Thursday, 22 August 2019

आर्थोपेडिक सर्जन कैसे बने मैराथन धावक

    
डा. युवराज कुमार दिल्ली हाफ मैराथन, 2018 में


डा. युवराज कुमार (अंग्रेजी  : Dr. Yuvraj Kumar) की खासियत केवल यह नहीं है कि वह एक कुशल आर्थोपेडिक सर्जन हैं बल्कि यह भी है कि कुशल मैराथन धावक हैं और मुंबई फुल मैराथन (42 किलोमीटर) और दिल्ली मैराथन जैसे कई लंबी दौड़ प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लिया है। चलने-फिरने से लाचार हो चुके सैकड़ों लोगों को दोबारा फिट बनाना बनाना उनका पेशा है लेकिन अपने आप को फिट रखना उनका पैशन है। डाक्टरी की व्यस्त प्रैक्टिस के बावजूद वह सुबह-सुबह एक घंटे की लंबी दौड़ लगाने और व्यायाम करने के लिए समय निकाल ही लेते हैं। डा. युवराज कुमार इस समय फरीदाबाद के क्यूआरजी हेल्थ सिटी में ऑर्थोपेडिक्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के निदेशक (अंग्रेजी : Director of Orthopedic and Joint Replacement Surgery at QRG Hospital) हैं। उन्होंने मस्कुलोस्केलेटल डिसआर्डर्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट के क्षेत्र में शानदार काम किया है और कई जटिल और मुश्किल सर्जरी को सफल अंजाम देते हुए वैसे लोगों को दोबारा चलने-फिरने में सक्षम बनाया है जिन्होंने बीमारी या दुर्घटना के कारण बिस्तर पकड़ लिया था। ऐसे में यह जानना दिलचस्प होगा कि डा. युवराज कुमार खुद को कैसे फिट रखते हैं। यहां पेश है डा. युवराज का फिटनेस फंडा जिसका पालन करके आप भी अपने को फिट और चुस्त – दुरूस्त रख सकते हैं।


सर्जन के लिए कितनी जरूरी है पूर्ण फिटनेस?
डा. युवराज कुमार बताते हैं कि फिटनेस किसी व्यक्ति की शारीरिक सक्रियता की क्षमता के आधार पर आंकी जाती है। वह कहते हैं, ”एक आर्थोपेडिक सर्जन होने के नाते मेरे लिए फिटनेस का मतलब पूर्ण परिशुद्धता के साथ किसी काम को सम्पन्न करना है और एक सर्जन के लिए अपने काम में थोड़ी सी भी कमी या गलती करने की गुंजाइश नहीं होती है क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो यह किसी मरीज की जान के लिए खतरा हो सकता है। इसलिए मैं अपने काम में पूर्णता लाने के लिए हर संभव कोशशि करता हूं – शारीरिक और मानसिक तौर पर। मेरे लिए दिन की शुरूआत पांच बजे सुबह से होती है। सप्ताह में बार मैदान में जाकर दौड़ लगाता हूं और तीन दिन जिम में जाकर कसरत करता हूं। व्यायाम करने के बाद छाछ लेता हूं। इसके बाद स्नान करता हूं।”



डा. युवराज कुमार टाटा मुंबई मैराथन, 2019 में


आहार में क्या—क्या जरूरी है?
डा. युवराज बताते हैं, ”नाश्ते में मैं कुछ फल लेता हूं ताकि विटामिन और खनिज संतुलित रूप से शरीर को मिलता रहे। इसके अलावा मध के साथ पिसे हुए बादाम और रात भर पानी में भिंगोये गए किशमिश लेता हूं क्योंकि यह पाचनशक्ति को बढ़ाता है। इसके अलावा नाश्ते में चार उबला हुए अंडे और हरी सब्जियों के साथ एक चपाती खाता हूं। इसके बाद काम में जुट जाता हूं। मेरे रोजना के काम में ओपीडी में 70 से 80 मरीजों को देखना और कई सर्जरी शामिल है जो आम तौर पर खड़े होकर की जाती है।
दोपहर में सामान्य उत्तर भारतीय भोजन लेना पसंद करता हूं जिसमें हरी सब्जियां, फलियां, दही और सलाद के साथ दो चपातियां शामिल होती हैं। काम के दवाब के कारण या अपरिहार्य स्थितियों के कारण कभी-कभी, यदि दोपहर का भोजन नहीं कर पाता हूं तो भोजन की प्रतिपूर्ति के लिए आफिस में कुछ ड्राई फ्रुट्स और फल आदि रखता हूं न केवल अपने लिए बल्कि अपने सहयोगियों के लिए भी।”


कैसे रखें अपने को हाइड्रेट?
डा. युवराज कुमार के अनुसार गर्मियों में अपने आप को हाइड्रेटेड रखना और शरीर के इलेक्ट्रोलाइटिक संतुलन को बनाए रखना जरूरी होता है इसलिए बहुत सारा पानी पीना आवश्यक है। साथ में नारियल पानी, सेब का जूस या इलेक्ट्रोलाइट पाउडर का भी सेवन करना बेहद आवश्यक है। रात में सोने जाने से करीब तीन से चार घंटे पहले भोजन कर लेना चाहितए लेकिन शहर के भागदौड़ वाले जीवन और हमारे समाज में जो सांस्कृतिक-सामाजिक परम्पराओं के कारण ऐसा करना मुश्किल होता है।



डा. युवराज कुमार दिल्ली हाफ मैराथन, 2016 में


रात में भोजन कब करें?
डा. युवराज कुमार कहते हैं, ”वह आम तौर पर बिस्तर पर जाने से करीब दो से तीन घंटे पहले भोजन कर लेने की कोशिश करते हैं। रात के भोजन में बुधवार एवं शुक्रवार को मछली करी और रविवार एवं सोमवार को चिकन करी लेता हूं तथा बुधवार को हरी सब्जियां एवं फलियों से भरपूर भोजन लेता हूं। गुरूवार एवं शनिवार को दो चपाती और सलाद लेता हूं।”
​कैसे मिली फिटनेस की प्रेरणा?
डा. युवराज कुमार बताते हैं कि हालांकि वह पिछले 10 वर्षों से सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं लेकिन मेरे मन में कड़ी मेहनत करने का बीज वर्षों पहले बोए गए थे। जब वह बच्चे थे तो माँ सुबह 4 बजे जगाती थी और फिर वह कॉलोनी के अन्य परिवारों को जगाती थी और फिर हम सभी एक साथ टहलने जाते थे।”


