दुल्हन वही जो इंटरनेट दिलाये 

संचार क्रांति का अग्रदूत इंटरनेट आज दिलों और रिश्तों को जोड़ने वाला प्रमुख माध्यम बनता जा रहा है। एक समय कहा जाता था कि शादियां स्वर्ग में तय होती हैं, लेकिन आज शादियां इंटरनेट के जरिये तय होने लगी हैं। आज ई-मेल और साइबर चैटिंग के जरिये जाति, नस्ल और भौगोलिक सीमाओं को परे रखकर लड़के-लड़कियां मित्रता कायम कर रहे हैं। कई बार यह मित्रता शादी में भी बदल जाती है। इसके अलावा इंटरनेट पर आज सैंकड़ों ऐसे वेडिंग साइट्स हैं जिन पर मनपसंद रिश्ते ढ़ूंढे जा सकते हैं। इंटरनेट के कारण मां-बाप के लिये अपने लड़के-लड़की की शादी तय करने का काम चुटकी बजाने के समान आसान बन गया है। हालांकि आज भी छोटे शहरों एवं गांवों में रिश्ते ढूंढने के लिये परम्परागत तौर-तरीके ही प्रचलित हैं लेकिन शहरों एवं महानगरों में रिश्ते तय कराने में इंटरनेट की बड़ी भूमिका हो गयी है। एक समय हमारे समाज में आम तौर पर ब्राह्मनों एवं नाइयों के जरिये शादियां तय होती थीं। प्रत्येक गांव में आठ-दस सम्पन्न घरों के लिये एक नाई होता था जिस पर विवाह योग्य लड़के या लड़की का रिश्ता जोड़ने का काम सौंप दिया जाता था। नाई इतना भरोसेमंद होता था कि वह दोनों पक्षों की ओर से फैसला लेने के लिये स्वतंत्र होता था। उस समय लड़के-लड़की के मिलने-जुलने या बात करने की बात तो कोसों दूर थी, वर एवं वधु पक्ष के परिवार के लोग भी केवल शादी के समय ही एक दूसरे से मिलते थे। विवाह होने तक के सभी रस्मों में केवल नाई या ब्राह्मण ही एक दूसरे पक्ष से नाता जोड़ते थे। धीरे-धीरे रिश्ते ढूंढने के काम में नाई और ब्राह्मण की जिम्मेदारी एवं भूमिका कम होती गयी और यह जिम्मेदारी रिश्तेदार एवं गांव के लोग निभाने लगे। समय के साथ रिश्ते तय करने के काम में नये माध्यमों का आर्विभाव हुआ। इन माध्यमों में पत्र-पत्रिकाओं में वैवाहिक विज्ञापन प्रमुख बन गये। लोगों की व्यस्तता बढ़ने के कारण वैवाहिक विज्ञापनों का महत्व बढ़ने लगा। धीरे-धीरे यह प्रतिष्ठा का सूचक भी बन गया। कई अखबार जोड़ियां मिलाने के लिये कम्प्यूटरों की मदद लेने लगे। अखबारों एवं पत्रिकाओं के माध्यम से न केवल दूरदराज के रिश्ते ढूंढने में मदद मिलने लगी बल्कि मनचाहा जोड़ा ढूंढने के लिये अनेक विकल्प आने लगे। कुछ समय बाद वैवाहिक विज्ञापनों के अलावा मैरिज ब्यूरो भी अपनी भूमिका निभाने लगे। बड़े-बड़े शहरों में धड़ल्ले से मैरिज ब्यूरो अस्तित्व में आने लगे। अपने बेटे-बेटियों की शादी को इच्छुक मां-बाप अपने बेटे या बेटी का पूरा ब्यौरा मैरिज ब्यूरो को दे देते हैं और मैरिज ब्यूरो उनके पसंद के मुताबिक रिश्ता तय करवा देते हैं। आवश्यकता पड़ने पर कुछ परिवार प्राइवेट खुफिया एजेंसियों के माध्यम से दूसरे पक्ष के बारे में पूरी जानकारी हासिल करते हैं। कई जातियों एवं समुदायों में सामूहिक रूप से लड़के-लड़की की शादी तय करने का भी प्रचलन है। विभिन्न समुदाय इस काम के लिये विशेष पत्रिकायें भी निकालते हैं। कुछ समुदायों मेें रिश्ते तय करने के लिये परिचय सम्मेलनों का भी आयोजन होने लगा है। लेकिन आज इंटरनेट रिश्ते मिलाने के काम में सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। आज इंटरनेट पर सैंकड़ों ऐसे साइट्स हैं जिनके जरिये पसंदीदा जीवनसाथी ढूंढा जा सकता है। भारत में इंडियन मैरिजेज डॉट कॉम, शादी डॉट कॉम, वेडिंगवेल्स डॉट कॉम, मैरिज डॉट कॉम, साइबर प्रोपोजल डॉट कॉम, जीवन साथी डॉट कॉम, लाइफ मेट डॉट कॉम, मैटरीमोनियल ऑन लाइन डॉट कॉम, जी नेक्स्ट, टाइम्स मैटरिमोनियल्स, गो फोर आई डॉट कॉम जैसे दर्जनों वेब साइट्स हैं जिन पर जाकर अपने पंसद के जीवन साथी का चुनाव किया जा सकता है, उनसे संपर्क किया जा सकता है एवं उनकी प्रतिक्रिया जानी जा सकती है। अपना प्रोफाइल उन तक भेजा जा सकता है। यह काम मिनटों में हो सकता है। इन वेब साइटों में कुछ ऐसे वेब साइट हैं जिन पर खुद अपना वैवाहिक परिचय (प्रोफाइल) डाला सकता है।


