ब्रेन ट्यूमर

आम तौर पर लोग लगातार या अक्सर होने वाले सिर दर्द को गंभीरता से नहीं लेते हैं लेकिन यह दिमाग के किसी हिस्से में पनप रहे ट्यूमर का संकेत हो सकता है। हालांकि ट्यूमर शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है लेकिन मस्तिष्क में होने वाले ट्यूमर ज्यादा ही खतरनाक होते हैं। अगर सिर में अक्सर दर्द हो, सिर दर्द के साथ उल्टी हो, किसी अंग में कमजोरी महसूस हो, आंखों की रौशनी घट रही हो तथा दिमागी दौरे पड़ते हों तो ये लक्षण ब्रेन ट्यूमर के हो सकते हैं और ऐसी स्थिति में जांच एवं इलाज में विलंब करना मौत को बुलावा देना साबित हो सकता है।
ब्रेन ट्यूमर किसी भी व्यक्ति को किसी भी उम्र में हो सकता है। जन्म के तुरंत बाद किसी बच्चे से लेकर मौत की कगार पर पहुंचे 80 साल के किसी बूढ़े व्यक्ति को भी ब्रेन ट्यूमर हो सकता है। बच्चों को ब्रेन ट्यूमर होने पर सिर का आकार बड़ा होने लगता है क्योंकि बच्चे के सिर की हड्डियां जुड़ी नहीं होती है। इसलिये अगर किसी बच्चे के सिर का आकार तेजी से बढ़ रहा हो तो तत्काल किसी न्यूरो सर्जन से सलाह करनी चाहिये। दस साल से कम उम्र के बच्चों को 10 से 20 साल के बच्चों को तुलना में ब्रेन ट्यूमर अधिक होते हैं। 
अगर 25 से 30 साल से अधिक उम्र के स्वस्थ व्यक्ति को जिंदगी में पहली बार दौरा पड़ा हो तो यह ब्रेन ट्यूमर का संकेत हो सकता है। ब्रेन ट्यूमर का मुख्य लक्षण सिर दर्द है । सिर दर्द मुख्य तौर पर सुबह उठने पर शुरू होता है। आरंभ में सिर के एक हिस्से में दर्द होता है लेकिन  बाद में पूरे सिर में दर्द हो सकता है। सिर दर्द जब पूरी तीव्रता के साथ होता है तो उल्टी भी होती है। उल्टी आम तौर पर सुबह होती है और उल्टी होने पर सिर दर्द से आराम मिल जाता है। ब्रेन ट्यूमर होने पर आंखों की ज्योति भी कम हो सकती है। मरीज को कम दिखाई पड़ने के अलावा आंखों के आगे अंधेरा चमकने और एक आंख से कम दिखने जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। मिर्गी के दौरे ब्रेन ट्यूमर के प्रमुख लक्षण हैं। दौरे पूरे शरीर में, शरीर के आधे हिस्से में, केवल एक हाथ में और यहां तक कि केवल एक ऊंगली में भी हो सकते हैं। जब दौरा पूरे शरीर में होता है तो मरीज बेहोश हो जाता है। बेहोश होने के बाद जिस तरफ से दौरा आरंभ हुआ होता है उस तरफ कमजोरी रह सकती है। इसे आम बोलचाल में लकवा मारना भी कहा जाता है। इसके अलावा किसी भी अंग का सुन्न हो जाने, चींटियां चलने जैसा महसूस होने या क्षणिक समय के लिये ताकत कम हो जाने जैसे लक्षण भी मस्तिष्क या स्पाइन के ट्यूमर के संकेत हो सकते हैं। 
ब्रेन ट्यूमर कई प्रकार के होते हैं। हालांकि इसे कैंसर के आधार पर मुख्य रूप से दो वर्गों - कैंसरजन्य और कैंसर रहित ट्यूमर में विभाजित किया  गया है। बच्चों को ज्यादातर कैंसर वाले, 20 से 40 साल के लोगों को ज्यादातर कैंसर रहित और 50 साल से अधिक उम्र के लोगों को ज्यादातर कैंसर वाले ट्यूमर होते हैं। 