फिटनेस कैसे पाएं?
वह कहते हैं कि जीवन एक यात्रा है और ऐसा ही फिटनेस है। फिटनेस केवल व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मानसिकता में एक मौलिक बदलाव लाने का नाम है। आपने सफलता की अनगिनत कहानियां सुनी होंगी और इन सभी कहानियों में केवल एक चीज है जो सभी में समान रूप से मौजूद है वह है हार न मानने की अथक प्रतिबद्धता है। ऐसा ही फिटनेस के साथ है। आपको हार नहीं माननी चाहिए और आपको पेड़ों पर कम उंचाई पर लटके हुए फलों को पाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए बल्कि आपको परिश्रम के पथ पर यात्रा करनी चाहिए, हंसते हुए। आप कम उंचाई पर लटके हुए फलों को खाकर आप स्वाद का आनंद तो ले लेंगे लेकिन आपको जो फल कठोर परिश्रम करने के बाद मिलेगा उसका स्वाद अदभूत होगा। लोग विभिन्न कारणों से व्यायाम करते हैं जैसे कि वजन कम करने के लिए, सुंदर दिखने के लिए। लेकिन डाक्टर के लिए व्यायाम अनिवार्य हो जाता है – अपने को निरोगी और चुस्त-दुरूस्त रखने के लिए ताकि वह दूसरों को बीमारियों से मुक्त करने की क्षमता और ताकत हासिल कर सके।


क्या फिटनेस का कोई फार्मुला है?
डा. युवराज कुमार बताते हैं, ”मैं पिछले बीस वर्षों से शनिवार को लगातार उपवास करता रहा हूं और दौड़ने का अभ्यास करता रहा हूं तथा पिछले दस वर्शों से लगातार चिकित्सक के तौर पर काम कर रहा हूं। मेरे सहयोगी, दोस्त अैर परिवार के लोग अक्सर मुझसे फिटनेस के बारे में सलाह मांगते हैं, मैं अपने अनुभव और ज्ञान उन्हें साझा करता हूं लेकिन अक्सर यही सुनता हूं कि नौकरी, काम तथा दौड़भाग में इतनी थकावट हो जाती है और आने-जाने में इतना समय लग जाता है कि व्यायामक रने का समय ही नहीं मिलता है। लेकिन मैं यही कहता हूं कि फिटनेस का कोई ''शॉर्ट-कट नहीं है। इसके लिए कोई बना बनाया फार्मुला नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि फिटनेस हासिल करने के लिए आंतरिक प्रेरणा कैसे प्राप्त हो। इसके लिए कोई सूत्र नहीं हैं। अलग-अलग व्यक्ति के लिए अलग-अलग कारणों से फिटनेस पाने की प्रेरणा पा सकते हैं।”


Sunday, 11 August 2019

मरीजों की खुशी में ही है अपनी खुशी : डा. आर. एन. कालरा


डा. आर. एन. कालरा प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ हैं। उन्होंने 1990 में नई दिल्ली के कीर्ति नगर में कालरा हास्पीटल की स्थापना की। इस अस्पताल की खासियत केवल यह नहीं है कि यहां ह्रदय रोगियों को कम खर्च में विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान की जाती है बल्कि मुख्य खासियत यह है कि इस अस्पताल की आर से हर सप्ताह दिल्ली और एनसीआर में निःशुल्क मेडिकल चेकअप कैम्प आयोजित किया जाता हैं जिनके जरिए अब तक करीब डेढ लाख से अधिक मरीजों का इलाज किया जा चुका है। इसके अलावा अस्पताल में हर दिन एक घंटे की फ्री ओपीडी लगाई जाती है। अस्पताल की ओर से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं तथा देश में उपलब्ध ह्रदय रोग के इलाज की सुविधाओं एवं समस्याओं के बारे में डा. आर. एन. कालरा से हुई बातचीत के अंश पेश है।
आपने कालरा हास्पीटल की शुरूआत कैसे और कब की?
1981 से कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में प्रैक्टिस कर रहा हूं। 1990 में यह अस्पताल कीर्ति नगर में खुला जो उस समय यह 25 बेड का हास्पीटल था जो धीरे-धीरे बढ़कर 150 बेड का अस्पताल हो गया है जहां यहां हर तरह की बीमारियों का इलाज होता है। यहां कार्डिएक सर्जरी, एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी हर तरह की सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध है। 1991 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति ने कैथ लैब का उद्घाटन किया। उस समय दक्षिण पश्चिमी दिल्ली में यह एकमात्र अस्पताल था जहां यह कैथ लैब शुरू किया गया। मैं अब तक 11 हजार से अधिक एंजियोग्राफी और 5 हजार से अधिक एंजियोप्लास्टी कर चुका हूं। हमारे अस्पताल में कार्डियोलॉजी के अलावा गाइनी, आर्थोपेडिक, आप्थेलमोलॉजी आदि सभी विशेषज्ञताओं में अत्याधुनिक सर्जरी एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध है।
चिकित्सा सुविधाओं को आम लोगों खास तौर पर गरीब लोगों तक पहुंचाने के लिए आपके अस्पताल की ओर से क्या पहल की जाती है?
हमारे अस्पताल की आर से हर सप्ताह दिल्ली और एनसीआर में निःशुल्क मेडिकल चेकअप कैम्प आयोजित किया जाता हैं जिनके जरिए हमने अब तक करीब डेढ लाख से अधिक मरीजों का इलाज किया जा चुका है। इन कैम्पों में जहां तक हो सकता है हम मरीज का पूरी तरह से निःशुल्क इलाज करते हैं। जो मरीज कैम्प में निःशुल्क सलाह लेने आते हैं उनसे हमारा रिश्त केवल कैम्प तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि बाद में भी जो मरीज कैम्प के कार्ड लेकर हमारे पास आगे के इलाज के लिए आते हैं उनका हम अस्पताल में भी निःशुल्क इलाज करते हैं। इसके अलावा हम 9 से 10 बजे तक अस्पताल में फ्री ओपीडी लगाई जाती है। जो लोग इलाज का पूरा खर्चा बर्दाशत नहीं कर सकते उनका हम काफी रियायती दर पर अथवा जरूरी होने पर नि:शुल्क इलाज करते हैं। चिकित्सा कैम्प लगाने के लिए हमसे कई संस्थाएं, संगठन, मंदिर या गुरूद्वारा प्रबंधक एवं आरडब्ल्यूए संपर्क करते हैं। इसके अलावा हम भी गुरूद्वारों, आरडब्ल्यूए और अन्य संस्थाओं से संपर्क करते हैं और जगह-जगह चिकित्सा कैम्प लगाते हैं।


