Thursday, 24 October 2019

कौन—कौन बनेंगे 'फरिश्ते दिल्ली के'

दुर्घटना के शिकार लोगों को शीघ्र पहुंचाएं अस्पताल : अर​विन्द केजरीवाल
नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के लोगों से दुर्घटना के शिकार लोगों की मदद करने और उन्हें अस्पताल पहुंचाने का अनुरोध किया। केजरीवाल दुर्घटना के शिकार हुए लोगा. को अस्पताल ले जाने के लिए मदद करने वालों को पुरस्कृत करने के वास्ते सरकार की एक पहल 'फरिश्ते दिल्ली' के औपचारिक शुभारंभ के दौरान संबोधित कर रहे थे। इस दौरान कई फरिश्ते को मुख्यमंत्री ने सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया। इस दौरान उन तीन लोगों ने अपनी कहानी भी बताई, जिनकी दुर्घटना के तत्काल बाद अस्पताल पहुंचाने से जान बची। फरिश्ता बने कुछ लोगों ने भी अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि दिल्ली का हर नागरिक फरिश्ता बने। आपको दुर्घटना के शिकार लोगों, झुलसने वालों और तेजाबी हमले के शिकार लोगों की मदद करनी चाहिए और उन्हें अस्पताल लेकर जाना चाहिए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर हादसे के एक घंटे के भीतर पीड़ितों को अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो उनकी जान बचायी जा सकती है। केजरीवाल ने कहा कि यह बहुत अनमोल समय होता है और अगर उस दौरान पीड़ित को अस्पताल पहुंचा दिया जाया तो उसके बचने की बहुत उम्मीद होती है। उन्होंने कहा कि हमने खबरों में पढ़ा था कि निर्भया एक घंटे तक सड़क में एटीएम गेंग सक्रिय पर पड़ी रही और किसी ने उसकी मदद नहीं की। अगर समय पर लोगों को भर्ती करा दिया जाए तो उनकी जान बचायी जा सकती है।


इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का पसंदीदा गाना ही है इंसान का इंसान से हो भाईचारा। इस तरह का गाना पसंद करने वाला व्यक्ति ही घायलों के इलाज की मुफ्त स्कीम ला सकता है। मुझे अफसोस है कि अब भी 80 फीसद लोगों को इस स्कीम की जानकारी नहीं है। जबकि दिल्ली के हर व्यक्ति को इसके बारे में पता होना चाहिए। हमारे लिए हर जान कीमती है। दिल्ली के फरिश्ते की कहानी सभी को बताया जाना चाहिए। जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग घायलों की मदद को सामने आए। सुप्रीम कोर्ट ने जब घायलों के इलाज से इन्कार पर रोक लगाई तो सबसे बड़ी समस्या यह खड़ी हुई कि अस्पताल को पैसा कौन दे। अरविंद केजरीवाल सरकार ने यह जिम्मा अपने कंधे पर लिया। घायल को दिल्ली के किसी अस्पताल में ले जाए, सारा खर्च सरकार उठाएगी। अगर घायल को पहले छोटे अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है और उसे बड़े अस्पताल ले जाना है तो एंबुलेंस का खर्च भी सरकार देगी। साथ ही अस्पताल ले जाने वाले को दो हजार रुपये दिया जाएगा। हालांकि अभी तक का अनुभव है कि लोग पैसे लेने से मना कर देते हैं। अस्पताल किसी को भर्ती करने से मना करता है तो उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। प्रारंभ में दिक्कत आ रही थी, अस्पताल संचालकों के साथ बैठक की गई। जिसके बाद यह समस्या खत्म हो गई।


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