Friday, 8 November 2019

संभल कर करें आंखों का मेकअप

बड़ी-बड़ी कजरारी आंखें चेहरे की सुंदरता में चार चांद लगा देती हैं। लेकिन जिनकी आंखें सुंदर नहीं हैं वे भी आंखों का थोड़ा से मेकअप करके अपनी आंखों को आकर्षक बना सकती हैं।


आंखों के श्रृंगार के लिए आम तौर पर आई-ब्रो पेंसिल, आई लाइनर, आई शैडो और मस्कारा का इस्तेमाल किया जाता है। आई-ब्रो पेंसिल का इस्तेमाल भौहों को सुंदर आकार देने के लिए किया जाता है। इससे भौहों को अधिक काली और घनी बनायी जा सकती है और इसकी मदद से भौंहों को मनचाहा आकार दिया जा सकता है।


आई लाइनर तरल पदार्थ होता है जिसे ब्रश की मदद से पलकों पर बरौनियों के साथ-साथ एक हल्की रेखा के रूप  में लगाया जाता है। इसे लगाने से आंखें देखने में सुंदर लगती हैं। अगर आंख छोटी हो तो थोड़ी चौड़ी रेखा लगाने से आंख देखने में थोड़ी बड़ी लगती है। 


आई शैडो भौहों और पलकों के बीच की त्वचा पर लगायी जाती है। आई शैडो कई रूप जैसे क्रीम, पाउडर और पेंसिल के रूप में मिलते हैं लेकिन क्रीम के रूप  में यह अधिक प्रचलन में है। आई शैडो लगाने से पहले त्वचा पर फेस पाउडर लगा लेने से यह अधिक समय तक टिका रहता है। यह कई रंगों में भी मिलता है लेकिन इसके रंग का चुनाव त्वचा और पोशाक के रंग और डिजाइन के अनुसार करना चाहिए। आई शैडो शाम के समय या किसी पार्टी वगैरह में जाते समय ही लगाना चाहिए। दिन में हल्के रंग का आई शैडो जबकि रात में गहरे रंग का आई शैडो लगाने से आंखें अधिक सुंदर लगती हैं। जिनकी आंखें धंसी हुई हों उन्हें आई शैडो के इस्तेमाल से बचना चाहिए क्योंकि आई शैडो लगाने से उनकी आंखें और अधिक धंसी हुई प्रतीत होंगी।


मस्कारा बरौनियों पर लगाया जाता है और इसे लगाने से बरौनियां देखने में घनी प्रतीत होती हैं। इसे ब्रश द्वारा पलकों की जड़ों से किनारे की ओर लगाया जाता है। यह कई रंगों में मिलता है लेकिन अधिकतर महिलाएं काले रंग का मस्कारा लगाना ही अधिक पसंद करती हैं क्योंकि इससे बरौनियां देखने में अधिक प्राकृतिक प्रतीत होती हैं। आई शैडो की तरह ही मस्कारा भी शाम में लगाना अच्छा लगता है। अगर दिन में मस्कारा लगाने की इच्छा हो तो सिर्फ काले रंग का ही मस्कारा लगाएं। जबकि रात में नीला मस्कारा भी देखने में अच्छा लगता है।


नेत्र प्रसाधनों का इस्तेमाल आयु, समय और अवसर के अनुसार करना चाहिए। दिन में आंखों का हल्का मेकअप जबकि रात में हल्के मेकअप के साथ-साथ गहरा मेकअप भी देखने में अच्छा लगता है। अधिक उम्र की महिलाओं को आंखों का हल्का मेकअप ही करना चाहिए। कामकाजी महिलाओं को भी ऑफिस जाते समय आंखों का हल्का मेकअप ही करना चाहिए।