टर्शियरी केयर के क्षेत्र में आपका अस्पताल क्या कदम उठा रहा है?
पहले मरीज अपने आस-पास के डाक्टर के पास या निकट के अस्पताल में इलाज के लिए जाते हैं। वहां अगर इलाज नहीं हो पाता है तो मरीज हमारे पास या अन्य सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में जाते हैं। हमारे यहां क्रिटिकल केयर के लिए काफी मरीज आते हैं, जिनका अन्य जगहों पर समुचित इलाज नहीं हो पाता। जो मरीज बहुत ही क्रिटिकल मरीज आते हैं और हमारे पास उनके इलाज के लिए हर सुविधाएं, तकनीकें एवं डाक्टर उपलब्ध हैं। हमारे पास आधुनिकतम तकनीकें एवं मषीनें हैं किन्तु चिकित्सा विज्ञान की कोई सीमा नहीं है। आज तेजी से तकनीकों का विकास हो रहा है और रोज ही नई मशीनों का इजाद हो रहा है। नई मशीनें लगाने के लिए काफी फंडिंग की जरूरत होती है। हालांकि हमारे पास काफी सारी आधुनिक तकनीकें एवं मशीनें उपलब्ध है और साथ ही साथ हम नई मशीनें भी खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे पास हार्ट केयर की कुछ बहुत ही एडवांस मशीनें नहीं है लेकिन मैं उन्हें लगाना चाहता हूं ताकि हम लोगों की बेहतर तरीके से सेवा कर सकें। ताकि लोगों को यहां से कहीं बाहर नहीं जाना पड़े।
गांवों में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। गांवों में चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आपका क्या सुझाव है?
गांव में अच्छे डाक्टर इसलिए नहीं जाना चाहते क्योंकि गांवों में ऐसे समुचित अस्पतालों एवं चिकित्सा केन्द्रों का अभाव है जहां वे मरीजों का वे समुचित तरीके से इलाज कर सकें और अपनी चिकित्सकीय योग्यता एवं कुशलता का पूरा-पूरा उपयोग कर सकें। जो भी प्राइमरी हेल्थ केयर सेंटर हैं वे बहुत खराब स्थिति में है जहां बुनियादी सुविधाएं भी नहीं है। सरकार को गांवों में बड़े सर्जिकल सेंटर एवं चिकित्सा केन्द्र खोलने के लिए पहल करनी चाहिए। अगर सरकार खुद ऐसे सेंटर खोल नहीं सकती तो प्राइवेट क्षेत्र को इस दिशा में आगे आने के लिए प्रेरित करना चाहिए और उन्हें इसके लिए जरूरी सुविधाएं एवं रियायतें प्रदान करनी चाहिए ताकि वे गांवों में अथवा दूरदराज के क्षेत्रों में बड़े चिकित्सा संस्थान खोल सकें। सरकार पीपीपी मॉडल को बढ़ावा दे सकती है। सरकार अगर कम ब्याज पर उपकरणें खरीदने की सुविधा दे या कम ब्याज पर लोन दे तो हम भी इस दिशा में आगे बढ़ने को तैयार हैं।
पहले की तुलना में चिकित्सा के क्षेत्र में किस तरह का अंतर आया है?
पहले की तुलना में आज यह अंतर आया है कि पहले मरीज डाक्टर पर विष्वास करते थे। डाक्टर को भगवान मानते थे। पहले हम मरीज को जो सुझाव देते थे उसे दिल से मानते थे। पहले हम मरीज को उसकी बीमारी बताते नहीं थे और जो भी सुझाव देते थे उसका पालन करते थे। उस समय मरीज आम तौर पर कोई सवाल नहीं करते थे। आज यह सही है कि जागरूकता बढ़ी है और यह अच्छी बात है लेकिन आज मरीजों का डाक्टर पर से विष्वास खत्म हो गया है। आज कई लोग इंटरनेट पर किसी बीमारी के बारे में पढ़कर अपने को डाक्टर ही समझने लगते हैं। वे डाक्टर से बहस करने लगते हैं। एक डाक्टर ने सालों की मेहनत लगाई होती है उसके पास सालों का अनुभव होता है जबकि कोई इंटरनेट पर ह पढ़कर अपने को डाक्टर समझने लगता है। मेडिसीन बहुत ही व्यापक विषय है और इंटरनेट से इतने विशाल विषय का ज्ञान नहीं लिया जा सकता है। हमने वर्षों की रातों की नींद खराब की, अपना सोशल और पारिवारिक लाइफ खराब किया ताकि हम चिकित्सा का ज्ञान, कौशल एवं अनुभव हासिल कर सकें। यह इंटरनेट पर पढ़कर हासिल नहीं होता है।


