Wednesday, 6 November 2019

धरती की बढ़ती गर्मी बढ़ा रही है किडनी में पथरी 

वैज्ञानिकों ने धरती के तापमान में हो रही बढ़ोतरी ( ग्लोबल वार्मिंग)के कारण किडनी की पथरी की समस्या में वृद्धि होने की आषंका जतायी है। यू टी साउथ वेस्टर्न मेडिकल सेंटर और यू टी डलास के अनुसंधानकर्ताओं ने हाल में किये गए अध्ययन के आधार पर निश्कर्श निकाला है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण किडनी में पथरी की समस्या में तेजी से वृद्धि होगी खास कर कुछ विशेष क्षेत्रों में इस समस्या में तेजी से वृद्धि होने का अनुमान है। इन क्षेत्रों को ''किडनी स्टोन बेल्ट'' का नाम दिया गया है। 
अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार किडनी में पथरी का एक मुख्य कारण डिहाइड्रेशन है और ग्लोबल वार्मिंग डिहाइड्रेशन की समस्या में और वृद्धि करेगा। 
अनुसंधानकर्ताओं ने यह अनुमान लगाया है कि अधिक तापमान के कारण सन् 2050 तक 16 लाख से 22 लाख अतिरिक्त लोगों में किडनी की पथरी की समस्या होगी। कुछ क्षेत्रों में किडनी की पथरी के मामलों में 30 प्रतिशत तक की वृद्धि होने का अनुमान है।
यू टी साउथ वेस्टर्न मेडिकल सेंटर के यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और इस अध्ययन के प्रमुख  डा. माग्रेट पीयर्ले के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग का मनुष्य पर पड़ने वाले चिकित्सीय प्रभाव पर किया गया यह पहला अध्ययन है।  इस अध्ययन को नेशनल अकेडमी ऑफ साइंसेज के ताजा अंक में प्रकाशित किया गया है।
एसोसिएषन आफ सर्जन्स आफ इंडिया के अध्यक्ष डा. एन के पाण्डे के अनुसार किडनी में पथरी की बीमारी या नेफ्रोलाइथियेसिस एक सामान्य बीमारी है। किडनी में पथरी ठोस क्रिस्टल होते हैं और मूत्र में घुलनशील लवण से बनते है। ये पर्यावरण और मेटाबोलिक समस्याओं के कारण बनते हैं। कम मात्रा में तरल पदार्थों के सेवन या डिहाइड्रेशन के कारण शरीर से अधिक मात्रा में तरल के निकलने के कारण पेशाब का बनना कम हो जाता है जिससे पथरी का निर्माण करने वाले नमक का सांद्रण बढ़ जाता है और इस कारण पथरी बनने का खतरा बढ़ जाता है। 
अमरीका के अपेक्षाकृत गर्म क्षेत्रों में किडनी की पथरी अधिक सामान्य है। साउथइस्ट ''किडनी स्टोन बेल्ट'' के नाम से जाना जाता है क्योंकि अल्बामा, अरकनास, फ्लोरिडा, जार्जिया, लुइसियाना, मिसिसिपी, नार्थ कैरोलिना, साउथ कैरोलिना और टेनेसी में रहने वाले लागों में किडनी की पथरी की समस्या अधिक है। 
वातावरण में आ रहे बदलाव के कारण विश्व के अन्य ''किडनी स्टोन बेल्ट'' में भी किडनी में पथरी की समस्या में वृद्धि होने का अनुमान है। डा. पियर्ले और उनके सहयोगी अब अन्य अध्ययनों के जरिये वातारण के तापमान और पेशाब की मात्रा में संबंध का अघ्ययन करेंगे।


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