Monday, 11 November 2019

शिफ्ट में काम करने से मधुमेह का खतरा

शिफ्ट में काम करने वाले लोगों की सबसे बड़ी समस्या यह होती है, कि बेवक्त सोने के कारण उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती। खासकर रात में काम करने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी उलझन यही होती है कि वे ठीक से सो नहीं पाते हैं। वहीं, अगर दिन में सोना चाहते भी हैं, तो पूरी नींद नहीं ले पाते है। साथ ही बदलते शिफ्ट के साथ शरीर तालमेल नहीं बैठा पाता, और व्यक्ति कई बीमारियों का शिकार हो जाता है। इसके कारण उनमें मधुमेह और मोटापे की समस्या होने का खतरा ज्यादा रहता है।
जब नींद की सामान्य प्रक्रिया में कोई बदलाव होता है तो शरीर के शुगर स्तर को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। अध्ययन में शामिल कई लोगों में तो कुछ हफ्तों के भीतर ही मधुमेह के लक्षण दिखाई देने लगे। शिफ्ट में काम करना दूसरी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की वजह भी बन सकता है।
कई बार बॉडी क्लॉक में बदलाव के शिकार होने वाले लोगों का शरीर पौष्टिक तत्वों को ग्रहण नहीं कर पाता। उन्हें मधुमेह और मोटापे की समस्या भी हो जाती है। शिफ्ट में काम करने वाले लोगों में, दिन में काम करने वाले लोगों के मुकाबले मधुमेह से पीड़ित होने की आशंका ज्यादा होती है। चूंकि रात में काम करने वाले लोगों को दिन में सोने में परेशानी होती है, इसलिए उन्हें रात में काम करने और दिन में सोने वाली दोनों तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए पर्याप्त नींद सेहत के लिए महत्वपूर्ण है और यह नींद रात में ही ली जानी चाहिए।


 


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