा सकता है, बल्कि कंधांे, कुहनियों, कलाइयों, टखनों और ऊंगलियों के छोटे जोड़ों को भी बदलना संभव हो गया है। यही नहीं, अब ऐसे कृत्रिम जोड़ों का विकास हुआ है जो प्राकृतिक जोड़ों से पूरी तरह मिलते-जुलते हैं और बिल्कुल उन्हीं की तरह काम करते हैं। नये जोड़ परम्परागत जोड़ों की तुलना में 20 से 25 साल अधिक चलते हैं। ऐसे में अब कम उम्र के लोगों में भी जोड़ों को बदलना संभव हो गया है। 
अब जोड़ों को बदलने के लिये बहुत अधिक चीर-फाड़ करने की जरूरत समाप्त हो गयी है। कम चीर-फाड़ करके की जाने वाली सर्जरी को (मिनिमली इंवैसिव सर्जरी-मिस) कहा जाता है। इसके अलावा अब कम्प्यूटर संचालित नैविगेशन सर्जरी और रोबोट संचालित सर्जरी भी लोकप्रिय हो रही हैं। सर्जरी की इन नयी तकनीकों की मदद से मरीज को कम से कम कष्ट दिये बगैर ही कृत्रिम जोड़ों को सही-सही बिठाया जा सकता है। 
हाल में हुये शोधों से यह पाया गया है कि अमरीकी और यूरोपियाई लोगों की तुलना में एशियाई लोगों में हड्डियां न केवल छोटी होती हंै बल्कि अधिक भंगुर होती हैं। इस खोज के बाद एशियाई लोगों के लिये बेहतर कृत्रिम जोड़ों का विकास हुआ है। घुटने को बदलने के परम्परागत आॅपरेशन का इस्तेमाल पिछले 30 वर्षों से हो रहा है और मौजूदा समय में ये आॅपरेशन तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। आज जोड़ बदलने का आॅपरेशन अस्थि शल्य चिकित्सा के क्षेत्रा में सबसे सफलतम आॅपरेशनों में से एक बन चुका है। 
मौजूदा समय में जोड़ बदलने के लिये फिक्स्ड बियरिंग और मोबाइल बियरिंग जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं। इन विकल्पों को लेकर इस बात को लेकर विवाद जारी है कि जोड़ बदलने के बारे में सबसे बेहतर विकल्प फिक्स्ड बियरिंग है या मोबाइल बियरिंग है। 
अनेक फिक्स्ड बियरिंग जोड़ 10 से 20 साल तक ठीक तरह से चलते हैं। लेकिन इन जोड़ों के साथ कुछ दिक्कतें एवं सीमायें हैं। मिसाल के तौर पर इन जोड़ों को बहुत अधिक मोड़ा नहीं जा सकता है। इसके अलावा मरीज को जोड़ों के पटेला एवं फीमर में कुछ दिक्कतें होती हैं। इन समस्याओं का समाधान मोबाइल बियरिंग जोड़ों से काफी हद तक हो जाता है। मोबाइल बियरिंग जोड़ अन्य जोड़ों की तुलना में न सिर्फ काफी अधिक चलते हैं बल्कि मरीज अपने जोड़ों को परम्परागत कृत्रिम जोड़ों की तुलना में काफी अधिक- करीब-करीब प्राकृतिक जोड़ों की तरह ही मोड़ सकता है। 
घुटने बदलने के क्षेत्रा में जो अन्य कामयाबियां हासिल हुयी हैं उनमें यूनी कम्पार्टमेंटल नी रिप्लेसमेंट भी महत्वपूर्ण है। इसके तरह पूरे घुटने को बदलने के बजाय उसके केवल खराब या बेकार हो चुके भाग को ही बदला जाता है। इस आॅपरेशन के बाद मरीज बहुत तेजी से स्वास्थ्य लाभ करता है। 
कूल्हे को बदलने की नयी सर्जरी को हाइब्रिड हिप रिप्लेसमेंट कहा जाता है। इसकी सफलता दर बहुत अधिक है। कम उम्र के लोगों में यह तकनीक अत्यंत सफल साबित होती है। इसमें कूल्हे के ज्वाइंट कप को सीमेंट के बगैर स्क्रू की मदद से जोड़ा जाता है। 
पहले कम उम्र के मरीजों के लिये परम्परगत जोड़ उपयुक्त नहीं होते थे क्योंकि ये जोड़ 10 से 20 साल चलते थे, लेकिन अब लंबे समय तक चलने वाले नये किस्म के जोड़ों (सिरेमिक आॅन सिरेमिक, मेटल आॅन मेटल इत्यादि) की मदद से गठिया (रियुमेटाॅयड आर्थाराइटिस) और एंकलाइजिंग स्पांडिलाइटिस जैसी बीमारियों से पीड़ित कम उम्र के मरीजों को इन नये जोड़ों की बदौलत दोबारा सक्रिय जीवन दिया जा सकता है। उम्मीद की जाती है कि यह जोड़ इन युवा मरीजों के लिये जिंदगी भर कार्य कर सकेगी। 
केवल अमरीका में हर साल पांच लाख से अधिक मरीजों के जोड़ बदले जाते हैं। जोड़ बदलने से न केवल विकलांग बना देने वाली आर्थाराइटिस से राहत मिल जाती है, बल्कि जोड़ों को नया जीवन मिलता है और मरीज के जीवनचर्या में भारी सुधार आता है। मौजूदा समय में अपने देश में भी जोड़ों को बदलने के लिये होने वाले आॅपरेशनों की लोकप्रियता बढ़ रही है। हाल के दिनों में ऐसे आॅपरेशनों की संख्या तेजी से बढ़ी है और भविष्य में इसमंे और तेजी से वृद्धि होने की संभावना है। 


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