आज काफी संख्या में डाक्टर विदेश जा रहे हैं। इसके क्या कारण है। यहीं नहीं जो लोग उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाते हैं वे वहीं बस जाते हैं और वहीं डाक्टरी की प्रैक्टिस करने लगते हैं। ऐसा क्यों होता है?
जो लोग खर्च उठा सकते हैं वे अपने बच्चों को विदेश पढ़ने को भेजते हैं और उनके बच्चे विदेशों में ही नौकरी करने लगते हैं। इसके अलावा जो बच्चे यहां से पढ़कर बाहर चले जाते हैं वे लौटकर वापस नहीं आते क्योंकि उन देशों में उनके काम के बदले उन्हें समुचित सम्मान और काम के बदले सुकून मिलता है। यहां काम करते हैं लेकिन उसके बदले सम्मान और सकून नहीं मिलता। विकसित देशों में ईमानदारी से काम कीजिए और आपको कोई दिक्कत या टेंषन नहीं है। कोई झंझट नहीं है। जबकि हमारे यहां आप ईमानदारी से और मेहनत से काम करने का कोई सम्मान नहीं है। यहां काम करने के साथ सुकून नहीं है। टेंशन ही टेंशन है। रोज घर से प्रार्थना करके निकलता हूं कि आज का दिन ठीक से गुजरे। बाहर के देशों में होता है कि वे पूरी तसल्ली से काम करते हैं और काम खत्म करके शांति के साथ घर जाते हैं।
आप अपने यहां उपलब्ध सेवाओं के बारे में लोगों तक कैसे जानकारी पहुंचाते हैं?
कानून के अनुसार एक डाक्टर अपना प्रचार नहीं कर सकता है लेकिन नीम हकीम अपना प्रचार कर सकता है। हम पास जो सुविधाएं और विशेषज्ञता है उसका हम प्रचार नहीं कर सकते और न ही करते हैं। हमारे बारे में लोगों को मरीजों से पता चलता है। अगर हम मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करें तथा मरीज हमारी सेवा से संतुष्ट और प्रसन्न हो तो हमारा प्रचार अपने आप हो जाता है। हम अन्य मरीजों तक पहुंचने के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन करते हैं और अपने अस्पताल में निःशुल्क ओपीडी आयोजित करते हैं।
प्राइवेट अस्पतालों में कम खर्च में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिले, इसके लिए आपके क्या सुझाव हैं?
प्राइवेट अस्पतालों में इलाज का खर्च कम हो सकते हैं बशर्ते सरकार भी इस दिशा में कदम उठाए। अगर हम पर टैक्स कम लगे या नहीं लगे, मशीनें कम ब्याज पर मिले या मशीनें खरीदने के लिए सरकार की ओर से वित्तीय मदद मिले, बिजली आदि रियायती दर पर मिले तो निश्चित ही निजी अस्पतालों में चिकित्सा का खर्च कम हो सकता है। हम क्वालिटी केयर के साथ समझौता नहीं कर सकते। हमें पेमेंट की चिंता नहीं है लेकिन हम मरीजों को कम गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवा प्रदान नहीं कर सकते। हम खर्च घटाने के लिए चिकित्सा सेवा में कटौती नहीं कर सकते है। इससे न केवल मरीजों की जान के साथ खिलवाड होगा बल्कि यह नैतिक रूप से भी गलत होगा।
आप चिकित्सक कैसे बने। क्या आप चिकित्सक ही बनना चाहते थे?
हमने अपने पारिवारिक एवं सोशल लाइफ को सैकरिफाइस कर रखा है। पहले मरीज की खुशी, उसके बाद हमारी खुशी। मेरा ज्यादातर समय मरीजों के साथ ही निकल जाता है। मैं इंजीनियर बनना चाहता था। मेरे पिता का लेदर का कारोबार था। 11 वीं की पढ़ाई जब कर रहा था तो। मेरा गणित से बहुत लगाव था। लेकिन पिताजी ने कहा कि तुम मेडिकल में जाने की कोषिष करो। मैंने कहा कि मुझे मेडिकल नहीं होगा। उस समय मैं अपने पिताजी को मना नहीं कर पाया। पिताजी का सोचना था कि मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद मैं उनका काम संभाल लुंगा। जब मैंने दो-साल मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर ली तो पिताजी ने कहा कि तुम मेरे बिजनेस में आ जाओ। मैंने कहा कि अग मैं मेडिकल की पढ़ाई पूरी करके डाक्टर ही बनुंगा। मेंरा अब इसमें मन लग गया है और मैं इसे पूरा करके ही दम लुंगा। फिर पिताजी भी मान गए और मैंने चिकित्सा की पूरी शिक्षा लेकर चिकित्सक बना।
चिकित्सक के रूप में आपको सबसे अधिक संतुष्टि और खुशी कब मिलती है?
डाक्टर के रूप में मुझे पैसे की चिंता नहीं है। मैं यह नहीं देखता कि मरीज से कितने पैसे आए या नहीं आए। मेरी चिंता यह है कि मरीज को समुचित चिकित्सा मिली या नहीं मिली और उसे हमारी चिकित्सा से लाभ हुआ या नहीं। यही सभी चिकित्सकों का ध्येय होता है और होना चाहिए। अगर मेरा मरीज ठीक हो गया तो मैं समझता हूं कि चिकित्सक के रूप में मेरा फर्ज पूरा हो गया। मरीज के ठीक होने पर मुझे जो संतुष्टि मिलती है वहीं मेरे लिए सबसे बड़ा ईनाम है।


फेसलिफ्ट की मदद से चेहरे को दीजिए निखार


ढलती उम्र के झुर्रीदार, कांतिहीन और सिकुड़न भरे चेहरे तथा कील-मुंहासें, चेचक, सफेद दाग, जलने या कटने-फटने के दागों से भरे चेहरे से हर किसी को विरक्ति होती है। जवानी के कांतियुक्त कसे हुए चेहरे को कोई खोना नहीं चाहता, लेकिन वक्त के साथ-साथ जब चेहरे की मांसपेशियां और त्वचा ढीली पड़ने लगती है तथा चेहरे की चमक और कांति कम होने लगती है तो खुद से ही वितृष्णा सी होने लगती है। जवानी का कांतिमय चेहरा बीते दिनों की बात हो जाती है और यह चेहरा सिर्फ फोटो एलबम या फ्रेम में कैद होकर हमें चिढ़ाती रहती है और हम इन्हें देखकर यही सोचते हैं कि काश हमारे पास जवानी के दिनों का लावण्ययुक्त चेहरा हमेशा कायम रहता। लेकिन कालचक्र की गति को कोई रोक नहीं सकता। हर व्यक्ति बुढ़ापे की ओर अग्रसर होता है क्योंकि बुढ़ापे पर किसी का वश नहीं होता, लेकिन वृद्धावस्था के चिन्हों को कॉस्मेटिक सर्जरी की बदौलत काफी हद तक छिपाया या मिटाया जा सकता है, जिससे व्यक्ति युवा प्रतीत हो और उसमें नया आत्मविश्वास पैदा हो। शारीरिक सुंदरता में चार चांद लगाने वाली और जवानी की आभा को बुढ़ापे में भी बरकरार रखने वाली कॉस्मेटिक सर्जरी की तकनीकों का व्यापक इस्तेमाल अब भारत में भी होने लगा है।


जवानी के दिनों में त्वचा शरीर की मांसपेशियों पर पूरी तरह कसी रहती है जिससे त्वचा में एक तरह की चमक, कसाव और चिकनापन रहता है। यह चमक और चिकनापन त्वचा के नीचे स्थित वसा की परत के कारण रहते हैं, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ-साथ जब वसा की परत पतली होने लगती है तब त्वचा के कसाव और चिकनापन कम होने लगती है, जिससे त्वचा ढीली पड़ने लगती है और उस पर झुर्रियां पड़ने लगती हैं। त्वचा पर महीन-महीन लकीरें नजर आने लगती हैं और त्वचा नीचे की ओर लटकने लगती है।


नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश पार्ट — 1 स्थित कास्मेटिक लेजर सर्जरी सेंटर आफ इंडिया के निदेशक एवं वरिष्ठ कास्मेटिक सर्जन डा. पी के तलवार बताते हैं कि त्वचा में आयी इन झुर्रियों को फेस लिफ्ट के द्वारा छिपाया या मिटाया जा सकता है। जब चेहरे पर झुर्रियों की बहुत बारीक लाइनें हों या मुंहासे के दाग हों तो उसे केमिकल फेस पीलिंग या लेजर से मिटाया जा सकता है। लेजर और फेस पीलिंग साथ-साथ या अलग-अलग किया जा सकता है। फेस पीलिंग जब मोटर से किया जाता है तो उसे डर्माब्रेजन, जब रसायन से किया जाता है तो उसे केमिकल पीलिंग और जब लेजर से किया जाता है तो उसे लेजर अब्रेजन कहा जाता है।
डा. पी के तलवार बताते हैं कि फेस लिफ्ट से झुर्रियों को हटाने के लिए व्यक्ति के कान के पास और कान के पीछे चीरा लगाया जाता है। उसके बाद ढीली त्वचा को उठाकर मांसपेशियों को टाइट कर दिया जाता है, त्वचा को खींचकर अतिरिक्त त्वचा को काट कर निकाल दिया जाता है और उसे सील दिया जाता है। ऑपरेशन के बाद मरीज को दो दिन अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है। एक सप्ताह के बाद मरीज घर सक बाहर निकल सकता है, लेकिन उसे अपना चेहरा धूप से बचाना होता है। साथ ही दो-तीन हफ्ते तक मरीज को गर्दन नहीं हिलाने या गर्दन को झटका नहीं देने की सलाह दी जाती है। फेस लिफ्ट का फायदा सामने आने में यानी युवा दिखने में तीन हफ्ते का समय लग सकता है।


