Thursday, 7 November 2019

कैसे किया जाता है थायरॉयड कैंसर का इलाज?

शरीर में सभी थायरॉयड कैंसर कोशिकाओं को हटाने या उसे नष्ट करने के लिए सर्जरी और उसके बाद रेडियोएक्टिव आयोडीन उपचार किया जाता है। हर व्यक्ति में इसका इलाज उसके प्रकार- पैपिलरी, फोलिकुलर, मेडुलरी, एनाप्लास्टिक और थायरॉयड लिम्फोमा पर निर्भर करता है और साथ ही कैंसर की अवस्था पर भी निर्भर करता है।
थायरॉयडेक्टोमी से या तो पूरी थायरॉयड ग्रंथि को या उसके एक हिस्से को निकाल दिया जाता है और यदि बीमारी गले में लिम्फ नोड तक फैल चुकी हो तो उसके साथ लिम्फ नोड को भी निकाल दिया जाता है। थायरॉयड कैंसर होने पर ग्रंथि को निकालने के लिए अधिकतर मामलों में थायरॉयडेक्टोमी ही की जाती है और यह रेडियोएक्टिव इलाज और थायरॉयड रिप्लेसमेंट थिरेपी को भी अधिक प्रभावी बनाता है।
इन दिनों, थायरॉयड कैंसर के छोटे ट्युमर को निकालने के लिए दागरहित सर्जरी भी की जाती है जिसमें इस प्रक्रिया के दौरान कांख (एक्जिला) में चीरा लगाया जाता है जो रोबोट के द्वारा किया जाता है या दूरबीन की मदद से किया जाता है।
बीमारी के छूट जाने या बीमारी के दोबारा होने की संभावना का खत्म करने के लिए शरीर में बची हुई किसी भी थायरॉयड कैंसर कोषिकाओं और थायरॉयड कोषिकाओं को नष्ट करने के लिए सर्जरी के बाद रेडियोएक्टिव आयोडीन थिरेपी दी जाती है जिसे रेमनेंट एब्लेषन भी कहते हैं। इस इलाज के तहत् रोगी को रेडियोएक्टिव आयोडीन युक्त पेय या कैप्सूल दी जाती है। थायरॉयड कोशिकाएं आयोडीन को अवषोशित कर लेती हैं लेकिन गैर- थायरॉयड कोशिकाओं को इससे कोई नुकसान नहीं होता। सर्जरी और रेडियोएक्टिव आयोडीन चिकित्सा के बावजूद यदि शरीर में कैंसर मौजूद रह जाये तो कीमोथेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
पूरे इलाज के बाद भी रोगी को अपनी बाकी जिंदगी थायरॉयड हार्मोन की गोलियां लेनी पड़ती है। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि सर्जरी के दौरान छूट गये लिम्फ नोड या थायरॉयड ऊतक के छोटे टुकड़ों में थायरॉयड कैंसर के दोबारा प्रकट होने, या फेफड़ों या हड्डियों जैसे षरीर के अन्य हिस्सों में कैंसर की जांच के लिए चिकित्सक समय-समय पर रक्त परीक्षण या थायरॉयड का स्कैन कराने की सलाह देते हैं। लेकिन अच्छी खबर यह है कि यदि थायरॉयड कैंसर दोबारा होता है और यदि यह अधिक फैला न हो तो इसका इलाज किया जा सकता है।
थायरॉयड कैंसर के इलाज के लिए ओंकोलॉजी विशेषज्ञ, इंडोक्राइनोलॉजी विशेषज्ञ, रेडियोलॉजी विशेषज्ञ, पैथोलॉजी विशेषज्ञ, क्लिनिकल साइकोलॉजी विशेषज्ञ और आहार विशेषज्ञ जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञ स्वास्थ्य चिकित्सकों को एकत्रित करने की जरूरत होती है। इन सभी विशेषज्ञों और प्रशिक्षित नर्सों की निगरानी में रोगी का विशेष ख्याल रखने पर रोगी जल्द स्वस्थ होता है और उसे कम शारीरिक और मानसिक परेषानियों का सामना करना पड़ता है।
अस्पताल में प्रशिक्षित चिकित्सकों की अनुभवी टीम की निगरानी में इलाज होने पर कैंसर रोगियों के इलाज की सफलता दर अच्छी होती है इसलिए रोगी के इलाज के दौरान होलिस्टिक देखभाल का अवश्य चुनाव करना चाहिए।


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