Friday, 29 November 2019

औषधि लेपित स्टेंट से होगा क्रोनिक साइनुसाइटिस का इलाज 

साइनस गाल की हड्डियों (चीक बोन्स) और ललाट (फोरहेड) के अंदर छोटा, हवा से भरा रिक्त स्थान होता है। साइनस कुछ श्लेष्मा (म्यूकस) पैदा करते हैं जो छोटे रास्तों (चैनलों) के माध्यम से नाक में चले जाते हैं। साइनुसाइटिस का अर्थ साइनस में सूजन है।
साइनुसाइटिस चेहरे और नाक के हिस्से में स्थित श्लेष्मा झिल्ली में सूजन के कारण होती है। यह आंख, नाक  और सिर के एक तरफ के हिस्से पर दबाव डालती है जिसके कारण सिरदर्द होता है। बीमारी के सामान्य कारणों में बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण, सर्दी, एलर्जी, वायु जनित फंगस, नाक या साइनस में अवरोध, और श्वसन तंत्र में संक्रमण शामिल हैं।
साइनुसाइटिस के रूप
— एक्यूट साइनुसाइटिस का अर्थ वैसा संक्रमण है जो तेजी से विकसित होता है (कुछ ही दिनों में) और कम समय तक रहता है। एक्यूट साइनुसाइटिस के कई मामले एक सप्ताह तक रहते हैं। लेकिन इनका 2 से 3 सप्ताह तक रहना असामान्य नहीं है। यह अधिकतर खांसी-जुकाम की तुलना में लंबा होता है।
— क्रोनिक साइनुसाइटिस एक सामान्य स्थिति है जिसमें नासिका मार्ग (साइनस) के आसपास की कैविटी में सूजन हो जाती है और इलाज कराने के बावजूद यह कम से कम आठ सप्ताह तक रहता है। यह स्थिति श्लेष्मा के निष्कासन में बाधा पहुंचाती है और श्लेष्मा के निर्माण को बढ़ावा देती है। यदि आपको क्रोनिक साइनुसाइटिस है, तो आपको अपनी नाक से साँस लेने में परेशानी हो सकती है। आप अपनी आंखों और चेहरे के आसपास के क्षेत्र में सूजन महसूस कर सकते हैं, और रूक-रूक कर चेहरे में दर्द या सिर में दर्द महसूस कर सकते हैं।
कारण:
क्रोनिक साइनुसाइटिस किसी संक्रमण की वजह से हो सकता है, लेकिन यह साइनस (नेजल पाॅलिप) में वृद्धि या नेजल सेप्टम के अपनी जगह से हट जाने के कारण भी हो सकता है। क्रोनिक साइनुसाइटिस सबसे अधिक युवा और मध्यम उम्र के वयस्कों को प्रभावित करता है, लेकिन यह बच्चों को भी प्रभावित कर सकता है।
लक्षण
क्रोनिक साइनुसाइटिस की पहचान के लिए निम्नलिखित संकेतों और लक्षणों में से कम से कम दो का मौजूद होना जरूरी है:
— नाक से या गले के पिछले भाग के निचले हिस्से से गाढ़ा, पीला या हरे स्राव का निकलना।
— नाक में रुकावट या नाक के भरे होने के कारण नाक से साँस लेने में कठिनाई होना।
— आपकी आंखों, गाल, नाक या ललाट के आसपास दर्द, अधिक संवेदनशीलता और सूजन होना।
— गंध और स्वाद का कम अनुभव होना।
पहचान
— नेजल एंडोस्कोपी: आपके चिकित्सक आपकी नाक के माध्यम से एक फाइबर ऑप्टिक लाइट के साथ एक पतला एंडोस्कोप डालकर आपकी साइनस के अंदर के भाग का निरीक्षण करेंगे।
— इमेजिंग स्टडीज: कंप्यूटरीकृत टोमोग्राफी (सीटी) या मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) के इस्तेमाल से ली गयी तस्वीरों में आपकी साइनस और नाक के हिस्से का विस्तृत ब्यौरा दिख सकता है। ये गहरी सूजन या शारीरिक बाधा की पहचान कर सकते हैं जिसे एंडोस्कोप के इस्तेमाल से पहचान करना मुश्किल है।
इलाज
सर्जरी का इस्तेमाल मुख्य रूप से तब किया जाता है जब उपरोक्त चिकित्सा उपचार से स्थिति में सुधार नहीं होता है। सर्जरी का मुख्य उद्देश्य प्रभावित साइनस के ड्रैनेज में सुधार करना है।
परंपरागत
— बैलून कैथेटर डायलेशन: इसके तहत सर्जन नथुने में, अवरुद्ध साइनस में, एक लचीले ट्यूब के माध्यम से एक छोटा सा गुब्बारा धकेलते हैं। उसके बाद उस गुब्बारे को फूला दिया जाता है जो अवरूद्ध हिस्से को फैला देता है। उसके बाद गुब्बारे को पिचकाकर निकाल लिया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद साइनस ड्रैनेज चैनल के चैड़ा होने और साइनस के ठीक से ड्रेन करने की अच्छी संभावना होती है।
नवीनतम दृष्टिकोण
— वैसे क्रोनिक साइनुसाइटिस जिनका इलाज दवा से नहीं हो पाता है उनका इलाज करने के लिए अब औशधि लेपित स्टेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत साइनस कैविटी में स्टेरॉयड सोल्युशंस से लेपित एक छोटे ट्यूब के आकार के तार को प्रविष्ट कराया जाता है। एंजियोप्लास्टी के मामले में, स्टेंट शरीर के अंदर बना रहता है। लेकिन यहां, चिकित्सक स्टेंट को नासिका मार्ग में डालते हैं, और यह औषधि लेपित स्टेंट तब तक वहां बना रहता है जब तक बीमारी ठीक नहीं हो जाती है और चार सप्ताह के बाद इसे आसानी से निकाल दिया जाता है।


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