कई बालीवुड अभिनेत्रियों की कास्मेटिक सर्जरी करने वाले डा. पी के तलवार के अनुसार कुछ साल पहले तक लोग 40-50 साल की उम्र में फेस लिफ्ट कराते थे, लेकिन अब अत्यधिक प्रतिस्पर्धा के इस युग में लोग युवा दिखने और व्यावसायिक रूप से फायदा उठाने के लिए कम उम्र में ही फेस लिफ्ट कराने लगे हैं। शादी की उम्र की लड़कियां, मॉडल, अभिनेत्रियां, सेल्स गर्ल्स और रिसेप्सनिस्ट आदि तो 30 साल से भी कम उम्र में फेस लिफ्ट कराने लगी हैं। कम उम्र में फेस लिफ्ट कराने पर इसका प्रभाव करीब 10-12 साल तक रहता है जबकि 40-50 साल की उम्र में फेस लिफ्ट कराने पर इसका प्रभाव करीब 7 से 10 साल तक रहता है। युवा व्यक्ति में दूसरी बार फेस लिफ्ट कराने की जरूरत आम तौर पर 7 से 10 साल के बाद पड़ती है। यह व्यक्ति की उम्र और त्वचा की स्थिति पर निर्भर करता है। व्यक्ति कितना तनाव में रहता है, त्वचा की कितनी देखभाल करता है, कितना व्यायाम करता है, इन चीजों पर फेस लिफ्ट का फायदा निर्भर करता है। यदि कोई व्यक्ति अपना वजन कम करना चाह रहा हो तो उसे फेस लिफ्ट कराने से पहले ही अपना वजन कम करा लेना चाहिए क्योंकि सर्जरी के बाद वजन कम करने से त्वचा फिर से ढीली पड़ सकती है।


डा. तलवार के अनुसार चेहरे के दाग-धब्बों को मिटाने के लिए फेस पीलिंग का इस्तेमाल किया जाता है। फेस पीलिंग से चेचक, मुंहासे, तिल, जख्म या जलने के निशान, सफेद दाग या अन्य दाग-धब्बों को मिटाया जा सकता है। इस तकनीक से चेहरे की त्वचा के उपरी परत को छिल कर या रसायन से हटा दिया जाता है। ज्यादा गहरे दाग के लिए यह प्रक्रिया दो-तीन बार दोहराई जाती है। जब यह प्रक्रिया छिल कर की जाती है तो उसे डर्माब्रेजन और जब इसे रसायन से हटाया जाता है तो इसे केमिकल पीलिंग कहा जाता है। अब इसके लिए लेजर का भी इस्तेमाल किया जाने लगा है। इसे लेजर पीलिंग कहा जाता है। फेस पीलिंग कराने के बाद व्यक्ति को तीन से छह महीने तक धूप से बचना होता है और घर से बाहर निकलने पर गाड़ी में सफर करना चाहिए और चेहरे पर सन क्रीम लगा लेना चाहिए ताकि सूर्य की अल्ट्रावासलेट किरणों का प्रभाव उसके चेहरे पर न पड़े।



डा. पी के तलवार देश के प्रमुख कास्मेटिक एवं प्लास्टिक सर्जन हैं। वह सन 1996 से कास्मेटिक लेजर सर्जरी सेंटर आफ इंडिया का संचालन कर रहे हैं। वह देश के कुछ चुनिंदा कास्मेटिक लेजर सर्जनों में शामिल हैं जिन्होंने भारत में कास्मेटिक लेजर की शुरूआत की। वह पूर्व में इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ कास्मेटिक सर्जन के तौर पर काम कर चुके हैं। वह बालीवुड अभिनेत्रियों, मॉडलों , खिलाडियों एवं विदेशी पर्यटकों की कॉस्मेटिक सर्जरी कर चुके हैं।


Friday, 9 August 2019

टीवी सेंसेशन हिना खान ने टाइड की नई पेशकश लांच की

दिल्ली, 8 अगस्त, 2019 : प्रसिद्ध अभिनेत्री हिना खान ने आज शहर में बेहतर टाइड अल्ट्रा का अनावरण किया और #टाइडअल्ट्राचैलेंज में सक्रिय रूप से भाग लिया।
इस कार्यक्रम में, हिना खान भी बैंडवैगन में शामिल हो गईं और फिल्म के बाल कलाकार आदित्यराज सेन के साथ अपने मजेदार तरीके से #टाइडअल्ट्राचैलेंज लिया और दर्शकों को भी इसे आज़माने के लिए प्रोत्साहित किया।
हिना खान जिन्हें आज भी दर्शकों द्वारा ये रिश्ता क्या कहलाता है में अक्षरा की भूमिका के लिए प्यार किया जाता है, ने इस मौके पर कहा, “मुझे हमेशा से टाइड के चुलबुले विज्ञापनों से प्यार रहा है, और माँ और बेटे के बीच यह रैप बैटल अब तक का सबसे अच्छा है। कोई आश्चर्य नहीं #टाइडअल्ट्राचैलेंज ने ऐसी गति पकड़ी है। मुझे चुनौती लेना और रैप करना पसंद आया –यह मुझे मेरी माँ के साथ बातचीत की यादों में ले जाता है! मेरे घर में दशकों से टाइड का उपयोग किया जाता रहा है और टाइड अल्ट्रा का यह नया अवतार देखना बहुत ही रोमांचक है! यहाँ कपड़े धोने का एक ऐसा समाधान है, जो आपको अधिक से अधिक उत्कृष्ट सफाई प्रदान करता है! ”


