Saturday, 2 November 2019

महिला ने फाइब्रॉएड निकाले जाने के बाद बच्चे को जन्म दिया

दिल्ली की एक महिला ने लैपरोस्कोपी सर्जरी के जरिये 1.4 किलोग्राम के फाइब्रॉएड को निकाले जाने के बाद हाल ही में गर्भ धारण कर एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है। इससे गर्भाशय के फाइब्रॉएड से पीड़ित कई महिलाओं में उम्मीद पैदा हो सकती है। 
श्रीमती रेखा दीक्षित (बदला हुआ नाम) की तीन साल पहले शादी हुई थी, लेकिन वह गर्भ धारण नहीं कर पा रही थीं। जांच में उनके गर्भाशय में बड़े फाइब्रॉएड पाये गये। उन्होंने कैलाश कॉलोनी स्थित नोवा स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स में फाइब्रॉएड को निकलवाने के लिए लैपरोस्कोपी सर्जरी करायी और एक सप्ताह के अंदर वह अपने काम पर वापस आ गयीं। कई फाइब्रॉएड से पीड़ित किसी महिला को लैपरोस्कोपी से फाइब्रॉएड को निकलवाने पर उसके गर्भाशय को निकालने की जरूरत नहीं पड़ती है। 
श्रीमती दीक्षित ने जनवरी 2014 में गर्भ धारण किया और वह चेकअप के लिए नियमित रूप से हॉस्पिटल आती रहीं। उन्हें पूर्व नियोजित योजना के तहत 6 अक्टूबर, 2014 को सी-सेक्शन के लिए हॉस्पिटल में भर्ती किया गया और उन्होंने एक स्वस्थ लड़की को जन्म दिया। 
इस सर्जरी को अंजाम देने वाली कैलाश कॉलोनी स्थित नोवा स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स में स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. शीतल अग्रवाल ने कहा, ''स्बच्चे पैदा करने की उम्र के दौरान हर चार में से एक महिला को फाइब्रॉएड होता है। गर्भाशय के फाइब्रॉएड से पीड़ित महिलाएं मातृत्व का आनंद प्राप्त करने में असमर्थ होती हैं। फाइब्रॉएड गर्भाशय की दीवार में नॉन-कैंसरस वृद्धि होती है। प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुई प्रगति की बदौलत, यहां तक कि बहुत बड़े फाइब्रॉएड को भी लैपरोस्कोपी से निकाला जा सकता है और रोगी की तेजी से रिकवरी होती है और उसके गर्भाधान की दर भी बढ़ जाती है।'' 
मरीज ने कहा, ''फाइब्रॉएड के कारण तेज दर्द और रक्तस्राव के कारण मैं बहुत चिंतित रहती थी। लेकिन जब मैंने पहली बार बच्चे को गोद लिया तो मेरा दर्द और मेरी चिंता खत्म हो गयी।''
फाइब्रॉएड से पीड़ित महिलाओं में आम तौर पर भारी, लंबे समय तक और अनियमित रक्तस्राव होता है। उनके पैल्विक में तेज दर्द होता है और मूत्राशय पर दबाव जैसे लक्षण हो सकते हैं। उन्हें यौन संबंध के दौरान भी तेज दर्द हो सकता है। 
इसका इलाज आमतौर पर उम्र को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। युवा, बच्चे पैदा करने में असमर्थ रोगियों की लैप मायोमेक्टमी की जाती है जबकि अधिक उम्र की महिलाओं में जिन्होंने अपने परिवार पूरे कर लिये हैं, उनकी लैप हिस्टरेक्टमी की जा सकती है। लेकिन अगर वह चाहें तो उनके अंडाशय के कार्यों को सुरक्षित रखा जा सकता है।


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