Monday, 16 November 2020

मधुमेह रोगी कर सकते हैं आस्टियोपोरोसिस से अपना बचाव

डायबिटीज से पीड़ित लोगों (पीपल विद डायबिटीज - पीडब्ल्यूडी) को नियमित व्यायाम करने, हड्डी को स्वस्थ रखने वाले आहार का सेवन करने और गलत जीवनशैली की आदतों से बचने के लिए जल्द कदम उठाने की जरूरत होती है। उन्हें समय-समय पर अपनी आंखों, गुर्दे, दिल और पैरों की जांच करवाने की जरूरत होती है। यदि उनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है, तो इस सूची में हड्डी घनत्व परीक्षण (बोन डेंसिटी टेस्ट) को भी शामिल करना चाहिए।


आस्टियोपोरोसिस और मधुमेह के बीच संबंध पर बात करते हुए, मैक्स हेल्थकेयर, नई दिल्ली के एंडोक्रिनोलाजी एंड डायबिटीज के अध्यक्ष डा. अंबरीश मितल ने कहा, ‘‘आस्टियोपोरोसिस मधुमेह से जुड़ी की एक ऐसी जटिलता है जिसे कमतर आका जाता है। मधुमेह से पीड़ित लोगों को आस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर होने का खतरा अधिक होता है। और यह खतरा उम्र के साथ बढ़ता जाता है। यह मधुमेह की अवधि से भी संबंधित होता है। मधुमेह होने के लगभग पांच साल बाद इसके जोखिम बढ़ने लगते हैं। 50 वर्ष से अधिक आयु होने के बाद मधुमेह के मरीज को अस्थि घनत्व परीक्षण करवाना चाहिए। लेकिन यहां ध्यान देना चाहिए कि टाइप 2 मधुमेह से ग्रस्त मरीजों में हड्डियों का घनत्व थोड़ा अधिक होता है। जिन लोगों को मधुमेह नहीं हैं उनकी तुलना में मधुमेह के मरीजों में बेहतर अस्थि घनत्व होने पर भी फ्रैक्चर होता है। यदि आपका अस्थि घनत्व कम है और आपको ओस्टियोपोरोसिस है, तो आपके मधुमेह रोधी दवाओं के विकल्प में बदलाव लाना पड़ सकता है, इसलिए आप अपने चिकित्सक से परामर्श करें।’’


मधुमेह और अस्थि घनत्व के बारे में दूसरा मुद्दा विटामिन डी को लेकर है, जो बोन हेल्थ का अभिन्न अंग है। डा. मितल ने कहा, ‘‘अगर हमारे शरीर में पर्याप्त विटामिन डी है तो अपनी आंत के माध्यम से कैल्शियम को अच्छी तरह से अवशोषित करते हैं और हमें सूर्य से विटामिन डी मिलता है। लेकिन जैसा कि हम जानते हैं, हम में से कई लोग धूप में नहीं निकलते हैं, खासकर शहरी भारतीय। विटामिन डी का सबसे अच्छा निर्माण सुबह 11 से दोपहर 3 बजे के बीच होता है। यही नहीं, जब हम घर के बाहर निकलते हैं तो पोशाक से पूरी तरह से ढके रहते हैं। यहीं नहीं कई लोग सन स्क्रीन का भी इस्तेमाल करते हैं और इससे विटामिन डी का उत्पादन बाधित होता है।’’


उन्होंने कहा, ‘‘सबसे महत्वपूर्ण यह कि, इन दिनों बढ़ता प्रदूषण स्तर सूर्य की किरणों को हमारी त्वचा तक पहुँचने से रोकता है। इसलिए यदि हम बाहर जाते हैं, तो भी हम अपनेे शरीर में पर्याप्त विटामिन डी नहीं बनाते हैं। यदि आपको मधुमेह है और आस्टियोपोरोसिस होने का खतरा है, तो आपको पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी का सेवन सुनिश्चित करना चाहिए, खासकर अगर आप धूप में बाहर नहीं जाते हैं तब, खासकर सर्दियों के दौरान। विटामिन डी की खुराक प्रति दिन 1,000 से 2000 आईयू लेना महत्वपूर्ण है। हालांकि, विटामिन डी की अधिकता से भी बचा जाना चाहिए।’’


कुछ उपयोगी सुझाव :



  • पोषण - पर्याप्त कैल्शियम (प्रति दिन 800 से 1000 मिलीग्राम) लें, जो अक्सर भारतीय आहार में से गायब होता है। कैल्शियम का औसत सेवन 400-450 मिलीग्राम है, जबकि हड्डियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और मधुमेह के लिए हमें प्रति दिन 800 या 1000 मिलीग्राम कैल्शियम की आवश्यकता होती है। कैल्शियम के संदर्भ में आईसीएमआर की सिफारिश यह है कि हमें रोजाना कम से कम 600 मिलीग्राम कैल्शियम लेना चाहिए। यदि आप दूध और दूध उत्पादों को पचा नहीं पाते तो आपको कैल्शियम सप्लीमेंट्स लेने चाहिए।