शरत वर्मा, मुख्य विपणन अधिकारी, पी एंड जी इंडिया, और इंडिया लॉन्ड्री हेड ने कहा, “टाइड अल्ट्रा का लॉन्च हमारा पहला टाइड उत्पाद है जिसे विशेष रूप से वाशिंग मशीन के लिए डिज़ाइन किया गया है। टाइड अल्ट्रा एक सस्ती पेशकश है जो वास्तव में उन उपभोक्ताओं को प्रसन्न करेगी जो मशीनों में बेहतर सफाई की तलाश कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में, हमने एक उत्कृष्ट कपड़े धोने के अनुभव को देने के लिए अपने पोर्टफोलियो में निरंतर रूप से नया करने और उन्नत करने पर ध्यान केंद्रित किया है। हमें यह भी एहसास है कि एक माँ के लिए, उसके बच्चे पहले आते हैं। वह यह सुनिश्चित करना चाहती है कि वे अच्छी तरह से प्रगति करें और जो कुछ भी वे करते हैं, उसमें उत्कृष्टता प्राप्त करें। यह वही भावना है जो वह अपने कपड़े धोने के लिए भी लाती है, जहां वह एक उत्कृष्ट साफ-सफाई के लिए प्रयास करती है – विशेष रूप से स्कूल यूनिफ़ॉर्म जैसे महत्वपूर्ण कपड़ों के लिए।


Friday, 2 August 2019

नई ​दिल्ली में दिव्यांगों के सशक्तिकरण पर राउंड टेबल सम्मेलन आयोजित

नई दिल्ली. दिव्यांगों को सशक्त बनाने के लिए एंपावरिंग दिव्यांगजन मिशन 2020 के तहत राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस का आयोजन एसोसिएशन ऑफ रिहैबिलिटेशन प्रोफेशनल एंड पैरंट्स की ओर से आयोजित किया गया। 
नई दिल्ली के कड़कड़डूमा स्थित अमरज्योति चैरिटेबल ट्रस्ट सभागार में आयोजित इस सम्मेलन में देश भर  से दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्थाओं के प्रमुख, विभिन्न सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि, इस क्षेत्र में कार्य कर रहे वरिष्ठ फेशनल्स एवं दिव्यांगजनों के अभिभावक शामिल हुए। 
इस सम्मेलन में दिव्यांगजनों के प्रमाण पत्र प्राप्त करने में हो रही समस्याओं को दूर करने के उपायों पर चर्चा की गई। सभी का मत था कि दिव्यांगता का प्रमाण पत्र इस क्षेत्र में कार्य कर रहे प्रशिक्षित एवं अनुभव प्रोफेशनल्स द्वारा बनाए जाने की अनुमति प्रदान की जाए क्योंकि चिकित्सक दिव्यांगता के बारे में बहुत कम जानकारी रखते हैं तथा वे किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए भी ऊपर उपर्युक्त प्रोफेशनल्स के द्वारा किए जाने वाले परीक्षणों पर निर्भर रहते हैं। 
सम्मेलन में दिव्यांग जनों को मिलने वाली सुविधाओं जीवन बीमा पेंशन पर भी विस्तार से चर्चा की गयी। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर इरा सिंघल मौजूद थी जो अपने बैच की टॉपर आईएएस है। वह खुद दिव्यांग है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व मेंबर सेक्रेट्री डॉ जे पी सिंह ने की। सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के तौर पर दिव्यांगजन उपायुक्त डॉ एस के प्रसाद शामिल हुए। नई दिल्ली के पटपडगंज स्थित मैक्स हॉस्पिटल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. राजेश कुमार ने चर्चा में हिस्सा लिया और दिव्यांगता से जड़े महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक पहलुओं को रखा। 
कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए ए आर पी पी के अध्यक्ष  राजेश द्विवेदी  ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्यरत सरकारी अर्द्धसरकारी प्रोफेशनल्स एवं अभिभावकों के बीच सामान्य में स्थापित करना है ताकि दिव्यांग जनों को आसानी से उनके अधिकार मिल सके और वह भी समाज की मुख्यधारा से जुड़ कर अपना योगदान दे सकें। 
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती आकांक्षा सक्सेना एवं धन्यवाद ज्ञापन श्री राकेश सक्सेना ने किया।


Thursday, 1 August 2019

शारदा युनिवर्सिटी ने मनाया ओरल हाइजीन डे 

नई दिल्ली, एक अगस्त, 2019: मुंह की नियमित सफाई कई बीमारियों की रोकथाम और संपूर्ण सेहत को दुरूस्त बनाए रखने में एक अहम भूमिका निभाती है। हालांकि, जागरूकता की कमी, उचित जानकारी का अभाव और लापरवाही भरा रवैये से अक्सर मुंह और दांत से जुड़े कई जटिल मुद्दे पैदा हो जाते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए शारदा युनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज के पीरियडोंटल विभाग ने आम लोगों को मुंह की साफ सफाई के महत्व के बारे में शिक्षित करने, प्रेरित करने और जानकारी देने के लिए 1 अगस्त को नेशनल ओरल हाइजीन डे से पहले एक विशेष शिविर का आयोजन किया। 25 जुलाई से शुरू होकर एक सप्ताह तक चले इस शिविर को इंडियन सोसाइटी ऑफ पीरियडोंटोलॉजी के संस्थापक डॉक्टर जी.बी. शानवलकर की जयंती मनाने के उददेश्य से भी आयोजित किया गया।


मुंह और दांतों की साफ सफाई से मुंह की दुर्गध रोकने, दांत गिरने और मुंह की दूसरी बीमारियां रोकने में मदद मिल सकती है और उम्र बढ़ने पर भी दांतों को मजबूत बनाए रखने में मदद मिलती है। अस्वस्थ्य मुंह खासकर मसूडे की बीमारी से ग्रसित व्यक्ति के मामले में दिल का दौरा, अनियंत्रित मधुमेह जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इस विशेष ओरल हेल्थ कैंप के तहत करीब 600 मरीजों के मुंह की जांच की गई और मुंह की देखभाल के बारे में उन्हें सलाह दी गई एवं साथ ही दांत साफ करने की सही तकनीकी की भी जानकारी दी गईउन्हें निःशुल्क मुंह साफ करने के नमूने भी उपलब्ध कराए गए।


शारदा युनिवर्सिटी का स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज वर्ष 2020 तक सभी के लिए ओरल हेल्थ का मिशन लेकर चलने को प्रतिबद्ध है और इसने मुंह की देखभाल के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने और नजरअंदाजी के रवैये पर अंकुश लगाने का लक्ष्य रखा है जोकि दांत की बीमारियों के लिए प्रमुख कारणों में से एक है। एक सप्ताह की अवधि के दौरान मरीज निःशुल्क स्केलिंग का लाभ उठाने और मसूडे की जांच की सभी प्रकियाओं पर 50 प्रतिशत छूट का लाभ उठाने के लिए शारदा युनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ डेंटल साइंसेज पधारे