ब्रेन ट्यूमर दरअसल मस्तिष्क की कोशिकाओं का असामान्य विभाजन है। हमारे शरीर की सामान्य कोशिकायें एक समान गति से विभाजित (नष्ट) होती रहती हैं और नयी कोशिकायें बनती रहती हैं। ये नयी कोशिकायें नष्ट हुयी कोशिकाओं का स्थान लेती हैं। आम तौर पर हमारा शरीर ओंकोजीन नामक प्रक्रिया की मदद से इन कोशिकाओं पर नियंत्रण रखता है। ओंकोजीन कोशिकाओं को नियमित रूप से विभाजित करने के लिये प्रेरित करती है। कोशिकाओं पर से ओंकोजीन का नियंत्रण समाप्त हो जाने पर इन कोशिकाओं का अनियमित विभाजन आरंभ हो जाता है। अंत में ये कोशिकायें गांठ का रूप धारण कर लेती हैं। कैंसर रहित गांठ (ट्यूमर) के विभाजित होने की गति कम रहती है लेकिन कैंसर वाले ट्यूमर की कोशिकाओं के विभाजन की गति अत्यंत तीव्र होती है। ये कोशिकायें गुणात्म्क रूप से बढ़ती जाती हैं और शीघ्र ही भयानक गांठ का रूप धारण कर लेती हैं। हमारे मस्तिष्क के भीतर सीमित जगह होती है। गांठ के कारण सामान्य मस्तिष्क पर दबाव पड़ता है जिससे मस्तिष्क के कार्यकलाप में बाधा पड़ती है। मस्तिष्क के जिस भाग पर दबाव पड़ता है उस भाग से संचालित होने वाले शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं। गांठ के कारण ही सिर दर्द, उल्टी और दौरे जैसी समस्यायें होती हैं। 
किसी व्यक्ति को काफी लंबे समय से सिर दर्द होने पर सिर दर्द के कारणों की समुचित जांच होनी चाहिये। इसके लिये सीटी स्कैन अथवा एम.आर.आई. की मदद ली जाती है। सी टी स्कैन में कोई धब्बा (स्पाॅट) आने पर ब्रेन ट्यूमर की पुष्टि हो जाती है। ऐसी स्थिति में समय गंवाये बगैर न्यूरो विशेषज्ञ से इलाज आरंभ कर देना चाहिये। पुराने जमाने में कम्प्यूटराइज्ड टोमोग्राफी (सी टी) स्कैन और मैगनेटिक रिजोनेंस इमेजिंग (एम.आर.आई.) जैसी जांच तकनीकों के नहीं होने के कारण ब्रेन ट्यूमर का पता नहीं चलता था। लेकिन मौजूदा समय में इन नयी जांच तकनीकों की उपलब्धता के कारण ब्रेन ट्यूमर का पता समय पर लगने लगा है। कभी-कभी तो किसी और कारणों से करायी गयी जांच से भी ट्यूमर होने का पता चल जाता है।  
अगर ट्यूमर कैंसर रहित हो तो आपरेशन  के बाद मरीज पूरी तरह ठीक हो जाता है। कई मरीज को आपरेशन के बाद दौरे आते हैं। ऐसी स्थिति में मरीज को तीन साल के लिये दौरे के नियंत्रण की दवाईयां दी जाती हैं। जब तीन साल तक दौरे नियंत्रण में रहते हैं तो दवाइयां बंद कर दी जाती हैं। 
कैंसर रहित ट्यूमर को आपरेशन के जरिये हटा देने पर उस जगह पर दोबारा ट्यूमर नहीं बनता है लेकिन कैंसरयुक्त ट्यूमर को निकाल देने के बाद भी उस जगह दोबारा ट्यूमर होने की आशंका होती है। हालांकि आज कैंसर युक्त ट्यूमर को रेडियो थिरेपी की मदद से जलाया जा सकता है लेकिन इसके बावजूद छह महीने से पांच साल में दोबारा ट्यूमर हो सकता है। लेकिन रेडियो थिरेपी नहीं देने पर तीन-चार महीने में ही दोबारा ट्यूमर हो सकता है। ट्यूमर जब तीन सेंटी मीटर से छोटा होता है तो गामा नाइफ रेडियोथिरेपी से उसे जलाया जा सकता है।  
मौजूदा समय में ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी में रोबोटिक आर्म, स्टीरियोटौक्सी एवं सी आर्म की मदद ली जाने लगी है जिससे आपरेशन में किसी भी तरह की गलती होने 
की गुंजाइश नहीं रहती है और आपरेशन पूरी तरह से कारगर होता है। अनेक देशों में इम्यूनोथिरेपी पर तेजी से काम चल रहा 
है और आने वाले कुछ वर्षों में इस थिरेपी का इस्तेमाल ब्रेन ट्यूमर के इलाज में होने लगेगा। इस थिरेपी के तहत शरीर से कोशिकाओं को निकाल कर ट्यूमर पर आघात कराया जाता है। उम्मीद है कि इस विघि के इस्तेमाल में आने के बाद ब्रेन ट्यूमर के इलाज में क्रांति आ जायेगी। 


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