  • नियमित व्यायाम - हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए रोजाना शारीरिक गतिविधियों में सक्रिय रहें।

  • स्वस्थ जीवन शैली - स्वस्थ और सक्रिय जीवन शैली अपनाएं। धूम्रपान छोड़ें और शराब का सेवन सीमित रखें।

  • नियमित परीक्षण - मधुमेह पर नियंत्रण रखने के लिए नियमित अंतराल पर अस्थि घनत्व और रक्त शर्करा की जांच करएं।


Wednesday, 11 November 2020

डायबिटीज हालांकि कोविड–19 से ग्रस्त होने के खतरे को नहीं बढाता है लेकिन मधुमेह रोगियों को जाननी चाहिए ये बातें

इस समय जारी कोविड -19 महामारी के दौरान डायबिटीज से पीडित लोगों के लिए कोविड–19 को लेकर जो मुख्य चुनौती है वह यह है कि मधुमेह रोगियों को हालांकि कोविड होने का खतरा अन्य लोगों के समान ही होता है लेकिन अगर यह बीमारी उन्हें हो गई तो उनके लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं। भारत में, लगभग 70 मिलियन व्यक्ति मधुमेह के साथ जी रहे हैं, जिससे हम दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी मधुमेह आबादी वाला देश हैं। 


डॉ यादव ने कहा, ʺलोगों में यह गलत धारणा है कि डायबिटीज (टाइप 1 और टाइप 2) से पीड़ित लोगों में कोविड संक्रमण का खतरा अधिक होता है। जबकि वास्तविकता यह है कि डायबिटीज से पीडित लोगों को सामान्य आबादी की तुलना में कोरोनावायरस संक्रमण होने की अधिक संभावना नहीं होती है। हालांकि मधुमेह से पीडित लोगों में मधुमेह रहित लोगों की तुलना में गंभीर जटिलताएं और मृत्यु दर अधिक है - और हम मानते हैं कि किसी भी व्यक्ति को जितनी अधिक स्वास्थ्य समस्याएं (उदाहरण के लिए, मधुमेह, हृदय या गुर्दे की बीमारी) होती है, किसी भी वायरस के संपर्क में आने पर जटिलताएं होने की संभावना भी उतनी ही अधिक होती है। वृद्ध लोगों को भी अधिक जोखिम रहता है। ”


डॉ यादव ने कहा, “सामान्य तौर पर, मधुमेह से पीडित लोगों में वायरस से संक्रमित होने पर गंभीर लक्षण और जटिलताएं होती हैं। मधुमेह को अच्छी तरह से नियंत्रित नहीं रखने वाले लोगों में कोरोनोवायरस संक्रमण के कारण मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। जब मधुमेह से पीडित लोग अपने मधुमेह को अच्छी तरह से प्रबंधित नहीं करते हैं और उनके रक्त शर्करा में उतार-चढ़ाव होता है, तो उन्हें आम तौर पर  मधुमेह संबंधी कई जटिलताओं के होने का खतरा होता है। मधुमेह के अलावा हृदय रोग या अन्य जटिलताएं होने से कोरोनावायरस संक्रमण से गंभीर रूप से बीमार होने की संभावना बढ़ सकती है, क्योंकि ऐसे मामलों में शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। ”


डॉ योगेश यादव ने कहा, “बहुत से मरीज़ मुझसे पूछते हैं कि क्या कोविड संक्रमण के कारण मधुमेह हो सकता है, जिसके बारे में मुझे यह कहना है कि कोरोनावायरस संक्रमण और मधुमेह के बीच संबंध दोतरफा है। एक ओर, मधुमेह गंभीर कोरोनावायरस संक्रमण के खतरे को बढाता है।  दूसरी ओर, कोरोनोवायरस संक्रमण वाले रोगियों में मधुमेह की शुरुआत होने और डायबिटिक कीटोएसिडोसिस और हाइपरोस्मोलेरिटी सहित पहले से मौजूद मधुमेह के गंभीर जटिलताओं को देखा गया है। इन स्थितियों में उपचार के लिए इंसुलिन की असाधारण रूप से उच्च खुराक की आवश्यकता होती है। गंभीर कोरोनोवायरस संक्रमण होने पर अचानक शुरू हुए ग्लूकोज चयापचय में परिवर्तन कोविड संक्रमण के ठीक होने बाद जारी रहने या कम होने के बारे में भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। "


यदि आपको मधुमेह है तो आपको क्या करना चाहिए?



  • अपने शुगर के स्तर की नियमित जाँच करें कि वे सामान्य सीमा में हैं या नहीं।

  • अपनी क्षमता के अनुसार नियमित व्यायाम करें। आप योग, प्राणायाम, स्ट्रेचिंग व्यायाम जैसे व्यायाम घर पर भी कर सकते हैं ।

  • अपने आहार और वजन पर नज़र रखें। वजन में वृद्धि होने पर शुगर के स्तर में वृद्धि हो सकती है।