शारदा युनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ डेंटल साइंस के डीन प्रोफेसर डॉक्टर एम. सिद्धार्थ ने कहा, “सभी के लिए अधिक से अधिक ओरल हेल्थकेयर के विभाग के विजन के साथ ओरल हाइजीन सप्ताह मनाया गया जिसमें मुंह की देखभाल का संपूर्ण स्वास्थ्य के साथ संबंध को समझकर संपूर्ण स्वास्थ्य को दुरूस्त रखने पर ध्यान केंद्रित किया गया।"


उन्होंने कहा, “मुंह के अच्छे स्वास्थ्य का अर्थ अच्छे दांत और खूबसूरत मुस्कान से कहीं अधिक हैयह संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अच्छे पोषण, उचित पाचन, भाषा विकास और आत्म सम्मान के लिए दांत महत्वपूर्ण हैं।”


जांच कार्यक्रमों के अलावा, विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए कार्यक्रम आयोजित किए गए जिसमें उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से मुंह की अच्छी साफ सफाई बनाए रखने के महत्व के बारे में जानकारी दीलोगों को उत्साह बनाए रखने के लिए विजेताओं और प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र और ईनाम भी दिए गए।


एआईडब्ल्यूए ---AIWA --ने आधुनिक कन्ज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के साथ भारतीय बाज़ार में किया प्रवेश

नई दिल्ली, 1 अगस्त, 2019. एआईडब्ल्यूए ..AIWA . कन्ज्यूमर प्रोडक्ट्स एलएलपी बाज़ार में अपने आप को स्थापित कर चुकी है और ऑडियो-विजुअल एंटरटेनमेन्ट प्रोडक्ट्स को प्रोमोट कर रही है। आज AIWA की नई रेंज अनावरण किया गया, जिसके तहत कुछ अत्याधुनिक कन्ज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स का लॉन्च किया गया हैकंपनी बेजोड़ फीचर्स से युक्त प्रीमियम स्मार्ट 4 के अल्ट्रा हाई डेफिनेशन एलईडी टीवी, स्मार्ट होम ऑडियो सिस्टम, वायरलैस हैडफोन और पर्सनल ऑडियो प्रोडक्ट्स की बिक्री शुरू करने जा है।


आज के बाजार में उत्पादों के विकास एवं तकनीकी उन्नति की तीव्र गति को देखते हुए AIWA ऐसे आधुनिक एवं अनूठे उत्पाद पेश करेगी जो अपनी अत्याधुनिक तकनीक के साथ बेहद सरल, किफायती उपयोगकर्ता के अनुकूल होंगे।


लॉन्च के अवसर पर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर AIWA का प्रतिनिधित्व करने वाले श्री जैफरी एलन गोल्डबर्ग कहा, "हमने भारत के गतिशील बाज़ार में अपार संभावनाओं को देखते हुए इस ब्राण्ड को यहां लॉन्च करने का फैसला लिया है। हालांकि बाजार में कई अन्य उत्पाद हैं, किंतु भारतीय उपभोक्ताओं द्वारा अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने की क्षमता अपने आप में बेजोड़ है। इसके अलावा मुझे विश्वास है कि भारत इस नए ब्राण्ड को खूब पसंद करेगा।"


भारत के लिए अपनी रणनीति पर बात करते हुए श्रीमति मनमीत चौधरी, मैनेजिंग डायरेक्टर, AIWA भारत के लिए अपनी रणनीति पर बात करते हुए श्रीमति मनमीत चौधरी, मैनेजिंग डायरेक्टर, AIWA इण्डिया ने कहा, "हम भारतीय उपभोक्ताओं को विभिन्न कीमतों पर अत्याधुनिक फीचर्स से युक्त उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए अथक प्रयास करते हैं, जो विभिन्न भोगौलिक क्षेत्रों के उपभोक्ताओं की ज़रूरतों को पूरा कर सके। यह लॉन्च इसी दिशा में हमारा एक प्रयास है, जो सरल एवं किफायती तकनीकी उत्पादों के साथ उपभोक्ताओं की उम्मीदों पर खरा उतरने में कारगर साबित होगा। हम आने वाले सालों में भारत में रु 200 करोड़ का निवेश करेंगे।"


ट्रिवीट्रॉन और न्यूबर्ग ने भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के उपक्रम 'सी-कैम्प' के साथ एमओयू पर दस्तखत किए

नई दिल्ली1 अगस्त2019: हेल्थकेयर इंडस्ट्री को सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाली प्रमुख चिकित्सा उपकरण कंपनी ट्रिवीट्रॉन और न्यूबर्ग डायग्नोस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड, जो भारत में सबसे तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य सेवा है, और भारत में शीर्ष 4 नैदानिक सेवा प्रदाताओं में शुमार है, ने सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलीक्युलर प्लेटफॉर्म्स (सी-कैम्प),  जो भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग का उपक्रम है, के साथ एक मेमोरंडम ऑफ एसोसिएशन (एमओयू) पर दस्तखत करके रणनीतिक साझेदारी का ऐलान किया है ।


ट्रिवीट्रॉन और सी-कैम्प के साथ ये साझेदारी "संयुक्त बौद्धिक संपदा" (यानी उत्पाद एवं प्रक्रिया पेटेंट तथा इसकी संपूर्ण जानकारी) के तत्वाधान में पूरी तरह से स्वदेशी रूप से विश्व स्तरीय हेल्थकेयर तकनीकों के सहकारी विकास की दिशा में दोनों के लिए एक रणनीतिक कदम है।


एमओयू पर डॉ. रेणु स्वरूप, सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार और अध्यक्ष, जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC); डॉ. तस्लीमरीफ़ सैय्यद, सीईओ और निदेशक, सी-कैंप; डॉ. जीएसके वेलु, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, न्यूबर्ग डायग्नोस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड और ट्रिवीट्रॉन हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड और डॉ. सुजय रामप्रसाद, मेडिकल डायरेक्टर, न्यूबर्ग डायग्नोस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।


सी-कैम्प ने एक स्वदेशी मल्टीप्लेक्स फ्लोरेसेंट माइक्रोफ्लुइडिक-एनालाइजर का विकास और परीक्षण किया है, जो दो पेटेंटों के अंतर्गत आता है- माइक्रोफ्लुइडिक्स फ्लो एनालाइजर के लिए एक बेस-पेटेंट, जिसे कई देशों में दर्ज और मंजूर किया गया है तथा मल्टीप्लेक्स फंक्शनलिटी को कवर करने वाला एक अन्य फॉलो-ऑन पेटेंट। सी-कैम्प अवधारणा का प्रमाण प्रदर्शित करेगा और क्लीनिकल निदान के लिए एक जैविक द्रव विश्लेषक का सह-विकास करने में भागीदार बनेगा। इस एमओयू के द्वारा ट्रिवीट्रॉन, जिसका वैश्विक स्तर पर इमेजिंग उपकरणों समेत नैदानिक उपकरण विकसित और स्थापित करने का इतिहास रहा है, से अपेक्षा की जा रही है कि वह इन सी-कैम्प विकसित प्रौद्योगिकियों की व्यावसायिक रूप से व्यापक बाजार तक पहुंच बनाने में मदद करेगा।


