Friday, 1 November 2019

महिलाओं के लिये भारी पड़ सकता है चटोरापन

महिलाओं में चटोरेपन की प्रवृति अधिक होती है लेकिन चटोरापन उनके लिये मोटापे और दिल के दौरे का कारण बन सकता हैकई अध्ययनों में पाया गया है कि महिलायें पुरुषों की तरह अपने पसंदीदा भोजन के प्रति अपनी मस्तिष्क की प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने में असमर्थ होती हैंयह जानने के लिये भी अध्ययन किये जा रहे हैं कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में मोटापा और ईटिंग डिसआर्डर की दर अधिक क्यों होती है और महिलाओं को वजन कम करने में अधिक परेशानी क्यों होती है


यह पाया गया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में खाने के प्रति अधिक ललक होने और ईटिंग डिसआर्डर के कारण मोटापा होने की प्रवृति अधिक होती है और उन्हें डायटिंग से वजन कम करने में भी कम सफलता मिलती हैइनके अलावा एस्ट्रोजन सेक्स हारमोन भी महिलाओं में भोजन ग्रहण करने की क्षमता, शरीर का वजन और वसा को बढ़ाता है। डा. लाल के अनुसार महिलाओं में मोटापा रजोनिवृति के बाद दिल के दौरे की आशंका को बढ़ा देता है


हृदय रोग विशेषज्ञ एवं मेट्रो हास्पीटल्स एंड हार्ट इंस्टीच्यूट के निदेशक डा. पुरूषोत्तम लाल का कहना है कि यह देखा गया है कि भारतीय महिलायें अपने खान-पान पर नियंत्रण नहीं रखती हैं और इस कारण वे पुरुषों की तुलना में अधिक मोटी होती हैंऔसत भारतीय महिलाओं का वजन सामान्य वजन से करीब 20 प्रतिशत अधिक होता है। डा. लाल के अनुसार मोटापा और स्थूलता हृदय रोगों का एक बड़ा कारण है। भारतीय परिवारों में खान-पान में असली घी, तेल और मांस आदि पर अधिक जोर दिया जाता है। ये खाद्य पदार्थ मोटापा बढ़ाते हैं। डा. पुरूषोत्तम लाल का कहना है कि सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि महिलायें इलाज के लिए अस्पताल तभी आती हैं जब उनका हृदय रोग गंभीर हो चुका होता है। इसका कारण यह है कि महिलायें आम तौर पर अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह भी होती हैंअपने देश की महिलायें अपने रोगों व कष्टों के प्रति पश्चिमी देशों की महिलाओं की तुलना में बहुत अधिक उदासीन होती हैं और अपने रोगों को छिपाने की कोशिश करती हैंरोगों की अनदेखी करने से रोग बढ़ता जाता है।


महिलायें आम तौर पर चिकित्सकों के पास तभी जाती हैं, जब बहुत देर हो चुकी होती है। अक्सर घर के पुरुष सदस्य भी यह कहते हुये महिलाओं को चिकित्सकों के पास ले जाने को टालते रहते हैं कि यह उनके दिमाग का वहम हैमहिलाओं के प्रति सामाजिक–पारिवारिक भेदभाव और गलत खान-पान एवं गलत रहन-सहन के कारण महिलाओं में हृदय रोग आज गंभीर त्रासदी बनते जा रहे हैंमौजूदा समय में महिलाओं में हृदय रोगों के प्रकोप में वद्धि होने का एक कारण उनमें धूम्रपान का बढ़ता प्रचलन भी हैपश्चिमी देशों में धूम्रपान की प्रवृति घट रही है, जबकि भारत सहित विकासशील देशों में पुरुषों और महिलाओं में धूम्रपान का प्रचलन बढ़ रहा हैइसके अलावा व्यायाम नहीं करने की प्रवृति भी हृदय रोगों को बढ़ावा देती है। व्यायाम नहीं करने वाली महिला अगर गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल करने के साथ-साथ धूम्रपान भी करती हैं, तब उसे दिल का दौरा पड़ने का खतरा 40 प्रतिशत अधिक हो जाता है। हालांकि पुरुषों की तुलना में महिलाएं हृदय रोग से कम पीड़ित होती हैं लेकिन रजोनिवृति के बाद महिलाओं के हृदय रोग के चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसा एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन के कारण होता है


डा. लाल के अनुसार पहले महिलाओं को हृदय रोगों के अभिशाप से मुक्त माना जाता था लेकिन अब हृदय के रोग महिलाओं में भी तेजी से बढ़ रहे हैं। जैविक एवं शारीरिक कारणों से महिलाओं में हृदय रोग बहुत तेजी से बढ़ते हैं और इसलिये महिलाओं में हृदय रोगों के लक्षण प्रकट होने पर किसी तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।


 


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