Friday, 8 November 2019

गर्भवती महिलाओं का आहार

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को न केवल अपने लिये बल्कि कोख में पल रहे बच्चे के लिये भी भोजन करना पड़ता है। अगर गर्भवती महिला पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार ग्रहण नहीं करे तब उसके शरीर में जमा पौष्टिक तत्वों का भंडार समाप्त होता जायेगा और इस कारण गर्भवती महिला के साथ-साथ बच्चे को रक्त अल्पता, हड्डियों में कमजोरी, टांगों में टेढ़ापन और विटामिन ए तथा बी की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गर्भावस्था के दौरान महिला को कैलोरी, प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन, खनिज एवं लौह तत्व की अतिरिक्त जरुरत पड़ती है।


गर्भावस्था के दौरान अतिरिक्त मात्रा में लिये जाने वाले पौष्टिक तत्वों का विवरण इस प्रकार हैः-


ऊर्जा - गर्भावस्था के पूर्वार्द्ध में कैलोरी की अतिरिक्त जरुरत कम होती है, लेकिन गर्भावस्था के उत्तरार्ध में रोजाना 300 कैलोरी की अतिरिक्त जरुरत होती है। गर्भावस्था के दौरान काम-काज नहीं करने वाली महिलाओं को काम-काज में पूरी तरह सक्रिय रहने वाली महिलाओं की तुलना में कम कैलोरी की जरुरत होती है। गर्भावस्था में शरीर का वजन बहुत तेजी से बढ़ने पर ली जाने वाली कैलोरी की मात्रा सीमित करनी चाहिये। गर्भावस्था के दौरान किसी गर्भवती महिला के शारीरिक वजन में सामान्य वृद्धि प्रसव के समय तक दस से पन्द्रह किलोग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिये। शारीरिक वजन में वृद्धि गर्भ में बढ़ रहे भ्रूण, गर्भाशय, एमनियोटिक तरल, रक्त और स्तन आदि के कारण होती है। गर्भावस्था के दौरान वजन में सामान्य दर से वृद्धि नहीं होना समय से पूर्व कम वजन के बच्चे के जन्म का कारण बन सकता है। दूसरी तरफ गर्भावस्था के आरंभ में शरीर का अधिक वजन होने तथा गर्भावस्था की दूसरी एवं तीसरी तिमाही में बहुत अधिक वजन वृद्धि से कई तरह की जटिलतायें पैदा हो सकती हैं।


प्रोटीन - गर्भवती महिला को गर्भ में पल-बढ़ रहे भ्रूण के विकास के लिये पर्याप्त प्रोटीन लेना आवश्यक है। गर्भावस्था के दौरान रोजाना 60 से 70 ग्राम प्रोटीन ग्रहण करना चाहिये। इस दौरान दाल, दूध से बने खाद्य पदार्थों, अंडे, बादाम, मूंगफली और चीज जैसे प्रोटीन से भरपूर पदार्थों का सेवन करना चाहिये।


लौह तत्व - गर्भवती महिला को रोजाना 30 ग्राम लौह तत्व लेनी चाहिये। लौह तत्व बच्चे के शरीर में रक्त एवं अस्थिमज्जा के निर्माण के लिये जरुरी है इसलिये गर्भवती महिला के शरीर में लौह तत्वों का एक बड़ा भंडार होना चाहिये। हरी पत्तेदार सब्जियों, किशमिश, मक्के, मड़वा, चना और सोयाबीन लौह तत्वों से युक्त होते हैं और गर्भावस्था में इन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिये। पैदा होने पर बच्चे के शरीर में लौह तत्व बड़ी मात्रा में जमा होना चाहिये क्योंकि जन्म के बाद बच्चा मां के जिस दूध पर महीनों तक आश्रित होता है उसमें लौह तत्वों की पर्याप्त मात्रा मौजूद नहीं होती। लोहे की कमी के कारण अपने देश में बहुत से बच्चों को रक्त अल्पता हो जाती है। गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान लौह तत्वों से भरपूर आहार लेने के अलावा लौह तत्वों की कमी की पूर्ति के लिये लौह औषधियां भी ग्रहण करनी चाहिये।


कैल्शियम - गर्भवती महिला के साथ-साथ दूध पिलाने वाली माता को अधिक कैल्शियम की जरुरत होती है। गर्भस्थ शिशु की हड्डियों एवं दातों के निर्माण के लिये गर्भावस्था के दौरान एक ग्राम कैल्शियम की तथा दूध पिलाने के दौरान दो ग्राम कैल्शियम की अधिक जरुरत होती है। इसके अलावा गर्भवती एवं दूध पिलाने वाली माताओं को विटामिन डी की अधिक मात्रा की जरुरत होती है। इन सब पोषक तत्वों की पूर्ति के लिये, दूध एवं दुग्ध उत्पादों, दाल, सोयाबीन, मुर्गी, मछली, मडुवा, हरी पत्तेदार सब्जी जैसे कैल्शियम से परिपूर्ण आहार लेने चाहिये।


विटामिन एवं खनिज - गर्भ मंे पलते भ्रूण की अधिक पोषक तत्वों की जरुरतों के लिये गर्भवती महिला को फल, रोटी, दाल एवं हरी सब्जियों का अधिक सेवन करना चाहिये ताकि उन्हें अधिक विटामिन एवं खनिज मिल सकें। गर्भावस्था के दौरान फॉलिक एसिड और विटामिन बी विशेष रुप से आवश्यक हैं। इन्हें प्राप्त करने के लिये प्राकृतिक भोजन की बजाय औषधियों का सहारा लेना अधिक उपयुक्त है। गर्भावस्था के दौरान बी ग्रुप के थायमीन, रिबोलेविन और नियासिन जैसे विटामिनों की अतिरिक्त आवश्यकता होती है। इन्हें प्राप्त करने के लिये हरी पत्तेदार सब्जियांे, मूंगफली और दाल का उपयोग करना चाहिये।


रेशे - गर्भवती महिला जो भी आहार लें रेशेदार हो ताकि कब्ज से बचाव हो सके एवं पाचन शक्ति बढ़ सके।    


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