Thursday, 7 November 2019

स्टेंट से रिस्टेनोसिस का दूर होता खतरा

हृदय की बाईपास सर्जरी अथवा एंजियोप्लास्टी के बाद हृदय की रक्त धमनियों के दोबारा हृदय की बाईपास सर्जरी अथवा एंजियोप्लास्टी के बाद हृदय की रक्त धमनियों के दोबारा बंद होने या उनमें रूकावट उत्पन्न होने की आशंका बनी रहती है। लेकिन औषधि लेपित स्टेंट की मदद से अब यह आशंका काफी हद तक दूर हो गयी है।


हृदय रोग चिकित्सक पद्मभूषण डा. पुरुषोत्तम लाल का कहना है कि दुनिया भर में कई अध्ययनों में औषधि लेपित स्टेंट को कारगर एवं सुरक्षित पाये जाये के बाद अमरीका, यूरोपीय देशों और भारत जैसे विकासशील देशों में इनका तेजी से इस्तेमाल होने लगा है। हाल के दिनों में इन स्टेंटों की कीमतों में भी काफी गिरावट आयी है।


अनेक अध्ययनों में औषधि लेपित स्टेंट के अधिक कारगर एवं सुरक्षित पाये जाने के बाद दुनिया के विभिन्न देशों में बंद रक्त धमनियों को खोलने के लिये एंजियोप्लास्टी के दौरान औषधि लेपित स्टेंट का व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल होने लगा है। औषधि लेपित स्टेंट को साइफर अथवा टेक्सस भी कहा जाता है।


डा. पुरुषोत्तम लाल बताते हैं कि स्टेंट धातु की जालीनुमा ट्यूब होती है जिसे एजियोप्लास्टी की मदद से हृदय की बंद धमनियों को खोलने के बाद वहीं पर हमेशा के लिये छोड़ दिया जाता है ताकि धमनियां दोबारा नहीं सिकुड़े। सामान्य स्टेंट से औषधि लेपित स्टेंट इस अर्थ में भिन्न है कि उस पर रैपामाइसिन (सिरोलिमस) अथवा टेक्सोल नामक औषधि की परत चढ़ी होती हैस्टेंट से धीरे-धीरे यह औषधि निकलती रहती है और वहां नये ऊतकों को बनने या कॉलेस्ट्राल जमा नहीं होने देती हैअध्ययनों से पाया गया है कि नये स्टेंट से हृदय की रक्त धमनियों के दोबारा बंद होने (रिस्टेनोसिस) की आशंका करीब दो-तिहाई घट जाती है। साइफर स्टेंट स्टेनलेस स्टील का जालीनुमा यंत्र होता है जिसमें प्रति वर्ग सेंटीमीटर में 140 माइक्रोग्राम रैपामाइसीन होती हैटेक्सस स्टेंट पर टेक्सोल दवा की परत होती है। स्टेंट में लगी दवा कोशिकाओं में वृद्धि को रोकती है


डा. लाल बताते हैं कि औषधि लेपित स्टेंट एक से डेढ़ माह तक नियंत्रित तरीके से धीमी गति से रैपामाइसिन अथवा टेक्सोल छोड़ता है और वहां नयी कोशिकाओं को बनने नहीं देता हैइस तरह से रिस्टेनोसिस की आशंका घटती हैयह दवाई कोशिकाओं की अतिरिक्त वृद्धि को भी रोकती है और कोशिकाओं को नष्ट नहीं करती हैभारत में औषधि लेपित स्टेंट के दाम में काफी गिरावट होने की संभावना है


संभावना है हृदय रोगों के आपरेशन बगैर उपचार की अनेक तकनीकों को विकसित करने वाले डा. लाल के अनुसार इस समय कई तरह के स्टेंट उपलब्ध हैं। इसे एक छोटे से गुब्बारे पर रख कर धमनी में संकरे या जमाव के स्थान तक पहुंचा कर फुला दिया जाता है। अमरीका में बंद रक्त धमनियों को खोलने के लिये हर साल आठ लाख एंजियोप्लास्टी होती है। अनुमानतः 15 से 30 प्रतिशत मरीजों में एंजियोप्लास्टी से खोली गयी धमनियां दोबारा बंद हो जाती हैं


