बाल विवाह के खतरे

केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों की ओर से हर बार ऐसे वक्तव्य जारी किये जाते हैं कि बाल विवाह गैरकानूनी है, लेकिन इसका लोगों पर बहुत कम ही प्रभाव पड़ता है। हर साल हजारों लड़कियों की शादी बाल्यावस्था में ही कर दी जाती है, शादी के बाद वह जल्द ही किशोरावस्था में पहुंच जाती हैं, और मां बन जाती हैं। यह सामाजिक प्रथा अनेक इलाकों में इस कदर जड़ जमाये हुए है कि लोग कम उम्र में होने वाली शादी के कारण वर-वधु के भविष्य तथा उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर दुष्प्रभावों के बारे में सोच भी नहीं पाते। लड़कियों की शादी मातृत्व के लिए शारीरिक और जैविक रूप से तैयार होने से पहले ही होने से उनके समय से पूर्व मां बनने का खतरा पैदा होता है। महिलाओं में अपनी प्रजनन क्षमता पर नियंत्रण या गर्भधारण रोकने के लिए जरूरी जानकारियों के अभाव के कारण काफी महिलाएं अपनी शादी के पहले साल में ही गर्भवती हो जाती हैं। इस तरह 10-15 प्रतिशत महिलाओं को किशोरावस्था में ही बच्चे को जन्म देना पड़ता है। करीब 60 प्रतिशत शादीशुदा महिलाएं यहां तक कि केरल जैसे विकसित राज्यों में भी काफी महिलाएं 19 साल से पहले ही मां बन जाती हैं। 
बाल विवाह की परंपरा महिलाओं के अधिकारों का हनन करने के अलावा जन्म दर में तीव्र वृद्धि, निर्धनता, कुपोषण, अशिक्षा, शिशु मृत्यु दर और खासकर महिलाओं के जीने की संभाव्यता में कमी जैसी समस्यायें पैदा करती है। 
हाल में राजस्थान में पांच हजार से अधिक महिलाओं पर किये गए एक सर्वेक्षण में पता चला कि वहां 56 प्रतिशत लड़कियों की शादी 15 साल से कम उम्र में ही कर दी गई। उनमें से 18 प्रतिशत लड़कियां शिक्षित थीं और सिर्फ तीन प्रतिशत लड़कियां परिवार नियोजन के लिए बंध्याकरण के बजाय अन्य उपायों का इस्तेमाल कर रही थीं। इन महिलाओं के चार साल से कम उम्र के 63 प्रतिशत बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित थे।
हैदराबाद में महात्मा गांधी अस्पताल में 15 साल की एक लड़की को आपात कक्ष में लाया गया। उसे दौरे से पड़ रहे थे और वह दर्द से कराह रही थी। बाद में उस लड़की के बारे में डॉक्टर से बात करने पर डॉक्टर ने बताया कि उसे प्रसव पीड़ा हो रही है। उसका रक्त दाब बहुत अधिक है और चूंकि उसका शरीर अभी पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ है इसलिए उसका पेल्विक का रास्ता बहुत संकरा है और बच्चा वहां फंस सकता है। इसलिए उसका प्रसव ऑपरेशन के जरिये कराया जाएगा। बाद में डॉक्टर ने बताया कि वह लड़की बहुत भाग्यशाली थी। उसके बचने की संभावना कम थी क्योंकि वैसी स्थिति में उसे दो सौ किलोमीटर दूर से अस्पताल लाया गया था। 
लेकिन अधिकतर माताएं वैसी परिस्थिति में भी घर पर ही बच्चे को जन्म देती हैं और अक्सर माता और बच्चे दोनों की मृत्यु हो जाती है। भारत में प्रसव से संबंधित माता ओर बच्चे की मृत्यु दर बहुत अधिक है। इसके अलावा यहां शादी के बाद लड़कियों की अन्य कारणों से होने वाली मृत्यु भी काफी अधिक है।


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