Friday, 8 November 2019

स्कूली बच्चों पर मंडराया ठिगनेपन का खतरा

स्कूलों में खुल रही दुकानों के कारण बच्चों में पनप रही फास्ट फूड एवं कोल्ड ड्रिंक्स 'मेनिया' उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास पर कहर ढा रही है। नतीजतन बच्चों में लगातार बढ़ते ठिगनेपन के कारणों से अनभिज्ञ अभिभावक हारमोन चिकित्सा के झाँसे में आकर लाखों रुपए पानी की तरह बहा रहे हैं। कुपोषण के कारण बढ़ते ठिगनेपन का हारमोन का इंजेक्शन बनाने वाली कंपनियाँ गलत फायदा उठा रही हंै जबकि ठिगनेपन के अधिकतर मामलों में हारमोन की सूइयों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। स्कूलों में बच्चों की खान-पान की बिगड़ती आदतों के कारण वे ठिगनेपन के साथ-साथ रक्त अल्पता (एनीमिया) एवं भूख की कमी जैसे रोगों की चपेट में आ रहे हैं। यही नहीं उनकी बुद्धि क्षमता (आई.क्यू.) पर भी प्रतिकूल असर हो रहा है। शिशु रोग विशेषज्ञों की संस्था इंडियन एकेडमी आफ पेडियाट्रिक्स ने अभिभावकों को बच्चों के विकास पर मंडराते इस खतरे को लेकर आगाह किया है। अगर सरकार स्कूली छात्रों के स्वास्थ्य की नियमित जाँच के प्रति जरा भी गंभीर है तो उसे सबसे पहले स्कूलों के अंदर खुले फास्ट-फूड की इन दुकानों को बंद करने की कार्रवाई करनी होगी। स्कूलों के पाठ्यक्रम में भले ही संतुलित आहार की किताबी शिक्षा दी जा रही हो, लेकिन स्कूलों के अहाते में खुली इन दुकानों के कारण ही वे कुपोषण के शिकार हो रहे हैं।
शिशु रोग विशेषज्ञों के पास आने वाले स्कूली बच्चों के सर्वेक्षण से यह बात सामने आयी है कि वे पीजा, बर्गर, चिप्स जैसे जंक फूड एवं कोल्ड ड्रिंक्स की 'मेनिया' के बुरी तरह शिकार हो रहे हैं। फास्ट फूड से कैलोरी तो मिलती है लेकिन शरीर को विटामिन, प्रोटीन आदि जैसे पोषक तत्व नहीं मिलते जिसके कारण घर में पकने वाले सामान्य खाद्य पदार्थ (फूड फ्राॅम होम पाॅट) बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। पोषण के पूरक के रूप में बाजार में बिकने वाले अधिकतर खाद्य पदार्थ भी किसी काम के नहीं। कोल्ड ड्रिंक्स पीने की आदत का सबसे बड़ा दुष्परिणाम यह है कि बच्चों की भूख एकदम खत्म हो जाती है। भारी संख्या में अभिभावकों की शिकायत है कि उनके बच्चे घर से ले जाने वाले टिफिन को खाते ही नहीं। उन्हें चिप्स, बर्गर एवं अन्य फास्ट फूड ही चाहिए। स्कूली बच्चों में टिफिन के बदले पैसे ले जाने की जिद बढ़ती जा रही है। मेरी सभी अभिभावकों को यह सख्त सलाह है कि वे अपने बच्चों को स्कूलों के अंदर बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचाएँ। 
 


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