Thursday, 7 November 2019

केरैटेक्टॉमी (लेसिक आई सर्जरी)

लेसिक का अर्थ है लेजर इन-सीटू केरेटोमिलेसिस। यह एक लोकप्रिय सर्जरी है जो निकट दृष्टि दोश वाले, दूर दृश्टि दोश वाले या एस्टिगमैटिक लोगों में दृष्टि को सही करने के लिए की जाती है। दृष्टि में सुधार करने वाली सभी लेजर सर्जरी में कॉर्निया को फिर से सही आकार दिया जाता है।
लेसिक आई सर्जरी के क्या लाभ हैं?
- लगभग 96 प्रतिशत रोगियों में उनकी इच्छानुसार दृष्टि प्राप्त होती है
- बहुत कम दर्द होता है
- सर्जरी के लगभग तुरंत बाद या अगले दिन दृष्टि सही हो जाती है
- पट्टी करने या टाँका लगाने की आवश्यकता नहीं होती है
- दृष्टि में परिवर्तन होने के मामले में दृष्टि को और सही करने के लिए सालों बाद भी समायोजन संभव है
- चश्मा या कॉन्टैक्ट लेंस पर निर्भरता में आश्चर्यजनक रूप से कमी आती है
लेसिक आई सर्जरी के नुकसान क्या हैं?
- जब डॉक्टर फ्लैप बनाते हैं, उस समय बहुत ही दुर्लभ स्थिति में (लगभग नगण्य) समस्याएं हो सकती हैं, जो दृष्टि को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए, लेसिक आई सर्जरी कराने के लिए अनुभवी सर्जन का चुनाव करना चाहिए।
- आपने कांटैक्ट लेंस का उपयोग करते समय या चश्मा पहनने पर जिस उच्चतम स्तर की दृश्टि पाई, कभी- कभार (लगभग नगण्य) वह ''सर्वश्रेष्ठ'' दृष्टि प्राप्त नहीं कर सकते हैं।
लेसिक आई सर्जरी के संभावित दुष्प्रभाव क्या हैं?
- चमक
- छवियों के चारों ओर प्रभामंडल (हैलो) का दिखना
- रात में गाड़ी चलाने में कठिनाई
- दृष्टि में उतार-चढ़ाव
- ड्राई आई
लेसिक आई सर्जरी कैसे की जाती है?
(क) लेसिक लोकल एनीस्थिसिया के तहत की जाती है। मरीज हल्का बेहोश करने का भी अनुरोध कर सकते हैं।
(ख) लेसिक के दौरान, माइक्रोकेराटोम या फेमटोसेकंड लेजर का उपयोग कॉर्निया में एक पतली फ्लैप बनाने के लिए किया जाता है, जिसे बाद में हटा दिया जाता है जिसमें दर्द नहीं होता है और दूसरे लेजर का इस्तेमाल कर मूल कॉर्निया के ऊतक को पुनः आकार दिया जाता है।
(ग) कॉर्निया को पुनः आकार देने के बाद, कॉर्निया फ्लैप को वापस रखा जाता है और सर्जरी पूरी हो जाती है।
सर्जरी के बाद
(क) आपकी आँखें अस्थायी रूप से शुष्क हो जाएंगी, हालांकि आप ऐसा महसूस नहीं कर सकते हैं।
(ख) आपको संक्रमण, इंफ्लामेशन और ड्राई आई को रोकने के लिए आई ड्राॅप लेने की सलाह दी जाएगी।
(ग) रिकवरी आम तौर पर बहुत तेजी से होती है।
(घ) सर्जन द्वारा विशिष्ट फौलो-अप का समय निर्धारित किया जाएगा।


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