Monday, 11 November 2019

महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान अधिक हो सकते हैं पैनिक अटैक 

पैनिक अटैक युवा अवस्था में ही शुरू हो जाता है लेकिन कुछ लोगों में इसके लक्षण बाद में उभर सकते हैं। लगातार पैनिक अटैक के कारण उत्पन्न जटिलताओं या लक्षणों में कुछ खास तरह के डर (फोबिया), खास तौर पर घर छोड़ने पर होने वाले डर (एगोरफोबिया), सामाजिक गतिविधियों से दूर रहने की इच्छा, उदासी, काम-काज में दिक्कत, स्कूल में पढ़ाई में दिक्कत, आत्महत्या की सोच या प्रवृत्ति, वित्तीय दिक्कत, शराब या अन्य मादक पदार्थों का सेवन आदि शामिल हैं। पैनिक डिसआर्डर के कारण मरीज में दिल की बीमारियों के खतरे बढ़ते है।
क्यों होता है पैनिक अटैक 
पैनिक डिसआर्डर के एक सिद्धांत के मुताबिक, कई शारीरिक एवं मानसिक तंत्र से निर्मित शरीर की प्राकृतिक ''अलार्म प्रणाली'' किसी तरह के खतरे होने पर सक्रिय हो जाती है और व्यक्ति को सतर्क करती है। लेकिन यह कई बार उस समय भी अनावश्यक तौर पर बज उठती है जब कोई खतरा नहीं होता है। वैज्ञानिक अभी इस बात पर निश्चित नहीं हैं कि ऐसा क्यों होता है अथवा क्यों अन्य लोगों की तुलना में कुछ लोगों को इस तरह की समस्या अधिक होती है। पैनिक डिसआर्डर की समस्या परिवार दर परिवार चलती रहती है। इसका मतलब यह है कि इसके पीछे आनुवांशिक (जीन की) भूमिका भी है जो यह निर्धारित करती है कि किसे यह समस्या अधिक होगी। हालांकि जिन लोगों के परिवार में इस बीमारी का कोई इतिहास नहीं रहा हो उन्हें भी यह समस्या हो सकती है। पहला पैनिक अटैक अक्सर शारीरिक बीमारी, जीवन से जुड़े किसी बड़े तनाव या कुछ दवाइयों के सेवन के कारण भी हो सकता है। कुछ दवाइयां भय संबंधी प्रतिक्रियाओं से जुड़े मस्तिष्क के हिस्से की सक्रियता को बढाती हैं। कुछ महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान पैनिक अटैक होने की दर में बढ़ोतरी देखी जाती है। 
क्या होगा अगर इलाज न कराएं 
पैनिक डिसआर्डर का समय पर उपचार नहीं होने पर एंग्जाइटी उस हद तक बढ़ सकती है कि पैनिक अटैक होने अथवा उससे बचने या उसे छिपाने के कारण किसी व्यक्ति का जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। इसके कारण कई लोगों को दोस्तों अथवा परिवार के सदस्यों के साथ दिक्कत हो सकती है, कई लोग स्कूल की परीक्षाओं में फेल हो सकते हैं और कई लोगों की नौकरी छूट सकती है। हालांकि कई बार पैनिक अटैक की समस्या समय के साथ कम होती जाती है लेकिन आम तौर पर यह समस्या अपने आप ठीक नहीं होती और इसके लिये विशिष्ट उपचार जरूरी होता है। 


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