सी-कैम्प  : द सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलीक्युलर प्लेटफॉर्म्स (सी-कैम्प) भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग का एक उपक्रम है,जिसे अत्याधुनिक जीवन विज्ञान और हेल्थकेयर अनुसंधान व नवाचार को सक्षम करने के लिए जनादेश प्राप्त है। यह देश के सबसे रोमांचक और अनूठे जीवन विज्ञान नवाचार हब में से एक है, जो एक ही मंच पर शिक्षा, उद्योग और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को प्रस्तुत कर रहा है। यह देश के कुछ सबसे पुराने बायो क्लस्टरों में से एक- बैंगलोर लाइफ साइंसेज क्लस्टर (बीएलआईएससी) का हिस्सा भी है, जिसमें नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज (एनसीबीएस) और इंस्टीट्यूट फॉर स्टेम सेल बायोलॉजी एंड रिजेनेरेटिव मेडिसिन (इनस्टेम) और सी-कैम्प शामिल हैं।


 ट्रिवीट्रॉन हेल्थकेयर : 1997 से सस्ती स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाली एक चिकित्सा प्रौद्योगिकी कंपनी के रूप में ट्रिवीट्रॉन हेल्थकेयर की यात्रा कई स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए प्रेरणा का एक आकर्षक धागा बुनती है। अनुसंधान और विकास में ठोस विशेषज्ञता रखते हुए ट्रिवीट्रॉन 180 देशों में असाधारण चिकित्सा प्रौद्योगिकी उत्पादों का निर्माण और वितरण करती है। 9यूएसएफडीए, सीई प्रमाणित विनिर्माण सुविधाओं के साथ ट्रिवीट्रॉन ने नवजात स्क्रीनिंग, इन-विट्रो डायग्नोस्टिक्स, इमेजिंग एवं रेडियोलॉजी, रेडिएशन प्रोटेक्शन, क्रिटिकल केयर और ऑपरेटिंग रूम सॉल्यूशंस के क्षेत्र में नवाचार का नेतृत्व करती है। इस प्रकार इसने एक समग्र स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के रूप में बड़ा नाम कमाया है।


न्यूबर्ग डायग्नोस्टिक्स : भारत, यूएई और दक्षिण अफ्रीका की सर्वश्रेष्ठ प्रयोगशालाएं ने विकासशील देशों की पहुंच के भीतर नवीनतम प्रौद्योगिकी और तकनीकों को लाने के लिए न्यूबर्ग डायग्नोस्टिक्स के बैनर तले एकजुट हुई हैं। अपनी संयुक्त शक्तियों का उपयोग करते हुए, न्यूबर्ग गठबंधन 5000 से अधिक किस्मों की पैथोलॉजिकल जांच करने की क्षमता रखता है और डेटा विज्ञान और एआई टूल्स द्वारा सहायता प्राप्त सबसे उन्नत तकनीकों का उपयोग करके दुर्लभ बीमारियों के लिए रोकथाम और प्रारंभिक निदान, फोकस्ड वेलनेस प्रोग्राम और संरचित रोग प्रबंधन कार्यक्रमों को बढ़ावा देगा। आज, न्यूबर्ग डायग्नोस्टिक्स भारतीय मूल की शीर्ष निदान कंपनियों और भारत में सबसे तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य सेवा स्टार्ट-अप में से एक है। न्यूबर्ग कंसोर्टियम के संस्थापक सदस्य - आनंद डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी (बैंगलोर), सुप्राटेक माइक्रोप्रैथ (अहमदाबाद), एह्रलिच लैबोरेटरी (चेन्नई),ग्लोबल लैब्स (दक्षिण अफ्रीका), और मिनर्वा डायग्नोस्टिक्स (दुबई) 200 से अधिक वर्षों की अपनी संयुक्त विरासत ला रहे हैं और सालाना 20 मिलियन से अधिक नमूने संसाधित कर रहे हैं। दुनिया भर के कुछ बेहतरीन पैथोलॉजिस्ट, बायोकेमिस्ट, जेनेटिक्स, माइक्रोबायोलॉजिस्ट और कई अन्य क्लिनिकल लैब प्रोफेशनल्स बारीकी से काम कर रहे हैं, ज्ञान साझा कर रहे हैं और अगले स्तर पर सटीक और समय पर निदान के लिए डायग्नोस्टिक्स तकनीकों की नवीनतम पीढ़ी का उपयोग कर रहे हैं।


 एनएएएलएम : न्यूबर्ग आनंद एकेडमी ऑफ़ लेबोरेटरी मेडिसिन (एनएएएलएम) नैदानिक प्रयोगशाला चिकित्सा के आला क्षेत्रों में योग्य पेशेवरों के प्रशिक्षण का समर्थन और उन्हें बनाए रखने के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे के निर्माण; वैज्ञानिक अनुसंधान और चिकित्सक के बीच की खाई को कम करने के लिए अनुवादिक अनुसंधान पर ध्यान देने के साथ अनुसंधान परियोजनाओं की पहचान करने और शुरू करने; और आणविक परीक्षणों और जीनोमिक्स सहित नियमित और विशेष प्रयोगशाला परीक्षणों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करने के लिए लागत प्रभावी प्रवीणता परीक्षण समाधान और समर्थन प्रदान करने के लिए प्रयास करता है। बैंगलोर से आधारित, एनएएएलएम की प्रवीणता परीक्षण कार्यक्रम, न्यूरो-क्यूएपी की जनवरी 2019 में शुरुआत की गई थी और आज इसके पास हिस्टोपैथोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, विशेष रसायन विज्ञान, हेमाटोलॉजी और दूसरों के बीच सेरोलॉजी को कवर करने वाली योजनाओं के लिए लगभग 300 प्रयोगशालाओं की वर्तमान सदस्यता है। एनएएएलएम ने लैबोरेटरी मेडिसिन के डॉक्टरों के लिए पोस्ट-डॉक्टोरल सर्टिफिकेट कार्यक्रमों के साथ-साथ विश्व लैब प्रोफेशनल्स सप्ताह 2019 के अवसर पर तकनीकीविदों  के लिए पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू किए हैं।