Thursday, 28 November 2019

ठंड बढ़ने के साथ बढ़ रहा है गले में संक्रमण का प्रकोप

बाहर के वातावरण के तापमान में गिरावट आने का एक ही मतलब है ..... नहीं, यह छुट्टियों का समय नहीं है, बल्कि अब आपको गले में खराश और जुकाम का सामना करना पड़ सकता है। राजधानी में मौसम में आये अचानक बदलाव के कारण वायरल बुखार और गले में संक्रमण का प्रकोप काफी बढ़ गया है। वर्तमान समय का तापमान बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या में वृद्धि होने और संक्रमण के लिए उपयुक्त है।
मौसम में परिवर्तन के दौरान गले में खराश लोगों को आम तौर पर प्रभावित करने वाली एक आम समस्या है। यह अक्सर वायरल संक्रमण के कारण होता है। हालांकि बैक्टीरिया गंभीर रूप से गले में खराष पैदा कर सकते हैं जिसके कारण गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। ये वायरस बेहद संक्रामक होते हैं और तेजी से फैलते हैं।
एशियन इंस्टीच्यूट आफ मेडिकल सांइस, एनसीआर के पल्मोनोलाॅजिस्ट डॉ. मानव मनचंदा कहते हैं, ''गले में खराश या फैरिंजाइटिस (ग्रसनीशोथ) ऊपरी श्वसन मार्ग के आसपास होने वाला संक्रमण है। यह ठंड के कारण होता है और इसके कारण सर्दी, खांसी और सीने में संक्रमण होता है। यह संक्रमण पैदा करने वाली बीमारी है और छींकने और खांसने के दौरान मुंह और नाक से निकले तरल की छोटी बूंदों के संक्रमण से फैलता है।'' मौसम में बदलाव के दौरान, एलर्जिक राइनाइटिस से पीड़ित कई लोगों को गले में खराश भी हो जाती है।
गले में खराश में, मुंह या गले के पीछे के भाग में सूजन हो जाती है। इसके अलावा, विशेषकर बच्चों में टॉन्सिल प्रभावित हो जाती है, जिसके कारण टांसिलाइटिस हो जाती है। गले में खराश के कारण का पता आम तौर पर गले के इतिहास और परीक्षण के आधार पर लगाया जाता है। संक्रामक रोगजनक का पता लगाने के लिए अक्सर गले के स्वाब का परीक्षण किया जाता है।
अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल्स के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. ललित मोहन पाराशर कहते हैं, ''यदि आप अपने गले में खुजली या चुभन महसूस करते हैं, तो गले में खराश की अधिक संभावना हो सकती है। हालांकि यह समस्या मामूली लग सकती है, लेकिन इसे खांसी होने से पहले रोकना बेहतर है। हालांकि सिर्फ गले में खराश के कारण ही आपको काफी परेशानी हो सकती है और यह आपके दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकता है।''
डॉ. पराशर कहते हैं, ''वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण, ऊपरी श्वसन मार्ग में संक्रमण पैदा करता है और नाक में लगातार कन्जेस्चन पैदा करता है और नाक बहने लगती है। यह कान के बीच के हिस्से में यूस्टाचियन ट्यूब (कान के अंतिम हिस्से का वेंटिलेशन ट्यूब, जो नाक और कान के बीच के हिस्से में दूसरे हिस्से के पीछे खुलता है) के माध्यम से ऊपर की ओर बढ़ता है। इसके कारण कान में तेज दर्द, बहरापन हो सकता है और कान से स्राव निकल सकता है और चक्कर आ सकता है।''
कारण: गले में खराश का सबसे आम कारण संक्रमण है जो वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण हो सकता है।
— वायरल संक्रमण: वायरस के कारण होने वाले गले में खराश में आमतौर पर बुखार, थकान, शरीर में दर्द, नाक का बहना और आंखों का लाल होना जैसे लक्षण होते हैं। इसके अलावा, रोगी उल्टी, पेट दर्द और डायरिया जैसे लक्षण से पीड़ित हो सकता है। ऐसे लक्षण बच्चों में आमतौर पर अधिक देखे जाते हैं।
— बैक्टीरियल संक्रमण: गले में खराश ग्रुप ए बीटा हीमोलाइटिस स्ट्रेप्टोकोकस जैसे बैक्टीरिया के कारण हो सकता है। इसमें वायरस से होने वाले संक्रमण के कारण नाक से साफ पानी का बहना और आंखों का लाल होना जैसे लक्षण नहीं होते हैं।
इलाज
वायरस के कारण होने वाले गले में खराश में, गले में खराश को नियंत्रित करने के लिए गर्म पानी से गार्गल और कफ लाजिंज के सेवन के अलावा किसी और उपचार की जरूरत नहीं होती हैै। यदि बुखार, खांसी या पीले रंग के कफ जैसे बैक्टीरियल संक्रमण के कोई संकेत हों, तो ईएनटी परीक्षण कराना और एंटीबायोटिक के सेवन की जरूरत होती है।
गले में खराश से राहत पानेे के लिए सुझाव:
— गर्म पानी में नमक डालकर कुल्ला करें।
— भाप लें क्योंकि यह नासिका मार्ग में जमा हुए बलगम को निकालता है।
— नाक की झिल्ली को नम रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में तरल का सेवन करें।
— अपने नाक और गले में एकत्र बलगम को निकालने के लिए गर्म तरल पदार्थ का सेवन करें। इससे गले में खराश के लिए जिम्मेदार सूजन को कम करने में मदद मिलेगी।
— लाजेंज को चूसें। मेन्थॉल युक्त लाजेंज के सेवन से आपके गले के पीछे का हिस्सा सुन्न होगा है जिससे आपको गले में खराश के साथ जलन और बेचैनी से राहत मिलेगी।
निम्न चीजें से परहेज करें:
— धूम्रपान
— कोल्ड ड्रिंक्स
— तैलीय और तले हुए खाद्य पदार्थों
— मसालेदार भोजन
ये पहले से ही सूजी हुई म्यूकोसा को षुश्क करते हैं, जलन पैदा करते हैं और नमी रहित करते हैं इसलिए इनसे परहेज करें। सार्वजनिक स्थानों में जाने से बचें क्योंकि आप अन्य लोगों को भी संक्रमित कर सकते हैं।


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