Tuesday, 19 November 2019

गर्मियों में फूड प्वाइजनिंग से कैसे बचें  

हमलोग वर्षों से पढ़ते और सुनते रहे हैं कि गर्मी के मौसम में खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए वरना खाद्य विषाक्तता (फूड प्वाइजनिंग) होने का खतरा रहता है। ऐसे में हमारे मन में यह सवाल उठना स्वभाविक है कि फूड प्वाइजनिंग आखिर गर्मी के मौसम में ही क्यों होता हैै।
गर्मी के मौसम में फूड प्वाइजनिंग अधिक होने के लिये मौसम आदि में बदलाव जैसे प्राकृतिक कारणों के अलावा  हमारे खान-पान के गलत तौर-तरीके भी जिम्मेदार हैं। प्राकृतिक कारणों में सबसे सामान्य कारण जीवाणु हैं। वातावरण में मिट्टी, हवा, जल और यहां तक कि मनुष्यों एवं जानवरों के शरीर में भी जीवाणु मौजूद होते हैं। ये सूक्ष्म जीवाणु गर्मी के महीनों में बहुत तेजी से वृद्धि करते हैं। अधिकतर खाद्य जनित जीवाणु 90 से 110 डिग्री फारेनहाइट तापक्रम में सबसे तेजी से वृद्धि करते हैं। जीवाणु के फलने-फूलने के लिए नमी की भी जरूरत होती है और गर्मी का मौसम अक्सर गर्म और नमी भरा होता है। ऐसे वातावरण में हानिकारक जीवाणु खाद्य सामग्रियों पर आसानी से कई गुणा वृद्धि कर सकते हैं। ऐसा होने पर खाद्य पदार्थ विषाक्त हो जाता है।
खाद्य विषाक्तता मनुष्यों की गतिविधियों के कारण भी होती है। इस मौसम में लोगों का बाहर घूमना-फिरना बढ़ जाता है। कई लोग बाहर पिकनिक मनाने या कैम्पिंग ट्रीप में जाते हैं और वहां बाहर ही खाना बनाते हैं, कुछ लोग तो आग में सीक पर भी खाना बनाते हैं जिससे वहां रसोई घर जैसी सफाई नहीं मिल पाती है। ऐसे दूषित खाना खाने से लोग अक्सर बीमार हो जाते हैं। हालांकि जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है वे न सिर्फ भोजन के हानिकारक जीवाणुओं बल्कि वातावरण के अन्य हानिकारक जीवाणुओं का भी सामना कर लेते हैं। हालांकि सरकारी एजेंसियां और खाद्य पदार्थों के उत्पादक खाद्य सामग्रियों के लंबे समय तक सुरक्षित होने का दावा करते हैं लेकिन इसके लिए खाद्य पदार्थों का उचित रख-रखाव जरूरी है।
गर्मी के मौसम में कुछ बातों का ध्यान रखकर हम खाद्य विषाक्तता से बच सकते हैं।
0 हाथ की ठीक से सफाई नहीं रखने पर खाद्यजनित बीमारियों का खतरा रहता है।
इसलिए जहां तक संभव हो खाद्य पदार्थों को हाथ में लेने से पहले, बाथरूम से आने के बाद, डायपर बदलने के बाद और पालतू जानवरों को छूने के बाद अपने हाथों को साबुन और गर्म पानी से साफ करें।
0 जब घर से बाहर कुछ खा रहे हों तो  पहले पता कर लें कि वहां साफ पानी उपलब्ध है या नहीं और अगर साफ पानी नहीं हो तो पैक किया हुआ खाद्य पदार्थ खरीदें। अपने साथ डिस्पोजेबल रूमाल या कपड़े रखें या गीला किया हुआ पेपर टाॅवल रखें। कुछ खाने से पहले उससे हाथों और वहां की सतह की ठीक से सफाई कर लें।  
0 अगर आप मांसाहारी हैं तो बाहर ले जाने के लिए खाना पैक करते समय कच्चे मांस को अन्य खाद्य पदार्थों से अलग रखें।
0 प्लेटों, अन्य बरतनों और चाकू वगैरह को साफ कर खाद्य पदार्थों से अलग रखें।
0 भोजन को तेज आंच में तैयार करें। इससे खाद्य विषाक्तता पैदा करने वाले हानिकारक जीवाणु मर जाते हैं। 
0 मांस और मुर्गी वगैरह को ग्रील करने पर अक्सर उसका बाहरी हिस्सा बहुत जल्द भूरा हो जाता है इसलिए यह पता कर लें कि वह ठीक से पका है या नहीं। मांस आदि के पूरी तरह से नहीं पकने पर उस हिस्से में जीवाणु पनप कर तेजी से वृद्धि कर सकते हैं। हैम्बर्गर या अन्य मांस (बछड़े, मेमना और सुअर का मांस) को 160 डिग्री फारेनहाईट और मुर्गी को 165 डिग्री फारेनहाईट पर पकाएं। स्टिक और रोस्ट किए हुए मांस को 160 डिग्री से 170 डिग्री फारेनहाइट में पकाएं। पूरी मुर्गी को 180 डिग्री फारेनहाइट पर पकाएं।
0 मांस, चिकन और आलू या अन्य सलादों को बर्फ में पैक कर, आइस पैक या बिल्कुल ठंडे पानी में फ्रीज में रखें।
0 पेय और खाद्य पदार्थों को अलग-अलग फ्रीज में रखें क्योंकि पेय पदार्थों वाले कूलर को बार-बार खोलना पड़ता है। 
0 कूलर को कार के सबसे ठंडे हिस्से में या छाया वाले स्थान पर सूर्य की धूप से दूर रखें।
0 फ्रीज को हमेशा अधिक तापक्रम पर रखें। तापमान कम करने पर बर्फ पिघलने लगेंगी जिससे जीवाणु पनप सकते हैं।
0 फ्रीज नहीं होने पर फलों, सब्जियों, कड़ी चीज, ब्रेड, मक्खन, क्रेकर या पेय पदार्थों को सीमित मात्रा में ही खरीदें।
0 फ्रीज से कोई खाद्य सामग्री निकालने पर उसका इस्तेमाल दो घंटे से पहले ही कर लें । इसके बाद वह सुरक्षित नहीं रह जाता है। 90 डिग्री फारेनहाइट या इससे अधिक तापमान पर कोई भी खाद्य सामग्री एक घंटे से अधिक समय तक नहीं छोड़ें। 
0 डिब्बाबंद पेय और खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल से बचें। सभी डिब्बाबंद पेय और आहार 20 से 25 डिग्री सेंटीग्रेड पर रखे जाने के लिए बनाए जाते हैं लेकिन गर्मियों में तापमान 40 से 45 डिग्री तक पहुंच जाता है जिससे इनमें विभिन्न रोगाणुओं को तेजी से पनपने का मौका मिल जाता है। ऐसे शीतल पेय, फलों के रस या अन्य डिब्बाबंद आहार के सेवन से खाद्य विषाक्तता उत्पन्न हो जाती है। इनके सेवन के आठ घंटे बाद से खाद्य विषाक्तता के लक्षण प्रकट होने लगते हैं।


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