मधुमेह रोगी कर सकते हैं आस्टियोपोरोसिस से अपना बचाव

डायबिटीज से पीड़ित लोगों (पीपल विद डायबिटीज - पीडब्ल्यूडी) को नियमित व्यायाम करने, हड्डी को स्वस्थ रखने वाले आहार का सेवन करने और गलत जीवनशैली की आदतों से बचने के लिए जल्द कदम उठाने की जरूरत होती है। उन्हें समय-समय पर अपनी आंखों, गुर्दे, दिल और पैरों की जांच करवाने की जरूरत होती है। यदि उनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है, तो इस सूची में हड्डी घनत्व परीक्षण (बोन डेंसिटी टेस्ट) को भी शामिल करना चाहिए।


आस्टियोपोरोसिस और मधुमेह के बीच संबंध पर बात करते हुए, मैक्स हेल्थकेयर, नई दिल्ली के एंडोक्रिनोलाजी एंड डायबिटीज के अध्यक्ष डा. अंबरीश मितल ने कहा, ‘‘आस्टियोपोरोसिस मधुमेह से जुड़ी की एक ऐसी जटिलता है जिसे कमतर आका जाता है। मधुमेह से पीड़ित लोगों को आस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर होने का खतरा अधिक होता है। और यह खतरा उम्र के साथ बढ़ता जाता है। यह मधुमेह की अवधि से भी संबंधित होता है। मधुमेह होने के लगभग पांच साल बाद इसके जोखिम बढ़ने लगते हैं। 50 वर्ष से अधिक आयु होने के बाद मधुमेह के मरीज को अस्थि घनत्व परीक्षण करवाना चाहिए। लेकिन यहां ध्यान देना चाहिए कि टाइप 2 मधुमेह से ग्रस्त मरीजों में हड्डियों का घनत्व थोड़ा अधिक होता है। जिन लोगों को मधुमेह नहीं हैं उनकी तुलना में मधुमेह के मरीजों में बेहतर अस्थि घनत्व होने पर भी फ्रैक्चर होता है। यदि आपका अस्थि घनत्व कम है और आपको ओस्टियोपोरोसिस है, तो आपके मधुमेह रोधी दवाओं के विकल्प में बदलाव लाना पड़ सकता है, इसलिए आप अपने चिकित्सक से परामर्श करें।’’


मधुमेह और अस्थि घनत्व के बारे में दूसरा मुद्दा विटामिन डी को लेकर है, जो बोन हेल्थ का अभिन्न अंग है। डा. मितल ने कहा, ‘‘अगर हमारे शरीर में पर्याप्त विटामिन डी है तो अपनी आंत के माध्यम से कैल्शियम को अच्छी तरह से अवशोषित करते हैं और हमें सूर्य से विटामिन डी मिलता है। लेकिन जैसा कि हम जानते हैं, हम में से कई लोग धूप में नहीं निकलते हैं, खासकर शहरी भारतीय। विटामिन डी का सबसे अच्छा निर्माण सुबह 11 से दोपहर 3 बजे के बीच होता है। यही नहीं, जब हम घर के बाहर निकलते हैं तो पोशाक से पूरी तरह से ढके रहते हैं। यहीं नहीं कई लोग सन स्क्रीन का भी इस्तेमाल करते हैं और इससे विटामिन डी का उत्पादन बाधित होता है।’’


उन्होंने कहा, ‘‘सबसे महत्वपूर्ण यह कि, इन दिनों बढ़ता प्रदूषण स्तर सूर्य की किरणों को हमारी त्वचा तक पहुँचने से रोकता है। इसलिए यदि हम बाहर जाते हैं, तो भी हम अपनेे शरीर में पर्याप्त विटामिन डी नहीं बनाते हैं। यदि आपको मधुमेह है और आस्टियोपोरोसिस होने का खतरा है, तो आपको पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी का सेवन सुनिश्चित करना चाहिए, खासकर अगर आप धूप में बाहर नहीं जाते हैं तब, खासकर सर्दियों के दौरान। विटामिन डी की खुराक प्रति दिन 1,000 से 2000 आईयू लेना महत्वपूर्ण है। हालांकि, विटामिन डी की अधिकता से भी बचा जाना चाहिए।’’


कुछ उपयोगी सुझाव :



  • पोषण - पर्याप्त कैल्शियम (प्रति दिन 800 से 1000 मिलीग्राम) लें, जो अक्सर भारतीय आहार में से गायब होता है। कैल्शियम का औसत सेवन 400-450 मिलीग्राम है, जबकि हड्डियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और मधुमेह के लिए हमें प्रति दिन 800 या 1000 मिलीग्राम कैल्शियम की आवश्यकता होती है। कैल्शियम के संदर्भ में आईसीएमआर की सिफारिश यह है कि हमें रोजाना कम से कम 600 मिलीग्राम कैल्शियम लेना चाहिए। यदि आप दूध और दूध उत्पादों को पचा नहीं पाते तो आपको कैल्शियम सप्लीमेंट्स लेने चाहिए।

  • नियमित व्यायाम - हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए रोजाना शारीरिक गतिविधियों में सक्रिय रहें।

  • स्वस्थ जीवन शैली - स्वस्थ और सक्रिय जीवन शैली अपनाएं। धूम्रपान छोड़ें और शराब का सेवन सीमित रखें।

  • नियमित परीक्षण - मधुमेह पर नियंत्रण रखने के लिए नियमित अंतराल पर अस्थि घनत्व और रक्त शर्करा की जांच करएं।


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