इस स्थिति को रिस्टेनोसिस कहा जाता है। इसके एक साल बाद मरीज की जान बचाने के लिये एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी करने की जरूरत पड़ जाती है। लेकिन स्टेंट और खास तौर पर औषधि लेपित स्टेंट के इस्तेमाल की बदौलत धमनियों में दोबारा अवरोध की आशंका नहीं के बराबर रह गयी है


सबसे अधिक एंजियोप्लास्टी एवं स्टेंटिंग करने का श्रेय हासिल करने के लिये इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से सम्मानित डा. लाल के अनुसार जिन मरीजों को साइरोलिमस अथवा स्टील से एलर्जी है उनमें साइफर या टेक्सस स्टेंट नहीं प्रत्यारोपित किये जाने चाहिये। इसके अलावा उन लोगों में भी औषधि लेपित स्टेंट के इस्तेमाल में सावधानी बरती जानी चाहिये जिन्हें हाल में दिल की सर्जरी हुयी है अथवा जो महिलाएं आने वाले दिनों में गर्भधारण करने वाली हैं और जो अपने शिशु को स्तनपान करा रही हैं।


हृदय रोगों के आपरेशन बगैर उपचार की अनेक तकनीकों को विकसित करने वाले डा. लाल ने बताया कि एंजियोप्लास्टी, स्टेंट एवं रैपामाइसिन लेपित स्टेंट को महत्वपूर्ण चिकित्सकीय उपलब्धियां बताते हुये कहते हैं कि इन तकनीकों के ऑपरेशन की तुलना में कई फायदे हैं। सबसे बड़ा फायदा तो यही है कि इनमें चीर-फाड़ की जरूरत नहीं पड़ती हैमरीज को एनेरिथसिया आदि देकर बेहोश नहीं करना पड़ता तथा ऑपरेशन की तुलना में इसमें बहुत कम समय (आधा से एक घंटा) लगता है। इस कारण मरीज जल्दी स्वास्थ्य लाभ करता है। मरीज को संक्रमण होने तथा मौत होने की आशंका ऑपरेशन की तुलना में बहुत कम होती है। मरीज को दूसरे ही दिन अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है। इस समय केवल बैलून अथवा एंजियोप्लास्टी के जरिये 75 प्रतिशत रोगियों का इलाज हो सकता है जबकि एंजियोप्लास्टी के साथ स्टेंट का प्रयोग करने पर 90 प्रतिशत रोगियों का इलाज संभव हो गया हैडा. पुरूषोत्तम लाल के अनुसार मधुमेह के मरीजों या उन मरीजों को जिनकी एक से अधिक डा. पुरूषोत्तम लाल के अनुसार मधुमेह के मरीजों या उन मरीजों को जिनकी एक से अधिक धमनियों में रूकावट है या जिनकी धमनी में जमाव का क्षेत्र बहुत लंबा है उनका इलाज भी औषधि लेपित स्टेंट से हो सकता है जबकि पहले इनकी जान बचाने के लिये हृदय की सर्जरी करनी पड़ती थीभारतीय लोगों की धमनियां पश्चिमी देशों के लोगों की तुलना में संकरी होती हैं और यहां के लोगों में मधुमेह का प्रकोप भी अधिक होता है जिसके कारण यहां के लोगों की धमनियों में थोड़ा सा भी अवरोध होने पर धमनियां ब्लॉक हो जाती हैं तथा धमनियों को खोलने के बाद भी उनमें दोबारा ब्लॉक होने की आशंका अधिक होती है. ऐसे में औषधि लेपित स्टेंट भारतीयों के लिये विशेष तौर पर लाभदायक साबित हो सकता है.


 


 


 


 


 


 


 


 


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