Sunday, 24 November 2019

रिफाइंड आहार से बढ़ते हैं मुंहासे

ब्रेड और शोधित अनाजों का बहुत अधिक सेवन मंुहासे को आमंत्राण दे सकते हैं। अमरीका के फोर्ट कोलिंस स्थित कोलोराडो स्टेट युनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपने नवीनतम अध्ययन में पाया है कि बे्रड और शोधित अनाज में मौजूद शोधित कार्बोहाइड्रेट शरीर में ऐसी अनेक तरह की प्रतिक्रियायें करता है जिसके कारण मुंहासे पैदा करने वाले जीवाणु की पैदाइश को बढ़ावा मिलता है। 
न्यू साइंटिस्ट नामक वैज्ञानिक शोध पत्रिका में प्रकाशित एक रिपोर्ट में आस्ट्रेलिया के मेलबोर्न स्थित आर एम आई टी युनिवर्सिटी के पोषण वैज्ञानिक नील मान ने उक्त निष्कर्ष की पुष्टि के लिये 60 किशोरों पर एक और अध्ययन करने की योजना बना रहे है। इस अध्ययन के तहत इन किशोरों को तीन माह के लिये कम कार्बोहाइड्रेट  वाले आहार खाने को दिया जायेगा।
मुंहासे की समस्या ने विकसित देशों में अत्यंत गंभीर रूप ले लिया है। हालांकि पापुआ न्यू गिनिया के कितावा प्रायद्वीप पर रहने वाले समूहों की तरह कुछ अन्य समूहों में मुंहासे की समस्या बिल्कुल नहीं है। कितावा प्रायद्वीप में शोधित आहार का उपयोग नहीं के बराबर होता है। अत्यधिक शोधित आहार से केवल मुंहासे की समस्या ही नहीं बढ़ती बल्कि इससे मधुमेह और मायोपिया का भी खतरा बढ़ता है।
कोलोराडो स्टेट युनिवर्सिटी की ओर से हुये उक्त अध्ययन का नेतृत्व करने वाले डा. लोरेन कोर्डेन के अनुसार अलास्का में रहने वाले लोगों को तब तक मुंहासे नहीं होते जब तक कि वे पश्चिमी भोजन का इस्तेमाल नहीं करने लगते हैं।  
अत्यधिक शोधित आहार से केवल मुंहासे की समस्या ही नहीं बढ़ती बल्कि इससे मधुमेह और मायोपिया का भी खतरा बढ़ता है। मुंहासे आम तौर पर 12 से 22 साल की उम्र में अधिक निकलते हैं। कम उम्र की 90 प्रतिशत लड़कियां किसी न किसी हद तक मुंहासे की समस्या से ग्रस्त रहती हैं। हार्मोन संबंधी परिवर्तन एवं आनुवांशिक कारणों के अलावा स्टेराॅयड, कुछ तरह की गर्भनिरोधक गोलियों तथा तपेदिक एवं मिर्गी की दवाईयों के सेवन से भी मुंहासे हो सकते हैं या उनमें वृद्धि हो सकती है।


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