आंखों से सुनिये और कान से देखिये

परम्परागत स्नायु विज्ञान के तहत श्रवण तंत्र का कार्य आवाज को रिकार्ड करना है जबकि दृश्य तंत्र दृश्यों पर फोकस करता है और ये दोनों कभी नहीं मिलते। इसके बावजूद मस्तिष्क के सुपीरियर कोलिकुलस जैसे ''हाइयर कोगनिटिव'' निर्माता इन अलग-अलग इनपुट्स का इस्तेमाल हमारे सिनेमैटिक अनुभवों के लिए करता है। 
बीएमसी न्यूरोसाइंस जर्नल के ताजे अंक में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि मस्तिष्क आवाज का इस्तेमाल सीधे तौर पर देखने के लिए और प्रकाश को सुनने के लिए कर सकता है। यह शोध यह व्याख्या करता है कि अंधे बेहतर क्यों सुनते हैं और बहरे की दृष्टि क्यों अच्छी होती है।
इस अध्ययन के तहत अनुसंधानकर्ताओं ने स्क्रिन पर एक लाइट फ्लैश को लोकेट करने के लिए बंदरों को प्रशिक्षित किया। जब प्रकाश बहुत तेज था तो उन्हांने इसे आसानी से पता कर लिया जबकि धीमी प्रकाश में उन्हें ढूंढने काफी समय लगा। लेकिन जब धीमा प्रकाश ने थोड़ी आवाज बनाया तो बंदरों ने इसे तुरंत ढूंढ लिया। वास्तव में यह पुराने सिद्धांतों की व्याख्या कर सकता है।
विजुअल प्रोसेसिंग की शुरुआती अवस्था के लिए जिम्मेदार 49 न्यूरॉन्स से रिकार्डिंग के तहत अनुसंधानकर्ताओं ने उत्प्रेरक को पाया जो व्यवहारों को प्रतिम्बिबित करता है। जब आवाज को घुमाया जा रहा था तब न्यूरॉन ने इस प्रकार की प्रतिक्रिया की कि वहां तेज प्रकाश है। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के अनुसंधानकर्ता ये वांग कहते हैं कि इससे यह व्याख्या होती है कि कान और आंख के मस्तिष्क क्षेत्र के बीच सीधा संबंध है।
फ्रांस के टाउलौस में यूनिवर्साइट पॉल सैबेटर के मुख्य अनुसंधानकर्ता पास्कल बैरोन कहते हैं कि यह अध्ययन पहला साक्ष्य यह पेश करता है कि एक संवेदी कोशिका एक वैकल्पिक अनुभूति को संसाधित कर सकता है।  
यह खोज व्याख्या करता है कि मनुष्य सहित अधिकतर जानवर उत्तेजित होने पर आश्चर्यजनक रूप से तत्काल प्रतिक्रिया करते हैं जिस तरह से रस्टलिंग टाइगर या हांकिंग बुस करते हैं। 
बैरोन कहते हैं कि दृश्य क्षेत्र के विशेषकर कोनों में जहां दृष्टि खराब होती है कान धीमेपन का निवारण करता है और दृश्य तंत्र को उत्तेजित करता है। वांग कहते हैं कि शुरुआती दृश्य तंत्र का स्थानीक परिशुद्धता का अतिरिक्त लाभ यह है कि मस्तिष्क के कुछ उंचे क्षेत्र हमारे सेंट्रल गेज को प्राथमिकता देने के लिहाज से खराब काम करते हैं। 
हमारे इमेज प्रोसेसर को सीधे साउंड इनपुट्स भेजकर श्रव्य तंत्र समय-संवेदनशील सूचना के साथ टेलीफोन से बात करने बच सकता है।  
यह खोज गड़बड़ स्थिति सिनेस्थेसिया का अनुभव करने वाले वैसे कुछ लोग जो रंगों को महसूस कर सकते हैं, सुन सकते है और टेस्ट कर सकते हैं, से असंबद्ध है। उदाहरण के लिए अधिक जटिल अभिव्यक्ति ब्रेन प्रोसेसिंग के बाद की अवस्था को संघटित करता है ताकि एक रंग, एक अक्षर या एक आकार के शामिल होना एक निश्चित नोट के प्रत्यक्ष बोध को स्वतः ही बढ़ा सकता है।
बैरोन को इस नयी खोज में सबसे अधिक उत्तेजित  संवेदी क्षेत्रों में ''कॉर्टिकल प्लास्टिसिटी'' के लिए संभावना करता है। उदाहरण के लिए परिभाषा के अनुसार अंधा देखने के लिए दृश्य तंत्र का इस्तेमाल नहीं करता है। लेकिन यह अनुसंधान उसे सुनने के लिए उसे इस्तेमाल करने की सलाह देता है। यह इसकी व्याख्या कर सकता है कि अंधे लोग किस तरह सुनने के ऐसे विकसित कौशल को विकसित कर सकते हैं और इसी तरह बहरे अक्सर क्यों अच्छी दृष्टि से युक्त होते हैं।   


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