Thursday, 24 June 2021

डॉ अग्रवाल ग्रुप ऑफ आई हॉस्पिटल के कार्यकारी निदेशक डॉ अश्विन अग्रवाल से ब्लैक फंगस के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी

 

ब्लैक फंगस : क्यों है ज्यादा खतरनाक?

कोविड के मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और कोविड के काफी मरीजों में हाइपरइम्यून प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए उन्हें स्टेरॉयड दिया जाता है। ये कारक कोविड रोगियों को म्यूकोर्मिकोसिस जैसे फंगल संक्रमण के लिए अतिसंवेदनशील बनाते हैं। ब्लैक फंगस के नाम से जाना जाने वाला यह संक्रमण त्वचा, फेफड़े, आंख, मुंह और मस्तिष्क को प्रभावित करता है। किसी व्यक्ति में यह संक्रमण होने पर, ये फंगस साइनस की ओर बढ़ते हैं। कुछ मामलों में ये साइनस से आंख के आसपास या कुछ मामलों में आंखों में फैल सकते हैं।

म्यूकोर्मिकोसिस का इलाज क्या है?

म्यूकोर्मिकोसिस संक्रमण जब आंखों को प्रभावित करता है‚ तो ऐसे मामले में, इसका इलाज दवाओं या सर्जरी से किया जा सकता है। समय पर या शीघ्र निदान और इलाज से आंखों को और दृष्टि को बचाया जा सकता है।

यह शरीर पर कैसे हमला करता है?

इसके स्पोर नेजल कैविटी में प्रवेश करते हैं। जब रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है तो फंगस तेजी से बढ़ता है और साइनस, ऑर्बिट और ब्रेन को प्रभावित करता है।

दवाएं / उपचार

दिखाई देने में समस्या होने पर किसी को डरना नहीं चाहिए। यहां तक कि दिखाई नहीं देने पर भी, यदि रोगी समय पर नेत्र रोग विशेषज्ञों के पास पहुँच जाते हैं तो चिकित्सक के द्वारा जल्द से जल्द उचित उपचार से दृष्टि को बहुत अच्छी तरह से बचाया जा सकता है।

आंखों को प्रभावित करने वाले म्यूकोर्मिकोसिस संक्रमण के मामले में, इसका इलाज या तो दवाओं से (एंटीफंगल एम्पोटेरिसिन बी) या सर्जरी से किया जा सकता है। फिर भी समय पर या शीघ्र निदान से हमेशा आंख और दृष्टि को बचाया जा सकता है।

कोविड के इलाज में गलतियां किस प्रकार हमें नई महामारी की ओर ले जा रही है?

कोविड रोगियों को स्टेरॉयड और इम्यूनोमॉड्यूलेटिंग दवाओं के उपयोग से बचना चाहिए या इनका इस्तेमाल कम करना चाहिए। जब तक यह बहुत जरूरी नहीं हों, इनका इस्तेमाल करने से बचना चाहिए और इनकी खुराक, समय और अवधि को ध्यान में रखते हुए ऐसी दवाओं का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए। स्टेरॉयड दोधारी तलवार हैं। जब इनका सावधानी से उपयोग किया जाता है तो वे जीवन रक्षक होते हैं और यदि नहीं तो वे नुकसान पहुंचा सकते हैं।

जब रोगी दवा के रूप में स्टेरॉयड ले रहा होते हैं तो उनका रक्त शर्करा बढ़ सकता है, इसलिए रक्त शर्करा पर सख्त नियंत्रण रखना जरूरी है, साथ ही रक्त शर्करा की नियमित जांच कराना भी जरूरी है।



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