सुप्रसिद्व नेत्र विशेषज्ञ डा. नीरा अग्रवाल का कहना है कि आंखों की सुंदरता  बढ़ाने के लिए नेत्र सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल तो किया जा सकता है लेकिन इसमें कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी है। जैसे- आंख के मेकअप के लिए साफ ब्रश का इस्तेमाल करें तथा अगर हाथ से मेकअप करना है तो मेकअप से पहले हाथ अच्छी तरह साफ कर लें। गंदें हाथों से काजल वगैरह लगाने से आंखों में संक्रमण हो सकता है। आई लाइनर हमेशा आंख से बाहर पलकों के बरौनियों पर लगाना चाहिए। कुछ महिलाओं को  नेत्र प्रसाधनों से एलर्जी होती है। नेत्र प्रसाधनों का इस्तेमाल करते ही उनकी आंखें लाल हो जाती है, आंखों में जलन होने लगती है और आंखों से पानी आने लगता है। ऐसी महिलाओं को नेत्र श्रृंगार से बचना चाहिए। नेत्र प्रसाधनों का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि वे रात को सोने से पहले आंखों का श्रृंगार अवश्य साफ कर लें।


नेत्र प्रसाधन हमेशा अच्छी कंपनी का और अच्छे दुकान से ही खरीदना चाहिए। मस्कारा को हर तीने महीने पर बदल देना चाहिए। एक ही मस्कारा का अधिक दिनों तक इस्तेमाल करने से आंखों में संक्रमण हो सकता है। डा. नीरा अग्रवाल का कहना है कि कांटैक्ट लेंस का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं को कुछ खास          सावधानियां बरतनी जरूरी है। उन्हें मस्कारा और काजल का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अगर उन्हें कभी मस्कारा लगाने की आवश्यकता महसूस हो तो वे पानी में घुलने वाले मस्कारा ही लगाएं। कांटैक्ट लेंस पहनने वाली महिलाओं को इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि वे नेत्र श्रृंगार करने से पहले ही लेंस पहन लें और श्रृंगार साफ करने से पहले लेंस को उतार लें वरना सौंदर्य प्रसाधन लेंस से चिपक सकते हैं और आंखों में संक्रमण हो सकता है।


            आंखों को सुंदर बनाने के लिए कुछ टिप्स



  1. रात को सोने से पहले आंखों का मेकअप उतार लें और आंखों को अच्छी तरह से ठंडे पानी से धोएं। सुबह उठकर भी आंखों को ठंडे पानी के छींटे देकर अच्छी तरह से धोएं।

  2. सप्ताह में एक या दो बार आंखों को आई लोशन, त्रिफला या गुलाब जल से साफ करें। इनसे आंखों में पड़ी धूल, मिट्टी व कीटाणु तो साफ होंगे ही, साथ ही आंखों की चमक भी बढ़ेगी।

  3. आंखें बहुत बोझिल और थकी-थकी लगे तो रूई को गुलाब जल में डुबोकर आंखों पर रखें। इससे उन्हें ठंडक और ताजगी मिलती है।

  4. आंखों को धूप, खराब धुआं, विषाक्त गैस और तेज रोशनी से बचाएं। ऐसे स्थान पर ज्यादा देर तक न ठहरें। टी.वी. दूर से ही बैठकर देखें। यदि आंखों में जलन हो तो उन्हें गुलाब जल से धो लें।

  5. देर रात तक जागने और सूर्योदय के बाद तक सोते रहने का आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। उनमें तीखापन एवं सूनापन उत्पन्न होने लगता है तथा आंखों का रसीलापन व सौम्य रूप गायब होने लगता है।

  6. लगातार काम न करें। बीच-बीच में आंखों को बंद करके उन पर दोनों हाथों की हथेलियां रखकर कुछ मिनट विश्राम देते रहें।

  7. खीरे के गोल टुकड़े काट कर आंखों पर रखें एवं आराम से लेट जाएं। कुछ ही देर में आंखों की थकान कम महसूस होगी।

  8. कच्चे आलू के रस में रुई भिगोकर लगाने से आंखों के नीचे का कालापन दूर हो जाता है।

  9. चेहरे पर मालिश करते समय या क्रीम लगाते समय आंखों के पास धीरे-धीरे थपथपाना चाहिए।

  10. प्रातः काल हरी घास पर नंगे पांव चलना व हरियाली देखना आंखों को बहुत आराम पहुंचाता है।

  11. रोज सुबह खाने से पूर्व नींबू शरबत पीएं क्योंकि नींबू में विटामिन 'सी' होता है। आंवला, संतरा, अमरुद आदि विटामिन 'सी' के अच्छे स्रोत हैं। इनका पर्याप्त मात्रा में सेवन करें।


No comments:

Post a Comment