इनमें से अनेक साइट न केवल मनपसंद एवं सुयोग्य जीवन साथी का चुनाव करने में मदद करते हैं बल्कि कार्ड छपवाने, शादी की योजना बनाने, शादी की तैयारियां करने तथा हनीमून की व्यवस्था करने की भी जिम्मेदारियां उठाते हैं। व्यक्ति अपनी बेटी या बेटे की शादी के लिये किस तरह की तैयारी करे, किस मद में कितना खर्च करे,  आदि के बारे में भी इन साइटों पर जानकारियां दी गयी हैं। अनेक साइटों पर दाम्पत्य संबंधों के बारे में जानकारियां, परिवार चलाने के बारे में सलाह-मशविरा एवं शादी के बाद आने वाली रोजमर्रे की समस्याओं के समाधान के बारे में भी जानकारियां हैं। इसके अलावा इमिग्रेशन कानून, अप्रवासी भारतीय से शादी के बाद शादी के पंजीकरण की प्रक्रिया आदि के बारे में भी जानकारी दी गयी है। इनमें से अनेक साइटों पर शादी से संबंधित तमाम जानकारियां मौजूद हैं। इन पर ज्योतिषियों, ब्यूटीशियनों, ब्यूटी पार्लरों, कॉस्मेटिक संेटरों, केटरर्स, डिटेक्टिव एजेंसियों, मैरिज ब्यूरो, फोटो स्टुडियो और मैरिज हॉलों से लेकर  मिठाइयों, साड़ियों तथा उपहारों की दुकानों के बारे में जानकारियां, उनके पते एवं उनके संपर्क सूत्र भी दिये हुये हैं। इसके अलावा शादी के आयोजन की तैयारी की योजना कैसे बनायी जाये, कितने खर्च किये जायें, कौन-कोैन से रस्म किये जायें आदि के बारे में जानिकारियां दी गयी हैं। इन साइटों पर विभिन्न समुदायों एवं देशों में शादी के प्रचलित रस्म एवं रिवाजों के अलावा वर-वधु के पोशाक, वधु सौंदर्य एवं श्रंृगार आदि के बारे में भी जानकारियां पायी जा सकती हैं। इसके अलावा शादी एवं बाद के पारिवारिक संबंधों के दौरान आने वाली समस्याओं के समाधान एवं सलाह आदि की भी जानकारी हासिल की जा सकती है।


भारत के लोगों के बीच अभी इंटरनेट की पहुंच सीमित होने के कारण इसका लाभ मुख्य तौर पर महानगरों एवं विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीय ही उठा रहे हैं। प्रवासी भारतीय की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाये गये वेबसाइट मैरिज डॉट कॉम भारतीय मूल के वर-वधुओं को ढूंढने में मदद करता है। इस पर ढाई हजार से अधिक प्रोफाइल हैं तथा 800 से अधिक फोटो अलबम हैं।


साइबर प्रोपोजल नामक एक अन्य वेबसाइट पर 7000 से ज्यादा प्रोफाइल हैं। वेडिंग वेल्स इंडिया डॉट कॉम नामक साइट जन्मपत्री मिलाने से लेकर शादी के बाद पारिवारिक सलाह-मशविरा देने तक के काम को अंजाम देती है। इसी तरह मैटरिमोनियल ऑन लाइन नामक एक अन्य साइट पर 15000 से अधिक प्रोफाइल हैं जबकि टाइम्स मैटरिमोनियल्स पर 5000 से अधिक प्रोफाइल हैं। एक अन्य साइट जीवन साथी डॉट कॉम पर 21000  प्रोफाइल हैं तथा रोजाना 200 से अधिक प्रोफाइल इसमें जुड़ते हैं। इसके अलावा जीवन साथी डॉट कॉम ने जीवन साथी मैच मेल सेवा भी शुरू की है। यह सेवा लेने वालों को उनकी पसंद एवं जरूरत के हिसाब से हर माह ई-मेल के जरिये प्रोफाइल भेजे जाते हैं। यह साइट रिश्ते तय कराने के अलावा हनीमून मनाने की भी जिम्मेदारी लेता है। इस साइट पर देश-विदेश के पचास से अधिक हनीमून स्थलों के बारे में पूरी जानकारियां उपलब्ध हैं।


इंटरनेट के फैलते दायरे तथा वेडिंग साइटों के प्रति उत्साह को देखकर लगता है कि आने वाले समय में इंटरनेट विवाह तय कराने का प्रमुख माध्यम बन जायेगा।


 


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